Infrastructure: राजस्थान में मजबूत होगा तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर, 241 करोड़ से भिवाड़ी में क्या-क्या बदलेगा? जानें पूरा प्लान

Infrastructure: राजस्थान में मजबूत होगा तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर, 241 करोड़ से भिवाड़ी में क्या-क्या बदलेगा? जानें पूरा प्लान


जयपुर. राजस्थान में औद्योगिक और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ युवाओं को उद्योगों की जरूरत के मुताबिक तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (पीएम-सेतु) योजना के तहत भिवाड़ी क्लस्टर के लिए 241 करोड़ रुपये की रणनीतिक निवेश योजना को मंजूरी दी गई है. इस परियोजना के तहत राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं, स्मार्ट क्लासरूम, उन्नत प्रयोगशालाएं और डिजिटल शिक्षण संसाधन विकसित किए जाएंगे. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों के बाद राष्ट्रीय संचालन समिति ने निवेश योजना को मंजूरी प्रदान की है.

इसके बाद केंद्र सरकार, राज्य सरकार और एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के बीच शेयरहोल्डर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए. राजस्थान यह समझौता करने वाला देश का पहला राज्य बना है. इस परियोजना का फोकस केवल प्रशिक्षण संस्थानों की इमारतों और सुविधाओं को अपग्रेड करना नहीं, बल्कि उन्हें औद्योगिक विकास की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना भी है. भिवाड़ी और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की मांग को देखते हुए तकनीकी प्रशिक्षण का ढांचा विकसित किया जाएगा. इससे औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर को कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है.

भिवाड़ी बनेगा हब, चार आईटीआई से जुड़ेगा प्रशिक्षण नेटवर्क

पीएम-सेतु योजना के तहत राजकीय आईटीआई भिवाड़ी को हब बनाया जाएगा, जबकि राजकीय आईटीआई अलवर, नीमराणा, तिजारा और किशनगढ़बास को स्पोक संस्थानों के रूप में जोड़ा जाएगा. इस व्यवस्था के तहत भिवाड़ी में विकसित होने वाली स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाओं और डिजिटल कंटेंट जैसी सुविधाओं का लाभ चारों स्पोक संस्थानों के विद्यार्थियों को भी मिलेगा. इससे अलग-अलग संस्थानों में प्रशिक्षण सुविधाओं को साझा करने और तकनीकी शिक्षा का आधार मजबूत करने में मदद मिलेगी. भिवाड़ी क्लस्टर के लिए एंकर इंडस्ट्री पार्टनर एचजी इन्फ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड होगी. कंपनी का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र पर रहेगा. इसके साथ ही एनसीआर से सटे औद्योगिक क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमेशन और इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे. विद्यार्थियों को ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग और वास्तविक कार्य-अनुभव देने पर जोर रहेगा.

केंद्र, राज्य और उद्योग मिलकर करेंगे निवेश

परियोजना के तहत प्रत्येक क्लस्टर की लागत में केंद्र सरकार का लगभग 50 प्रतिशत, राज्य सरकार का 33 प्रतिशत और उद्योग का करीब 17 प्रतिशत योगदान प्रस्तावित है. क्लस्टर के संचालन के लिए बनने वाले विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) में एंकर इंडस्ट्री पार्टनर की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत होगी. केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 24.5-24.5 प्रतिशत निर्धारित की गई है. इस मॉडल के जरिए प्रशिक्षण संस्थानों के विकास में सरकार के साथ निजी उद्योगों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी. इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीकी सुविधाएं विकसित करने के साथ प्रशिक्षण को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना है. इससे तकनीकी शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगारपरक कौशल विकास के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिल सकती है.

राजस्थान में 12 क्लस्टर्स से विकसित होगा तकनीकी प्रशिक्षण का ढांचा

पीएम-सेतु योजना के तहत राजस्थान में कुल 12 हब-स्पोक क्लस्टर प्रस्तावित हैं. भिवाड़ी क्लस्टर को मंजूरी मिलने के बाद शेष 11 क्लस्टर्स के लिए एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं. इनमें जयपुर, जोधपुर, कोटा, भरतपुर, बांसवाड़ा, बालोतरा, बीकानेर, भीलवाड़ा, कोटपूतली, सीकर और पाली शामिल हैं. इन क्लस्टर्स के माध्यम से प्रदेश के राजकीय आईटीआई में आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा. योजना का उद्देश्य तकनीकी शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर को उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुकूल बनाना, युवाओं को बेहतर व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना और कुशल कार्यबल तैयार करना है. इससे राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्रों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है.



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