उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नई चर्चा जोरों पर है. कहा जा रहा है कि उपमुख्मंत्री केशव प्रसाद मौर्य आगामी यूपी चुनाव 2027 में अपनी पुरानी सीट सिराथू को छोड़कर प्रयागराज की शहर उत्तरी विधानसभा सीट से भाग्य आजमा सकते हैं. हालांकि, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस संभावना को लेकर हलचल तेज हो गई है.
क्यों हो रही है शहर उत्तरी सीट की चर्चा?
यह चर्चा इसलिए उड़ी है क्योंकि सिराथू सीट पर पिछले चुनाव में समीकरण बीजेपी के पक्ष में पूरी तरह फिट नहीं बैठे थे. ऐसे में पूरे उत्तर प्रदेश में पार्टी प्रचार की बड़ी जिम्मेदारी संभालने वाले केशव प्रसाद मौर्य के लिए किसी सुरक्षित सीट की तलाश की चर्चा आम है. शहर उत्तरी सीट को बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है, जहां पार्टी का जनाधार लंबे समय से मजबूत रहा है.
पिछले कुछ महीनों से केशव प्रसाद मौर्य के शहर उत्तरी क्षेत्र में लगातार दौरे कर रहे हैं. वह कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से मेल-मिलाप और सुख-दुख में भागीदारी निभा रहे हैं. इस वजह से इस चर्चा को पंख लगे हैं. स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि उनका यह बढ़ता संपर्क संकेत हो सकता है कि वह इस सीट से अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं.
खुद क्या कहते हैं केशव प्रसाद मौर्य?
जब इस बारे में केशव प्रसाद मौर्य से सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ तौर से किसी सीट का नाम नहीं लिया. उन्होंने कहा कि वह खुद को उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों का प्रत्याशी मानते हैं. चुनाव लड़ने और टिकट तय करने का काम पार्टी का केंद्रीय संसदीय बोर्ड और संगठन की तय प्रक्रिया के तहत होता है, न कि व्यक्तिगत इच्छा से.
किससे हो सकता है मुकाबला?
अगर केशव प्रसाद मौर्य प्रयागराज शहर उत्तरी सीट से चुनाव लड़ते हैं, तो इस सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो जाएगा. इस सीट पर वर्तमान में बीजेपी से हर्षवर्धन वाजपेयी विधायक हैं, जिनका स्थानीय स्तर पर मजबूत प्रभाव है. विपक्षी खेमे से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के युवा नेता संदीप यादव भी इस सीट पर मजबूत दावेदारी ठोक रहे हैं. इसके अलावा गठबंधन से जुड़े अन्य चेहरों के नाम भी चर्चा में हैं.
फिलहाल यह पूरा मामला सियासी हवाओं और चर्चाओं तक ही सीमित है. अंतिम निर्णय बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व और खुद केशव प्रसाद मौर्य ही लेंगे, लेकिन इस एक चर्चा ने प्रयागराज की सियासत का पारा अभी से बढ़ा दिया है.
प्रयागराज उत्तरी विधानसभा सीट का जातीय समीकरण क्या है?
केशव प्रसाद मौर्य भले ही ओबीसी जाति से हैं, लेकिन प्रयागराज उत्तरी विधानसभा सीट पर ब्राह्मण और कायस्थ सबसे बड़े वोटबैंक हैं. बीजेपी को शुरुआती दिनों से ही ब्राह्मण और बनिया की पार्टी कहा जाता रहा है. यही वजह है कि इस सीट पर बीजेपी आसानी से जीतती रही है.
जातीय आंकड़ों पर एक नजर डालें तो यहां ब्राह्मण 60,000, कायस्थ करीब 50,000, वैश्य करीब 30,000 जाति के वोटर हैं. केशव मौर्य की जाति के भी 25000 वोटर हैं. 60,000 वोटबैंक वाली अनुसूचित जाति भी इस सीट पर हमेशा से निर्णायक रही है. अन्य ओबीसी जातियों में यादव करीब 25,000 और पटेल करीब 20,000 हैं. इस सीट पर मुस्लिम भी करीब 20 हजार वोटर हैं.