भारतीय वायुसेना की उस नई रणनीति ने पाकिस्तान के पूरे रक्षा तंत्र को हिलाकर रख दिया है, जिसमें भारतीय लड़ाकू विमान अपनी सीमा के भीतर रहकर ही दुश्मन के ठिकानों पर घातक मिसाइलें बरसा सकते हैं. इसे मिलिट्री की दुनिया में स्टैंडऑफ रेंज एयर-लॉन्च मिसाइल स्ट्रैटेजी कहा जाता है. इसका सीधा मतलब ये है कि भारतीय जेट्स को अब पाकिस्तान के एयरस्पेस में दाखिल होने की कोई जरूरत ही नहीं है. पायलट सैकड़ों किलोमीटर दूर सुरक्षित दूरी पर उड़ते हुए दुश्मन के सैन्य कैंपों और बंकरों को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं. इस खतरनाक भारतीय रणनीति से अपनी चमड़ी बचाने के लिए अब पाकिस्तान ने जल्दबाजी में 3 बड़े जाल बिछाने शुरू कर दिए हैं.
क्या है भारत की स्टैंडऑफ स्ट्रैटेजी जो उड़ा रही दुश्मन के होश
स्टैंडऑफ मिसाइल अटैक का सीधा मतलब ये होता है कि हमला करने वाले विमान को दुश्मन की मिसाइलों या एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम के निशाने पर आने की जरूरत ही नहीं पड़ती. भारत ने बीते कुछ सालों में अपनी वायुसेना को दुनिया की सबसे आधुनिक और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस कर दिया है. भारतीय बेड़े में शामिल मुख्य मिसाइलें दुश्मन के काल की तरह हैं.
- इनमें पहली है ब्रह्मोस, जो चार सौ से पांच सौ किलोमीटर से भी अधिक दूरी तक तबाही मचाने वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है.
- दूसरी है स्कैल्प मिसाइल, जिसे राफेल जेट्स से दागा जाता है और ये लगभग तीन सौ किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को ढूंढकर मारती है.
- इसके अलावा इजराइली तकनीक से लैस रैंपेज और क्रिस्टल मेज जैसी मिसाइलें हैं, जो दूर से ही दुश्मन के एयरबेस और रडार को मलबे में तब्दील कर सकती हैं.
- भारत के पास स्वदेशी एंटी-रेडिएशन मिसाइल रुद्रम भी मौजूद है, जो दुश्मन के चालू रडार को दूर से ही खोजकर पूरी तरह खत्म कर देती है.
इस बेजोड़ रणनीति की बदौलत भारतीय पायलटों के लिए जोखिम शून्य के बराबर हो जाता है और पाकिस्तान के अंदरूनी हिस्सों तक सटीक तबाही मचाना बेहद आसान हो जाता है.
भारत की काट में पाकिस्तान ने बिछाए ये 3 खतरनाक जाल
भारतीय वायुसेना की इस जबरदस्त बढ़त को रोकने के लिए पाकिस्तान अब घबराहट और बौखलाहट में चीन से मिले हथियारों और नए एयर डिफेंस प्लान के दम पर तीन बड़े चक्रव्यूह तैयार करने में जुट गया है.
- पहला जाल: चीन से मिली लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस मिसाइलें – पाकिस्तान अपने मुख्य एयरबेस, महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों और बड़े शहरों की सुरक्षा के लिए चीन से मिली एचक्यू-9पी और एचक्यू-16 जैसी लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल तैनात कर रहा है. पाकिस्तान की चाल ये है कि अगर भारतीय जेट्स बॉर्डर के करीब से भी मिसाइल दागने की कोशिश करें, तो उन्हें काफी दूर से ही डिटेक्ट करके उन पर दबाव बनाया जा सके.
- दूसरा जाल: लंबी दूरी की बीवीआर मिसाइलों की तैनाती- पाकिस्तान ने चीन से मिले जे-10सीई और जेएफ-17 ब्लॉक 3 फाइटर जेट्स के साथ पीएल-15ई एयर-टू-एयर मिसाइलें अपने बेड़े में शामिल की हैं. इन मिसाइलों की मारक क्षमता लगभग एक सौ पचास किलोमीटर तक बताई जाती है. पाकिस्तान का ये प्लान है कि इन लंबी दूरी की मिसाइलों का डर दिखाकर भारतीय विमानों को अपनी सीमा के नजदीक आने से ही रोक दिया जाए.
