DTC Strike: वेतन और मेडिकल के लिए सड़कों पर उतरे डीटीसी ड्राइवर, दिल्ली की लाइफलाइन पर लगा ताला कब खुलेगा?

DTC Strike: वेतन और मेडिकल के लिए सड़कों पर उतरे डीटीसी ड्राइवर, दिल्ली की लाइफलाइन पर लगा ताला कब खुलेगा?


नई दिल्ली: राजधानी की सड़कों पर गुरुवार की सुबह आम दिनों जैसी बिल्कुल नहीं थी. दिल्ली परिवहन निगम यानी डीटीसी के ड्राइवरों की हड़ताल तीसरे दिन भी लगातार जारी रही. इस हड़ताल की वजह से लाखों लोगों का डेली रूटीन पूरी तरह बिगड़ चुका है. बस स्टॉप्स पर लोगों की भारी भीड़ जमा है. बसों की संख्या बेहद कम होने से यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. रानी खेड़ा, राजघाट, नेहरू प्लेस और बुराड़ी जैसे बड़े डिपो से बसें बाहर नहीं निकल पाई हैं. वजीरपुर, घुमनहेड़ा और सरिता विहार डिपो में भी पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है. हालात इतने बिगड़ गए कि दिल्ली हवाईअड्डे को यात्रियों के लिए ट्रेवल एडवाइजरी जारी करनी पड़ी. रोजाना करीब 60 लाख मुसाफिर इन बसों से सफर करते हैं. अब ड्राइवरों के चक्का जाम से पूरी दिल्ली की लाइफलाइन ठहर गई है.

862 रुपये की दिहाड़ी, क्यों फूटा ड्राइवरों का गुस्सा?

डीटीसी ड्राइवरों और कंडक्टरों का कहना है कि वे भारी आर्थिक तंगी के बीच ड्यूटी कर रहे हैं. इस महंगाई के दौर में उन्हें सिर्फ 862 रुपये रोज का वेतन मिलता है. यह न्यूनतम वेतन आमतौर पर किसी फैक्ट्री वर्कर या दिहाड़ी मजदूर के बराबर है. ड्राइवरों का तर्क है कि वे पूरे शहर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाते हैं. ऐसे में उनके काम के हिसाब से सम्मानजनक मानदेय मिलना चाहिए.

वेतन वृद्धि के अलावा ड्राइवर कैशलेस मेडिकल सुविधा और तय ओवरटाइम भुगतान की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी ड्राइवर सोनू बेनीवाल ने कहा, ‘सरकार को ऐसा समाधान निकालना चाहिए ताकि हमें निजी ठेकेदारों से जुड़ी समस्याओं का सामना न करना पड़े. बातचीत जारी रहने तक हमारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा.’ ड्राइवरों ने साफ कर दिया है कि बिना ठोस लिखित आश्वासन वे पीछे नहीं हटेंगे.

हवाईअड्डे से लेकर बस स्टैंड तक मुसाफिर क्यों काट रहे हैं चक्कर?

सड़कों पर बसों की भारी कमी ने दिल्ली के आवागमन पर गहरा असर डाला है. लोग सुबह ऑफिस जाने के लिए निकले तो उन्हें स्टॉप पर खाली हाथ घंटों खड़ा रहना पड़ा. कई इलाकों में कैब और ऑटो चालकों ने भी इस मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाना किराया वसूला. सोशल मीडिया पर मुसाफिर लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं.

समस्या की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हवाईअड्डे ने एक्स पर पोस्ट डालकर लोगों को अलर्ट किया. हवाईअड्डा प्रशासन ने कहा, ‘डीटीसी बस हड़ताल के कारण एयरपोर्ट तक आने-जाने वाली बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं. पैसेंजर्स अपनी यात्रा की प्लानिंग पहले से करके चलें.’ टर्मिनल्स के बीच आवागमन के लिए वैकल्पिक शटल व्यवस्था की गई है. सड़कों पर आम मुसाफिरों के लिए मंजिल तक पहुंचना एक बड़ा इम्तिहान बन गया है.

क्या प्राइवेट कंपनियों के रवैये से बिगड़ी है पूरी बात?

दिल्ली में इस समय करीब 6500 डीटीसी बसें सड़कों पर चलती हैं. इनमें से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्राइवेट एजेंसियों के हाथ में है. प्रदर्शन कर रहे ड्राइवरों का सबसे बड़ा गुस्सा इन्हीं ठेकेदारों की मनमानी को लेकर है. जमीनी तनाव बढ़ता देख दिल्ली सरकार भी अब एक्शन में नजर आ रही है.

परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने इलेक्ट्रिक बसों का संचालन करने वाली प्राइवेट कंपनियों को कड़े निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि ड्राइवरों की सभी समस्याओं का तुरंत बातचीत से समाधान निकाला जाए. इसके साथ ही परिवहन मंत्री ने ड्राइवरों से जनहित में हड़ताल खत्म करने की अपील की है. जब तक दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती, तब तक दिल्ली की सड़कों पर राहत मिलना मुश्किल दिख रहा है.



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