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Yemen China Missile Parts: यमन के हूती विद्रोही चीन से मिले पुर्जों की मदद से मध्यम दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की कोशिश कर सकते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन मिसाइलों की मारक दूरी करीब 1,930 किलोमीटर तक हो सकती है. इससे सऊदी अरब और इजरायल के लिए खतरा बढ़ने की आशंका है. इस बीच, यमन की सेना ने ताइज में 200 से ज्यादा हूती लड़ाकों के मारे जाने या घायल होने का दावा किया है.
यमन के हूती विद्रोही बना रहे नई बैलिस्टिक मिसाइल. (Reuters)
Yemen Houthi VS Saudi Arabia: यमन में हूती विद्रोही अपनी मिसाइल ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, हूती चीन से मिले पार्ट्स की मदद से ऐसी बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की कोशिश कर सकते हैं, जो सऊदी अरब और इजरायल तक हमला करने में सक्षम हो. इन मिसाइलों की मारक क्षमता करीब 1,200 मील यानी लगभग 1,930 किलोमीटर तक हो सकती है. इस बीच, यमन के ताइज इलाके में सेना और हूती विद्रोहियों के बीच भीषण लड़ाई की खबर है. यमन की सेना का दावा है कि बुधवार की झड़पों में 200 से ज्यादा हूती लड़ाके मारे गए या घायल हुए.
चीन से मंगाए गए मिसाइलों के पुर्जे
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, हथियारों की जांच करने वाली संस्था कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च ने कुछ ऐसे पुर्जों की जांच की है, जिन्हें यमन के अधिकारियों ने जब्त किया था. ये पुर्जे चीन से भेजे गए सामान में छिपाकर लाए जा रहे थे. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल ऐसे दो सामान की खेप पकड़ी गई थी. इनमें खास तरह के धातु के हिस्से, मिसाइल के पंख, रॉकेट मोटर के पुर्जे, जांच करने वाले उपकरण और भीषण गर्मी सहने वाली धातु शामिल थी. इन पुर्जों का इस्तेमाल ईरान की खैबर शेकेन मिसाइल जैसे हथियार बनाने में हो सकता है. इस मिसाइल की मारक दूरी करीब 1,200 मील बताई गई है. कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च के वरिष्ठ विश्लेषक फैबियन हिन्ज के मुताबिक, ऐसे पुर्जों का आयात इस बात का संकेत हो सकता है कि हूती विद्रोही मिसाइल बनाना शुरू कर चुके हैं या इसकी तकनीक विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, वे इस काम में कितने आगे बढ़े हैं, यह अभी साफ नहीं है.
अब खुद की ताकत बढ़ा रहे हूती
हूती विद्रोही लंबे समय से हथियारों और मिसाइल तकनीक के लिए ईरान और उसके सहयोगी हिज्बुल्लाह पर निर्भर रहे हैं. अब ग्रुप अपने स्तर पर हथियार बनाने की क्षमता बढ़ाने में जुटा है. वॉशिंगटन की जोखिम सलाह देने वाली संस्था बाशा रिपोर्ट के संस्थापक मोहम्मद अल-बाशा के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने अपने यहां हथियार बनाने की क्षमता बढ़ाई है. साथ ही, उन्होंने सामान जुटाने के नए रास्ते बनाए हैं और तस्करी करने वालों के साथ अपने संपर्क बढ़ाए हैं. संयुक्त राष्ट्र की यमन प्रतिबंध समिति के पूर्व विशेषज्ञ हेनरी थॉम्पसन का कहना है कि मध्यम दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से हूती विद्रोही सऊदी अरब के अंदरूनी इलाकों तक हमला कर सकते हैं. इन मिसाइलों में ड्रोन और क्रूज मिसाइलों के मुकाबले ज्यादा विस्फोटक ले जाने की क्षमता भी हो सकती है.