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Meerut Blue Drum Case Witnesses : मेरठ के नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत के फैसले पर पूरे देश की नजर थी. अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है, लेकिन दोनों को सजा दिलाना इतना आसान नहीं था. इस मामले में पुलिस की ओर से कुल 34 गवाहों को लिस्टेड किया गया. इनमें से 22 को आधार बनाया गया. लोकल 18 ने इस केस के सभी पहलुओं को समझने के लिए जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे और वरिष्ठ वकील विजय बहादुर सिंह से बात की. अधिवक्ता केके चौबे कहते हैं कि इस जघन्य हत्याकांड के बाद देश में लगातार कई ऐसी घटनाएं देखने को मिलीं, जिसमें पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति को मारा. ऐसे में मेरठ से एक कड़ा संदेश जाना जरूरी था. केके चौबे बताते हैं कि जिन 22 गवाहों को उन्होंने केस में आधार बनाया, उसमें से दो गवाहों की भूमिका निर्णायक रही.
मेरठ. सौरभ राजपूत हत्याकांड में फैसला आ चुका है. मेरठ में जिला न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है. इस फैसले के बाद कचहरी परिसर में वकीलों और आम लोगों ने लड्डू बांटकर खुशी जाहिर की. इस केस के सभी पहलुओं को समझने के लिए लोकल 18 ने जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे और वरिष्ठ वकील विजय बहादुर सिंह से बात की. केके चौबे ने बताया कि मेरठ के जिला न्यायाधीश का यह जजमेंट देश में एक नजीर बनेगा. वे कहते हैं कि जिस तरह मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर अपने ही पति सौरभ राजपूत की हत्या कर टुकड़ों को नील ड्रम में छिपाया था, वह जघन्य अपराध था. इसके बाद से लगातार देश में कई ऐसी घटनाएं देखने को मिलीं, जिसमें पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति को मारा. ऐसे में मेरठ से एक कड़ा संदेश जाना जरूरी था. इस मामले में पुलिस की ओर से कुल 34 गवाहों को लिस्टेड किया गया. इनमें से 22 गवाहों को इस केस में आधार बनाया गया.
एक गलती, जो पड़ गई भारी
अधिवक्ता केके चौबे बताते हैं कि जिन 22 गवाहों को उन्होंने केस में आधार बनाया, उसमें दो गवाह सबसे महत्वपूर्ण साबित हुए. पहले गवाह, जिसने घटना वाले दिन साहिल को मुस्कान के घर जाते हुए देखा था. इस व्यक्ति को लास्ट सीन एविडेंस के तौर पर माना गया. दूसरा गवाह, जो लगातार सौरभ के फोन पर कॉल कर रहा था. मुस्कान ने उसका फोन उठाने के बाद बहुत ही गलत व्यवहार के साथ बात करने के बाद फोन काट दिया था. ऐसी उसने इसलिए किया क्योंकि वह सौरभ राजपूत का फोन उपयोग करते हुए पुलिस और परिवार के साथ दूसरे लोगों को गुमराह करने कोशिश कर रही थी. बचाव पक्ष की तरफ से मुस्कान की छोटी बेटियों और साहिल के माता-पिता को बुजुर्ग बताकर बचाव का प्रयास किया. केके चौबे बताते हैं कि लेकिन उनकी तरफ से जो गवाह पेश किए गए, कोर्ट ने उन्हें मुख्य आधार माना और बचाव पक्ष के आधारों को निराधार मानते हुए दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई.
पहले अटैची में रख रहे थे शव
सौरभ राजपूत के परिवार की तरफ से वकील रहे एडवोकेट विजय बहादुर सिंह लोकल 18 से कहते हैं कि इस केस में सभी गवाह काफी महत्वपूर्ण थे. घटना वाले दिन से लेकर हिमाचल प्रदेश के शिमला घूमने तक, जिन लोगों ने भी मुस्कान साहिल को देखा था, उन सभी की गवाही को अदालत के समक्ष पेश किया गया. इसी के आधार पर यह ऐतिहासिक फैसला आया है. 3 मार्च 2025 को मुस्कान और साहिल ने मिलकर सौरभ राजपूत की हत्या की. हत्या के बाद शव को पहले एक अटैची में बंद करने का प्रयास किया गया, लेकिन टुकड़े फिट न होने पर वह जली कोठी के पास से नीले रंग का ड्रम खरीदकर लाए. इसके बाद दोनों ने शव के टुकड़ों को नीले ड्रम में भरकर सीमेंट भर दिया. इसके बाद दोनों शिमला घूमने चले गए. जब सौरभ का काफी दिनों तक पता नहीं चला तो परिजनों ने आशंका जताई, जिसके बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच पड़ताल कर साहिल और मुस्कान को गिरफ्तार किया. इसके बाद न्यायालय प्रक्रिया शुरू हुई. एडवोकेट विजय बहादुर सिंह के मुताबिक अदालत ने साहिल और मुस्कान को धारा 302 और 238 के तहत दोषी माना. 302 के तहत हत्या के जुर्म में मृत्युदंड मिला है. 238 के तहत यह दोनों सुबूत को छिपाने के भी दोषी पाए गए.