काम की खबर: क्या आपकी मिठाइयों पर लगी चांदी की वर्क नॉन-वेजीटेरियन है?
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अक्सर दुकानों में मिठाइयों की चमक और रौनक बढ़ाने के लिए चांदी के वर्क का इस्तेमाल किया जाता है. सिल्वर वर्क (या चांदी का वर्क) एक बहुत पतला चांदी का पन्ना होता है, जो सिर्फ 0.2 से 0.8 माइक्रोमीटर मोटा होता है. लेकिन इंस्टाग्राम और फेसबुक के जमाने में इस चांदी के वर्क को लेकर कई बार ये सवाल उठता है कि क्या यह वर्क वाकई शाकाहारी है?
क्या सच में चांदी का वर्क शाकाहारी नहीं बल्कि नॉन-वेजीटेरियन होता है. (AI image)
त्याहारों का सीजन शुरू हो चुका है, नवरात्रि चल रही है, उसके बाद दशहरा, फिर दिवाली और भाई दूज. छुट्टियों और मीठी ठंड वाले इस फेस्टिवल सीजन में मिठाइयों की तरफ हाथ अपने-आप चला ही जाता है. हलवाइयों की दुकानों पर भीड़ लगी हुई है. हर कोई अच्छी से अच्छी मिठाई अपने परिवार और रिश्तेदारों-दोस्तों के लिए लेना चाहता है. अक्सर दुकानों में मिठाइयों की चमक और रौनक बढ़ाने के लिए चांदी के वर्क का इस्तेमाल किया जाता है. काजू कतली से लेकर मोतीचूर के लड्डुओं तक, आपने ये वर्क जरूर देखा होगा. ये आज से नहीं, बल्कि सालों से इस्तेमाल होता रहा है. लेकिन इंस्टाग्राम और फेसबुक के जमाने में इस चांदी के वर्क को लेकर कई बार ये सवाल उठता है कि क्या यह वर्क वाकई शाकाहारी है? इसी चिंता में तो कई लोग ऐसी मिठाइयों से दूरी ही बना लेते हैं, जिनके ऊपर चांदी का वर्क लगा होता है. पर क्या इस दावे में कोई सच्चाई है? क्या सच में चांदी का वर्क शाकाहारी नहीं बल्कि नॉन-वेजीटेरियन होता है.
क्या है ये सिल्वर वर्क?
सिल्वर वर्क (या चांदी का वर्क) एक बहुत पतला चांदी का पन्ना होता है, जो सिर्फ 0.2 से 0.8 माइक्रोमीटर मोटा होता है. ये इतना पतला होता है कि इसे आसानी से खाया जा सकता है पर इसका कोई स्वाद नहीं होता. यह मिठाई को रॉयल और चमकदार लुक देता है और इसीलिए इसका चलन काफी है. सिर्फ लुक ही नहीं, चांदी का ये वर्क मिठाई को सेहत के लिए और भी फायदेमंद बना देता है. आयुर्वेद के अनुसार चांदी को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है.
सिल्वर वर्क (या चांदी का वर्क) एक बहुत पतला चांदी का पन्ना होता है. (सांकेतिक तस्वीर)
क्यों उठे चांदी के वर्क पर सवाल?
सालों पहले चांदी का वर्क बनाने का तरीका ऐसा था कि चांदी की पतली शीट को जानवरों की आंतों (इंटेस्टाइन) या चमड़े के बीच रखकर हथौड़े से पीटा जाता था. यह जानवर बैल, भैंस, भेड़ या बकरी के होते थे. इसकी वजह थी कि जानवर की कोमल त्वचा चांदी को चिपकने से रोकती थी और पीटने पर आसानी से अलग हो जाती थी. लेकिन पीटने के दौरान आंत का कुछ हिस्सा चांदी में मिल जाता था. इसलिए वर्क को नॉन-वेजिटेरियन माना जाता था. यह शाकाहारियों के लिए बड़ा विषय था. क्योंकि चांदी का वर्क लगी मिठाइयां मंदिरों में प्रसाद में भी चढ़ती थीं, इसलिए ये विवाद और भी बढ़ा हो गया था.
FSSAI ने उठाया कदम
2016 में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने ये फैसला लेते हुए वर्क बनाने में जानवरों की आंत या चमड़े का इस्तेमाल पूरी तरह बैन कर दिया. क्योंकि न केवल ये तरीका गलत था बल्कि सेहत के लिए भी बहुत हानिकारक था. इस तरह वर्क बनाने में बैक्टीरिया फैलने का खतरा था बहुत ज्यादा था. साथ ही शाकाहारियों की भावनाओं के सम्मान को भी इसमें ठेस पहुंच रही थी. दिल्ली सरकार ने इसे लागू किया, लेकिन 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ मैन्युफैक्चरर्स की अपील पर बैन हटा दिया. लेकिन कोर्ट ने कहा कि तरीका साफ-सुथरा होना चाहिए. आज के समय में ज्यादातर वर्क मशीन से ही बनाया जाता है.
2016 में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने बैन किया जानवरों का चमड़ा इस्तेमाल करने का तरीका. (AI Generated Image)
अभी के समय की बात करें तो बाजार में उपलब्ध ज्यादातर सिल्वर वर्क मशीन-मेड होता है. इसमें सिर्फ शुद्ध चांदी होती है, जो पेपर या मशीन के बीच पीटी जाती है. कई पॉपुलर स्वीट चेन तो अब अपनी मिठाइयों के वर्क पर “वेजिटेरियन सर्टिफाइड” का लेबल लगाते हैं. यूं तो वर्क अब सुरक्षित है, लेकिन जब भी आप मिठाई खरीदें तो हमेशा इसकी जानकारी लें. अगर आप पैकेज्ड मिठाई खरीदें तो बॉक्स पर देखें, “वेजिटेरियन वर्क” लिखा हो. अगर हलवाई से ले रहे हैं तो दुकानादार से इसके बारे में पूछें. अगर आपको फिर भी इसकी शुद्धता पर शक है तो बिना वर्क वाली मिठाई खरीदें.