मखाना किसानों की समस्या का समाधान, WhatsApp से मिलेगा बेहतर दाम, ये उपाय भी अपनाएं

मखाना किसानों की समस्या का समाधान, WhatsApp से मिलेगा बेहतर दाम, ये उपाय भी अपनाएं


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मखाना किसानों की समस्या का समाधान, इस WhatsApp ग्रुप से मिलेगा बेहतर दाम

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WhatsApp Group For Makhana Farmers: मिथिलांचल में मखाने की खेती तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इस साल इसके भाव में भारी गिरावट आई है. राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक ने किसानों को कच्ची गुड़िया बेचने की बजाय प्रोसेसिंग करके लावा बेचने की सलाह दी है. साथ ही एक व्हॉट्सएप ग्रुप के बारे में भी जानकारी दी जिससे मखाना बेचा जा सकता है.

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दरभंगा. सुपर फूड मखाना आज पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुका है. मिथिलांचल क्षेत्र में तो इसकी खेती सदियों से होती आ रही है, लेकिन इसे असली पहचान तब मिली, जब इसे GI टैग मिला. GI टैग मिलने के बाद मार्केट में इसकी डिमांड और भी ज्यादा बढ़ गई है. पहले किसान मखाने की खेती तो करते थे, लेकिन उन्हें अपनी मेहनत का सही मुआवजा नहीं मिल पाता था. लेकिन आज जिस प्रकार से पूरी दुनिया में इसकी डिमांड बढ़ी है, किसानों को अच्छी आमदनी भी हो रही है.

इसी को देखते हुए कई नए और युवा किसान भी मखाने की खेती की तरफ रुख कर रहे हैं. हालांकि, नए किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह खड़ी हो रही है कि जो मखाने तैयार हो रहे हैं, उनकी गुड़िया कहां सप्लाई की जाए, कहां इसकी मार्केटिंग हो और कैसे सेल करने से बेहतर मुनाफा होगा.

इस साल रेट में आयी है गिरावट
इस संदर्भ में हमने बात की राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार से. डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि यह समस्या आज बहुत सारे किसानों के साथ हो रही है. हालांकि, इस समय बाजार में बहुत अच्छी कीमत उपलब्ध नहीं है. रेट में काफी गिरावट आई है. इस वर्ष 17,000 से 20,000 रुपये प्रति क्विंटल का रेट मिल रहा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है. फिर भी किसान परेशान हैं कि वे इसे बेचेंगे कहां.

उन्होंने किसानों को सुझाव देते हुए कहा कि अगर किसान मखाने की खेती में आर्थिक लाभ की पूरी संभावना उठाना चाहते हैं, तो उन्हें गुड़िया नहीं बेचकर उसका प्रसंस्करण करना चाहिए और उसका लावा तैयार करना चाहिए. ऐसा करने से उनकी आमदनी कई गुना बढ़ जाएगी.

गुड़िया बेचने के उपाय
गुड़िया बेचने के लिए किसानों के पास दो-तीन प्रमुख उपाय हैं. पहला, राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र की तरफ से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है. हालांकि, वह आधिकारिक नहीं है, लेकिन इसमें 700 के आसपास मेंबर हैं, जिनमें किसान और उद्यमी दोनों जुड़े हैं. इस ग्रुप का नाम स्टेकहोल्डर ग्रुप है. इस माध्यम से किसान अपनी गुड़िया सप्लाई कर सकते हैं.

लावा निकालकर बेचें
इस ग्रुप का सदस्य बनना चाहते हैं तो अनुसंधान केंद्र में आकर संबंधित व्यक्ति से कहकर ग्रुप में शामिल हो सकते हैं. यहां आप अपने प्रोडक्ट की तस्वीर भी डालकर ग्राहकों को दिखा सकते हैं. इस ग्रुप में बड़ी संख्या में खरीदार हैं इसलिए बिक्री की संभावना अधिक हो जाती है. दूसरा और सबसे बेहतर उपाय है कि वे कच्ची गुड़िया बेचने के बजाय खुद प्रोसेसिंग करें और लावा तैयार कर बाजार में बेचें, जिससे उन्हें अधिक मुनाफा होगा. इससे वे कम से कम 25 प्रतिशत अधिक मुनाफा कमा सकते हैं.



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