- तीसरा जाल: इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और अर्ली वॉर्निंग सिस्टम- पाकिस्तान अपनी एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग क्षमताओं और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम को मजबूत करने की कोशिश में लगा हुआ है. उसका मकसद भारत की गाइडेड मिसाइलों के जीपीएस गाइडेंस और सिग्नलों को हवा में ही भटकाना या जैम कर देना है ताकि मिसाइलें अपने सटीक लक्ष्य तक न पहुंच सकें.
भारत Vs पाकिस्तान की रणनीतिक ताकत
अगर दोनों वायुसेनाओं की क्षमताओं का गहराई से विश्लेषण करें, तो भारत का पलड़ा हर मायने में भारी नजर आता है.
भारतीय वायुसेना के पास ब्रह्मोस, स्कैल्प, रैंपेज, रुद्रम और अस्त्र जैसी मिसाइलें हैं, जिनकी स्ट्राइक रेंज एक सौ पचास किलोमीटर से लेकर पांच सौ किलोमीटर से भी ज्यादा है. भारत की मुख्य नीति बिना किसी जोखिम के सटीक और घातक हमला करने की है. इसके लिए भारत के पास स्वदेशी डीआरडीओ की तकनीक के साथ-साथ फ्रांस, इजराइल और रूस का मजबूत तकनीकी सहारा मौजूद है.
दूसरी तरफ, पाकिस्तान की तैयारी सिर्फ पीएल-15ई मिसाइलों और चीन से मिले एचक्यू मिसाइल सिस्टम पर टिकी है. उसकी स्ट्राइक रेंज केवल सौ से दो सौ किलोमीटर तक ही सीमित है. उसकी पूरी रणनीति केवल एक्टिव इंटरसेप्शन और जैमिंग पर निर्भर है. सबसे बड़ी कमजोरी ये है कि पाकिस्तान इस पूरे खेल में नब्बे प्रतिशत से भी अधिक चीन पर निर्भर है.
पाकिस्तान खुद का जबड़ा तोड़ न ले
पाकिस्तान चाहे जितने भी चीनी जाल बिछा ले, लेकिन भारत की स्टैंडऑफ रणनीति को पूरी तरह नाकाम करना उसके लिए न केवल नामुमकिन है बल्कि बेहद आत्मघाती साबित हो सकता है.
पहली सबसे बड़ी वजह है पाकिस्तान की कंगाली और खस्ताहाल अर्थव्यवस्था. अत्याधुनिक रडार, एडवांस मिसाइलें और एयर डिफेंस नेटवर्क बेहद खर्चीले होते हैं. इन्हें लगातार मेंटेन और अपग्रेड करना पाकिस्तान के बस की बात बिल्कुल नहीं है.
दूसरी बड़ी वजह है भारतीय मिसाइलों की सुपरसोनिक स्पीड. ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें ध्वनि की गति से 3 गुना तेज उड़ती हैं. पाकिस्तान के एयर डिफेंस को प्रतिक्रिया देने के लिए महज कुछ ही सेकंड का समय मिलता है. इतने कम समय में इतनी तेज मिसाइल को इंटरसेप्ट करना लगभग नामुमकिन माना जाता है.
तीसरी बड़ी वजह है भारत का सैचुरेशन अटैक प्लान. अगर भारतीय वायुसेना एक साथ दर्जनों मिसाइलें अलग-अलग दिशाओं से दागे, तो पाकिस्तान का कोई भी चीनी रडार या मिसाइल सिस्टम बुरी तरह ओवरलोड हो जाएगा और ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा.
भारत के आगे पाकिस्तान की कोई औकात नहीं
भारतीय वायुसेना की स्टैंडऑफ मिसाइल स्ट्रैटेजी ने पूरे दक्षिण एशिया में हवाई युद्ध का समीकरण ही बदल दिया है. पाकिस्तान अब भारत के साथ सीधे फाइट यानी आसमान में आमने-सामने की जंग लड़ने की स्थिति में बचा ही नहीं है. उसे भारत की बिना सीमा पार किए हमला करने की क्षमता का भयंकर खौफ सता रहा है. यही कारण है कि पाकिस्तान चीन के सहारे अपने डिफेंस को मजबूत करने की नाकाम कोशिशें कर रहा है. लेकिन भारत की मजबूत तकनीकी बढ़त, घातक हथियारों के विविधता और स्वदेशी मारक क्षमता के आगे पाकिस्तान की ये चालें उसके खुद के लिए ही काल साबित होंगी.