लता मंगेशकर वो गाना, प्यार की उम्र लंबी मांगती रही हसीना, असल जिंदगी में प्यार के तड़पे हीरो-हीरोइन

लता मंगेशकर वो गाना, प्यार की उम्र लंबी मांगती रही हसीना, असल जिंदगी में प्यार के तड़पे हीरो-हीरोइन


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पुराने दौर के प्रेम गीतों में कुछ नगमे ऐसे हैं, जिनकी मिठास आज भी कम नहीं हुई. ‘मेरे प्यार की उम्र हो इतनी सनम’ भी उन्हीं में से एक है. राज बब्बर और अमृता सिंह पर फिल्माया गया यह गीत प्यार को हमेशा जिंदा रखने की ख्वाहिश दिखाता है. मगर दिलचस्प बात ये है कि पर्दे पर इश्क की मिसाल बने ये सितारे निजी जिंदगी में रिश्तों के अलग-अलग उतार-चढ़ाव से गुजरे.

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फिल्म ‘वारिस’ का ये गाना आज भी काफी पॉपुलर है.

नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ गाने ऐसे होते हैं जो समय की सीमाओं को लांघकर सदाबहार बन जाते हैं. साल 1988 में आई सुपरहिट फिल्म ‘वारिस’ का गाना ‘मेरे प्यार की उम्र हो इतनी सनम’ भी एक ऐसा ही आइकॉनिक लव सॉन्ग है. इस गाने में एक्ट्रेस अमृता सिंह और एक्टर राज बब्बर के बीच की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने दर्शकों का दिल जीत लिया था. गाने में हीरोइन अपने महबूब से उसके साथ लंबी उम्र और अमर प्यार की दुआ मांगती नजर आती है. हालांकि, कड़वी सच्चाई यह है कि पर्दे पर अमर प्यार की मन्नत मांगने वाले ये दोनों सितारे अपनी असल जिंदगी में मोहब्बत के दर्द से गुजरे.

‘मेरे प्यार की उम्र हो इतनी सनम…’ ये सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि उस दौर के प्यार की पूरी तस्वीर है. एक ऐसा प्यार, जिसमें साथ छूटने का डर भी है और उम्रभर साथ रहने की दुआ भी. लता मंगेशकर की आवाज में जब ये पंक्तियां सुनाई देती हैं तो पर्दे पर राज बब्बर और अमृता सिंह की जोड़ी नजर आती है. दोनों की आंखों में मोहब्बत है और दिल में एक ही ख्वाहिश- ये रिश्ता कभी खत्म न हो. लेकिन इस खूबसूरत फिल्मी प्रेम कहानी के पीछे दोनों सितारों की असल जिंदगी बिल्कुल अलग थी.

वर्मा मलिक के बोल और उत्तम-जगदीश का संगीत

रविंद्र पीपत के निर्देशन में बनी फिल्म ‘वारिस’ 80 के दशक की एक भावनात्मक और ड्रामा से भरपूर सफल फिल्म थी. इस फिल्म का निर्माण बलदेव गिल, जोगा सिंह चीमा और स्वर्ण योगराज ने किया था. फिल्म का संगीत उत्तम-जगदीश की जोड़ी ने दिया था, जबकि इसके बोल मशहूर गीतकार वर्मा मलिक ने लिखे थे.

लता मंगेशकर और मनमोहन सिंह की जादुई आवाज

‘मेरे प्यार की उम्र हो इतनी सनम’ गाने को सुरों की मल्लिका लता मंगेशकर और मनमोहन सिंह ने अपनी जादुई आवाजों से सजाया था. यह गाना रिलीज़ होते ही हर प्रेमी जोड़े की जुबां पर चढ़ गया था. गाने के विजुअल्स में अमृता सिंह की सादगी, राज बब्बर का गंभीर अंदाज और पंजाब के खूबसूरत खेत-खलिहान आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं. लेकिन पर्दे की इस खूबसूरत लव स्टोरी के पीछे दोनों कलाकारों की रियल लाइफ लव स्टोरी काफी दर्दभरी रही.

पर्दे पर अमृता बनीं प्यार की आवाज

गाने में अमृता सिंह का किरदार अपने प्यार को लेकर पूरी तरह समर्पित दिखाई देता है. राज बब्बर के साथ उनकी जोड़ी उस दौर के दर्शकों को खूब पसंद आई. गाने में दोनों का रोमांस किसी शोर-शराबे वाला प्यार नहीं है. यह शांत और गहरा एहसास है. यही वजह है कि आज भी जब पुराने दौर के रोमांटिक गानों की बात होती है, तो यह गीत अपनी अलग जगह बना लेता है.

राज बब्बर की रियल लव स्टोरी

राज बब्बर की निजी जिंदगी हमेशा चर्चा और विवादों में रही. उन्होंने नादिरा बब्बर से शादी की थी, लेकिन 80 के दशक में जब वह मशहूर एक्ट्रेल स्मिता पाटिल के संपर्क में आए, तो दोनों में गहरा प्यार हो गया. राज बब्बर ने अपना घर छोड़ दिया और स्मिता पाटिल से शादी कर ली. हालांकि, यह खुशियां ज्यादा दिन नहीं टिक सकीं. साल 1986 में अपने बेटे प्रतीक बब्बर के जन्म के कुछ ही दिनों बाद ही स्मिता पाटिल का निधन हो गया. स्मिता के अचानक चले जाने से राज बब्बर पूरी तरह टूट गए थे. जब 1988 में फिल्म ‘वारिस’ रिलीज हुई, तब राज बब्बर अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे थे और स्मिता की यादों के दर्द से तड़प रहे थे.

अमृता का अधूरा पहला प्यार और कड़वी राहें

अमृता सिंह भी अपनी असल जिंदगी में सच्चे प्यार के लिए तरसती रहीं. 80 के दशक में अमृता सिंह का नाम पूर्व क्रिकेटर रवि शास्त्री के साथ जुड़ा था. दोनों सगाई तक पहुंच चुके थे, लेकिन कुछ शर्तों के कारण यह रिश्ता टूट गया. इसके बाद साल 1991 में अमृता सिंह ने खुद से 12 साल छोटे सैफ अली खान से परिवार के खिलाफ जाकर शादी की. उस समय अमृता एक स्टार थीं, जबकि सैफ ने बॉलीवुड में कदम भी नहीं रखा था. इस शादी से उनके दो बच्चे सारा अली खान और इब्राहिम अली खान हुए. लेकिन 13 साल बाद यह शादी बेहद कड़वे मोड़ पर तलाक के साथ खत्म हुई. प्यार में मिले धोखे और तलाक के बाद अमृता ने दोबारा कभी शादी नहीं की और अकेले ही अपने बच्चों की परवरिश की.



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