टाटा संस बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को पांच साल के लिए एक्सटेंशन दे दिया है. बोर्ड के सदस्यों ने उन्हें चेयरमैन बनाए रखने के पक्ष में 4-1 से वोट किया. हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस फैसले का विरोध किया. उन्होंने वोट को गैरकानूनी बताते हुए कहा कि मैंने चंद्रशेखरन की नियुक्ति के खिलाफ वोट दिया था, लेकिन कानूनी राय के आधार पर उनके विरोध को दरकिनार कर दिया गया.
नोएल टाटा ने मनीकंट्रोल से कहा, मैंने अपना विरोध दर्ज कराया है. बोर्ड में बहुमत के आधार पर फैसला लिया गया, लेकिन यह फैसला सही प्रक्रिया के तहत नहीं हुआ. विवाद के बाद अब मामला टाटा संस की अगली एजीएम तक पहुंच सकता है. टाटा ट्रस्ट्स की तरफ से चंद्रशेखरन को हटाने की कोशिश किए जाने की बात भी सामने आई है.
आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में छिपी विवाद की वजह
मामले की जड़ टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन से जुड़ी है. इसमें कहा गया है कि टाटा ट्रस्ट्स की ओर से बोर्ड में नियुक्त किए गए निदेशकों के बहुमत को कुछ अहम फैसलों को मंजूरी देनी होती है. वहीं, बोर्ड की बैठक में बराबर वोट होने की स्थिति में चेयरमैन के पास निर्णायक वोट होने की कानूनी राय के आधार पर फैसला आगे बढ़ाया गया.
टाटा संस के बोर्ड में एन. चंद्रशेखरन, नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन, सौरभ अग्रवाल, हरीश मनवानी और अनिता मारंगोली जॉर्ज शामिल हैं. 17 सितंबर का फैसला अगस्त के घटनाक्रम से बिल्कुल अलग है. अगस्त में चंद्रशेखरन ने कहा था कि वह फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद तीसरे कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्ति नहीं चाहेंगे. इसके बाद उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हुई थी.
टाटा के एजीएम पर नजर
अब अगली नजर टाटा संस की एजीएम पर है. कंपनी की स्थगित एजीएम 31 दिसंबर तक होनी जरूरी है. इस बैठक में चंद्रशेखरन का बतौर निदेशक रोटेशन से रिटायर होना भी अहम मुद्दा होगा. दोबारा निदेशक बनने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी. टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है, इसलिए एजीएम में उसकी भूमिका अहम हो सकती है.
इस मामले में एक और पेंच है. सर रतन टाटा ट्रस्ट को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की कार्यवाही के चलते ट्रस्टी बैठक बुलाने पर रोक का सामना करना पड़ रहा है. इसी वजह से टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली एजीएम पहले ही स्थगित करनी पड़ी थी. दोनों प्रमुख ट्रस्ट संयुक्त रूप से जरूरी प्रतिनिधि तय नहीं कर पाए थे. इससे आगे की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है.
लिस्टिंग का इश्यू सामने
चंद्रशेखरन का दोबारा चेयरमैन बनना ऐसे समय हुआ है, जब टाटा संस के सामने लिस्टिंग का भी बड़ा मुद्दा है. रिजर्व बैंक ने टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी का रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी है. इसके बाद कंपनी के शेयर बाजार में लिस्ट होने की जरूरत फिर चर्चा में आ गई है. टाटा संस ने कर्जमुक्त होने के बाद यह रास्ता अपनाने की कोशिश की थी.
टाटा संस में चंद्रशेखरन 2017 से चेयरमैन हैं. उनके कार्यकाल में एयर इंडिया का अधिग्रहण और सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एविएशन और दूसरे नए कारोबारों में विस्तार जैसे बड़े फैसले हुए. अब बोर्ड के फैसले के बाद उनका कार्यकाल आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है, लेकिन नोएल टाटा के विरोध ने मामला पूरी तरह खत्म नहीं किया है. अगली बड़ी नजर एजीएम और शेयरधारकों के फैसले पर रहेगी.