Delhi Protest Pakistan : राहुल गांधी के वीडियो से मार्शल लॉ तक, पाकिस्तानी हैंडलर्स ने दिल्ली प्रदर्शन को कैसे बनाया हथियार

Delhi Protest Pakistan : राहुल गांधी के वीडियो से मार्शल लॉ तक, पाकिस्तानी हैंडलर्स ने दिल्ली प्रदर्शन को कैसे बनाया हथियार


दिल्ली में बीते 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के बीच एक ऐसी साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों और साइबर क्राइम विंग के कान खड़े कर दिए हैं. भारतीय खुफिया एजेंसियों ने एक बेहद खतरनाक क्रॉस बॉर्डर डिजिटल ऑपरेशन की पुष्टि की है. ये पूरी साजिश पाकिस्तान से ऑपरेट हो रही थी. CNN-News18 को मिले एक्सक्लूसिव इनपुट्स के आधार पर खुलासा हुआ है कि पाकिस्तानी नेटवर्क ने ‘भारत बाइट्स’ नाम से एक नकली मीडिया संस्थान बनाया था. इसके साथ ही हजारों फर्जी और ऑटोमेटेड बोट्स का एक विशालका ताना-बाना बुना गया, ताकि दिल्ली के प्रदर्शनों की आड़ में देश में ध्रुवीकरण बढ़ाया जा सके और आम जनता की राय को भड़काया जा सके.

पाकिस्तानी हैंडलर और दिल्ली प्रदर्शन

इस बहुस्तरीय सूचना युद्ध का सीधा मकसद दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों को एक हिंसक रूप में दिखाना था. पाकिस्तानी हैंडलर्स ये झूठा नैरेटिव फैलाना चाहते थे कि भारत सरकार अपनी ही जनता पर बिना वजह बर्बरता कर रही है, सैकड़ों लोग मारे जा रहे हैं और नई दिल्ली में सड़कों पर सेना उतार दी गई है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और उसके डिजिटल गुर्गों ने इस नापाक साजिश को अंजाम देने के लिए दुनिया भर के हथकंडे अपनाए और भारतीय एजेंसियों ने इन्हें एक-एक करके बेनकाब किया है.

कैसे काम कर रहा था पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा नेटवर्क?

सुरक्षा एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि विदेशी हैंडलर्स ने प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हजारों की संख्या में फर्जी प्रॉक्सी अकाउंट्स बनाए थे. अपनी पाकिस्तानी पहचान छुपाने के लिए इन हैंडलर्स ने बहुत ही चालाकी भरा तरीका अपनाया.

  • चुराए गए प्रोफाइल फोटो और भारतीय नाम: इन अकाउंट्स में भारत के अलग-अलग राज्यों के आम लोगों के फोटो चुराकर लगाए गए थे. नाम पूरी तरह से भारतीय रखे गए थे ताकि किसी को शक न हो.
  • स्थानीय बायो और पहचान: अकाउंट के बायो में खुद को स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ता, छात्र संघ का प्रतिनिधि या किसी एक्टिविस्ट ग्रुप का सदस्य बताया गया था.
  • हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं पर पकड़: ये हैंडलर्स फर्राटेदार हिंदी, अंग्रेजी और भारत की क्षेत्रीय भाषाओं में पोस्ट लिखते थे. इससे स्थानीय डिजिटल कम्युनिटी में लोग आसानी से इनके झांसे में आ जाते थे.

अपनी विदेशी पहचान छुपाकर, ये नेटवर्क पूरी तरह से फर्जी और मनगढ़ंत खबरों को दिल्ली के प्रदर्शन स्थलों से ‘लाइव और सटीक अपडेट’ बताकर शेयर कर रहा था.

फर्जी खबरों को वायरल करने का ‘3-स्टेप’ फॉर्मूला

इस नेटवर्क का काम करने का तरीका सोच-समझकर तैयार किया गया था. किसी भी फर्जी खबर को देश भर में ट्रेंड कराने के लिए 3 स्टेप्स में काम किया जाता था.

