Saharanpur News: सहारनपुर के पेपर मिल रोड पर बने घरों में रहने वाले परिवार इन दिनों एक गंभीर समस्या में फंस गए हैं. उनके घरों से बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. जी हां, ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि उनके घरों से बाहर निकलने के दो रास्ते थे. पहला रास्ता जिसको वे कम इस्तेमाल करते थे और वहां के लोगों ने जब जमीन बेची तो उस रास्ते को जमीन खरीदने वाले लोगों ने दीवार के माध्यम से बंद कर दिया था. लेकिन इन लोगों को इतनी दिक्कत उस रास्ते के बंद होने से नहीं हुई क्योंकि ये लोग ज्यादातर रेलवे के रास्ते से ही आना-जाना किया करते थे.
बच्चों की जान जोखिम में, दीवार में सरिया ठोक बनाई सीढ़ी
अब रेलवे ने अपने रास्ते पर दीवार खड़ी कर दी है, तो ये लोग अपने घरों में ही कैद होकर रह गए हैं. यह मामला वार्ड 39 के पेपर मिल के ठीक सामने बनी कॉलोनी का है, जहां पर कई परिवार पिछले 15 से 20 साल से रहते चले आ रहे हैं. उन परिवारों में दर्जनों से अधिक छोटे-छोटे बच्चे हैं जो रोजाना जान को जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे हैं. दोनों तरफ से इन घरों का रास्ता बंद होने से इन लोगों ने घरों से बाहर आने के लिए दीवारों के अंदर सरिया लगाकर सीढ़ी बनाई है, जिससे कि ये लोग घरों से बाहर निकलकर अपने कामकाज और छोटे बच्चे स्कूल जा सकें. जबकि घर में रहने वाली महिलाओं का कहना है कि दोनों तरफ के रास्ते बंद होने से अब वे घुटन महसूस कर रही हैं. अधिकारियों को पूरी घटना से अवगत कराया गया है; फिलहाल आश्वासन मिला है कि जल्द ही इनको पुराना बंद हुआ रास्ता मिल जाएगा. लेकिन फिलहाल ये लोग पिछले कई दिनों से घुट-घुट कर जीने को मजबूर हैं और छोटे बच्चे जान को जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक से होते हुए स्कूल जा रहे हैं.
स्थानीय निवासी कोमल की आपबीती… अंदर घुट रहा है दम
पेपर मिल रोड की रहने वाली कोमल ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि हम लोग यहां पर 2014 से रह रहे हैं. हम लोग फिलहाल रेलवे लाइन की ओर से बने इस रास्ते से आना-जाना कर रहे थे, जबकि दूसरी तरफ भी रास्ता था लेकिन उसको भी दीवार बनाकर बंद कर दिया गया और अब रेलवे ने भी इस रास्ते पर दीवार कर दी है. हमारे छोटे-छोटे बच्चे हैं और इस दीवार से रोजाना उतरते-चढ़ते हैं, कई बार बच्चे गिर भी चुके हैं. जितने भी यहां से आने-जाने वाले हैं सभी को अपने घरों से बाहर आने-जाने में दिक्कत हो रही है. बस हमारी यही मांग है कि हमारा जो दूसरा रास्ता है, जिसको दीवार बनाकर बंद कर दिया है उसको खुलवा दीजिए, हमारा अंदर दम घुट रहा है.
25 साल से आबाद कॉलोनी, बुजुर्ग महिला कृष्णावती का छलका दर्द
कृष्णावती बताती हैं कि हम लोग यहां पिछले 25 साल से रह रहे हैं. हमारे इस रास्ते पर रेलवे ने अपनी दीवार कर दी है. अब हमारे पास दो रास्ते थे, लेकिन अब एक भी रास्ता हमारे पास आने-जाने का नहीं बचा है. हम यहां पर लगभग 22 से 30 परिवार रहते हैं. घर से बाहर आने-जाने में और बच्चों को स्कूल जाने में बहुत दिक्कत हो रही है. दीवार में सरिया लगाकर चढ़ने और उतरने का रास्ता बनाया है. अधिकारियों से शिकायत की है, अब देखते हैं कब तक हमें रास्ता मिल पाता है.
सुनील कुमार ने बताई दोहरी दीवार की पूरी दास्तान
सुनील कुमार बताते हैं कि वह 2014 से यहां पर रह रहे हैं. यह रास्ता पहले खुला हुआ था, लेकिन यह रेलवे का है इसलिए अब रेलवे वालों ने यहां पर दीवार कर दी है. लेकिन इस दीवार के होने से हमें कोई दिक्कत नहीं है, बल्कि हमारा जो पुराना रास्ता था उसको भी दीवार करके बंद किया हुआ है, बस हमारा वह पुराना रास्ता खोल दिया जाए.
पुराना रास्ता जो पहले हमारे बुजुर्ग थे उनके द्वारा जमीन बेचकर यहां से चले जाने के बाद, जिन लोगों ने जमीन को खरीदा उन लोगों ने वहां पर अपनी दीवार कर दी. उस दीवार के होने से पहले इतनी दिक्कत नहीं हुई क्योंकि पहले इधर का रास्ता खुला हुआ था, लेकिन अब रेलवे ने भी अपने इस रास्ते पर दीवार कर दी तो हम लोगों के दोनों रास्ते बंद हो गए और अब हम लोग घरों में ही कैद होकर रह गए हैं. छोटे बच्चे इधर से ही रोजाना जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं.
डीएम से मिलकर लगाई गुहार, मिला सिर्फ और सिर्फ आश्वासन
पार्षद राजकुमार ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि पेपर मिल के एक साइड पर बने घरों का रास्ता जो पहले रेलवे लाइन से निकल रहा था, वहां पर रेलवे ने अपनी दीवार बनाकर उन रास्तों को बंद कर दिया. जबकि उनका जो दूसरा रास्ता था, वहां पर कुछ लोगों ने जमीन को बेचा और जिन लोगों ने जमीन को खरीदा, तो उन लोगों ने वहां पर दीवार करके उन रास्तों को भी बंद कर दिया था. अब यह समस्या का विषय बन गया है कि कई परिवार अब घरों में ही कैद हैं.
बीती 6 तारीख को सभी परिवार के लोग इकट्ठा होकर जिलाधिकारी के पास गए थे. इसके बाद 9 तारीख को मैं भी डीएम साहब के पास गया, और आश्वासन मिला है कि उनको जल्द ही रास्ता दिलवा दिया जाएगा. घरों में कैद रहने के चलते छोटे-छोटे बच्चे भी स्कूल जाने के लिए परेशान होते हैं, छोटी-छोटी सीढ़ी लगाकर छत पर चढ़ते हैं और दीवारों में सरिया लगाकर घर से बाहर निकलने का एक रास्ता बनाया हुआ है.