  1. मेन प्रॉक्सी अकाउंट का पोस्ट: सबसे पहले एक फर्जी मुख्य अकाउंट किसी संवोदनशील मुद्दे पर झूठा दावा या एडिट किया गया वीडियो पोस्ट करता था.
  2. बॉट्स की सेकेंड्स में एंट्री: पोस्ट होते ही कुछ ही सेकंड्स के भीतर उससे जुड़े सैकड़ों सेकेंडरी बॉट अकाउंट्स उस पोस्ट को री-पोस्ट, लाइक और कमेंट करना शुरू कर देते थे. इससे सोशल मीडिया का एल्गोरिदम धोखा खा जाता था.
  3. प्राइवोट ग्रुप्स में सर्कुलेशन: इसके बाद उसी कंटेंट को टेलीग्राम और व्हाट्सएप के प्राइवोट ग्रुप्स में तेजी से फैलाया जाता था ताकि वह मुख्यधारा के ट्रेंडिंग टॉपिक में आ जाए.

गैर-भाजपा शासित राज्यों पर खास निशाना

खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे फर्जी नैरेटिव को जानबूझकर गैर-भाजपा शासित राज्यों जैसे दक्षिण भारत के राज्यों, पंजाब और जम्मू-कश्मीर की तरफ पुश किया जा रहा था, ताकि देश के अलग-अलग हिस्सों में क्षेत्रीय असंतोष और गुस्सा भड़काया जा सके.

डिजिटल फोरेंसिक में पकड़ी गई पाकिस्तान की ‘फर्जी खबरें’

दिल्ली प्रदर्शन के दौरान आईएसआई (ISI) से जुड़े इस नेटवर्क ने कई ऐसे फेक कंटेंट वायरल किए, जिन्हें भारतीय साइबर फोरेंसिक यूनिट्स ने तुरंत पकड़ लिया.

  1. दिल्ली पुलिस की गोलीबारी का दावा: 10 अक्टूबर को दावा किया गया कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई और 33 लोग घायल हुए. जांच में पता चला कि ये वीडियो फरवरी 2024 का पुराना वीडियो था, जब पंजाब-हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर किसानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे.
  2. राहुल गांधी के घायल होने की खबर: @indiantiwari01 नाम के हैंडल से पोस्ट किया गया कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ मार्च कर रहे विपक्ष पर पुलिस ने गोलियां चलाईं, जिसमें कांग्रेस सांसद राहुल गांधी घायल हो गए. साइबर फोरेंसिक ने जब इस अकाउंट की आईपी एड्रेस और रजिस्ट्रेशन ट्रैक किया, तो इसका मुख्य सर्वर लाहौर, पाकिस्तान में पाया गया.
  3. दिल्ली में सेना और मार्शल लॉ का दावा: दावा किया गया कि आम नागरिकों को दबाने के लिए भारतीय सेना ने दिल्ली में प्रवोश कर लिया है और मार्शल लॉ जैसी स्थिति बन गई है. फर्जी और एडिटेड ऑडियो-वीडियो क्लिप्स के जरिए जनता में डर पैदा करने की कोशिश की गई थी, जिसे पुलिस ने तुरंत खारिज कर दिया.

सुरक्षा एजेंसियों का सख्त एक्शन और एडवाइजरी

जैसे ही खुफिया एजेंसियों ने इस पूरे विदेशी नेटवर्क की पुष्टि की, भारतीय साइबर क्राइम डिवीजन और विशेष प्रवर्तन इकाइयों ने तुरंत एक्शन लिया. प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर इन फर्जी प्रॉक्सी अकाउंट्स और ‘भारत बाइट्स’ जैसे पेजों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

अधिकारियों ने साइबर सुरक्षा, आपराधिक साजिश और जन-शांति भंग करने की धाराओं के तहत कई एफआईआर दर्ज की हैं. सुरक्षा एजेंसियां अब भी ऑनलाइन डिजिटल ट्रैफिक पर चौबीसों घंटे नजर रख रही हैं.

जनता के लिए अपील- सुरक्षा एजेंसियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वो सोशल मीडिया पर आने वाली किसी भी सनसनीखेज या ब्रेकिंग न्यूज पर आंख मूंदकर भरोसा न करें. किसी भी बिना फैक्ट चेक वाले वीडियो या मैसेज को व्हाट्सएप या अन्य प्लेटफॉर्म्स पर फॉरवर्ड करने से पहले आधिकारिक सूत्रों और ट्रस्टेड न्यूज चैनलों से उसकी पुष्टि जरूर कर लें. सीमा पार से जारी इस ‘डिजिटल वॉर’ का मुकाबला केवल सतर्कता और समझदारी से ही किया जा सकता है.



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