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उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में अभी वक्त भले ही काफी बाकी है. लेकिन राजनीतिक दल अपने सियासी समीकरण साधने के साथ-साथ पार्टी की अंदरूनी कलह और नाराजगी को खत्म करने के लिए फ्रंटफुट पर आ गए हैं. यही वजह है कि भाजपा की तरफ से सीएम योगी मैदान में उतरे हैं और सूबे के बड़े राजनीतिक परिवारों को मनाने में लग गए हैं, जिसमें कौशल किशोर, रीता बहुगुणा जोशी और गंगाचरण राजपूत का परिवार शामिल है.
मुख्यमंथी योगी आदित्यनाथ ने गंगाचरण राजपूत, रीता बहुगुणा जोशी और कौशल किशोर के परिवार से मुलाकात की.
लखनऊः उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी हर तरह के खतरे को टालने की कोशिश में लग गई है. चाहे वह फिर अपनों के बीच नाराजगी का ही मामला क्यों न हो. क्योंकि हाल ही में राज्यसभा का टिकट न मिलने पर अपनी बेटी के साथ धर्मेंद्र कश्यप समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए. रुहेलखंड क्षेत्र में धर्मेंद्र कश्यप की अच्छी पकड़ मानी जाती है. राजनीतिक विशलेषक इसे बड़ा नुकसान मान रहे हैं. क्योंकि इस क्षेत्र में धर्मेंद्र कश्यप जिस जाति से आते हैं, उसके मतदाताओं की संख्या अधिक है. ऐसे में बीजेपी अब अपने किसी भी नेता को नाराज नहीं होने देना चाहती है. यही वजह है कि नेताओं की नाराजगी को दूर करने की जिम्मेदारी खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ले ली है.
कहा जा रहा है कि धर्मेंद्र कश्यप अपनी बेटी के टिकट के लिए सपा के पाले में चले गए हैं. इसके बाद भाजपा के भीतर हलचल मच गई है कि कहीं दूसरे नेता भी इसी रास्ते पर न चल पड़ें. क्योंकि ज्यादातर नाराज दिग्गज नेता अपने बच्चों को टिकट दिलवाना चाहते हैं. बीजेपी के इन नेताओं को सपा अपने पाले में खींचने की कवायद कर रही है, जिसे देखते हुए बीजेपी की सियासी टेंशन बढ़ी तो खुद सीएम योगी फ्रंटफुट पर उतर गए. पिछले तीन दिनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तीन बेहद अहम मुलाकातें हुई हैं, जिसके सियासी मायने साफ हैं. राजनीतिक गलियारे में इसे डैमेज कंट्रोल के तौर पर देखा जा रहा है. सीएम योगी ने कौशल किशोर, रीता बहुगुणा जोशी और गंगाचरण राजपूत से मुलाकात की.
सीएम योगी ने सेट किया जातीय समीकरण
सीएम योगीआदित्यनाथ ने इन राजनीतिक परिवारों से मुलाकात कर न केवल उनकी नाराजगी को दूर करने की कोशिश की है. बल्कि एक जातीय समीकरण भी सेट कर दिया है. कौशल किशोर पासी समाज से आते हैं, रीता बहुगुणा जोशी ब्राह्मण समाज से आती हैं और गंगाचरण राजपूत लोधी समाज से आते हैं. ऐसे में इन जातियों के बड़े नेताओं से मुलाकात कर मतदाताओं को अपने पाले में करने की गोटी सेट कर दी है.
कौशल किशोर के परिवार से सीएम योगी ने की मुलाकात.
कौशल किशोर के परिवार से मुलाकात, नाराजगी दूर करने की कोशिश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के परिवार से मिले. इस दौरान कौशल किशोर, पत्नी जय देवी और बेटे विकास किशोर मौजूद थे. कहा जा रहा है कि कौशल किशोर पार्टी की अनदेखी से नाराज हैं. उनका कहना है कि पार्टी उनको किसी भी कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं कर रही है. इसके अलावा कौशल किशोर अपनी पत्नी व मौजूदा विधायक जय देवी की महिलाबाद वाली सीट से इस बार बेचे विकास किशोर को टिकट दिलाना चाहते हैं. जब राज्यसभा की लिस्ट आई थी, तब कौशल किशोर ने स्पष्ट तौर पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि जहां परिवार का सम्मान नहीं, वहां रहने का कोई हक नहीं.
सीएम योगी ने रीता बहुगुणा जोशी से की मुलाकात.
रीता बहुगुणा जोशी से सीएम योगी ने की मुलाकात
इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रीता बहुगुणा जोशी से मुलाकात की. दरअसल, रीता बहुगुणा जोशी अपने बेटे के लिए टिकट मांग रही थीं. लेकिन जब टिकट नहीं मिला तो उनके बेटे ने सपा का दामन थाम लिया. तब से रीता बहुगुणा जोशी पार्टी से नाराज हो गईं. बता दें कि रीता बहुगुणा जोशी ब्राह्मण समाज की कद्दावर नेता हैं और उनका सियासी प्रभाव प्रयागराज से लेकर लखनऊ तक है.
गंगाचरण राजपूत से सीएम योगी ने की मुलाकात.
गंगाचरण राजपूत से भी सीएम योगी की मुलाकात
बुंदेलखंड के महोबा की चरखारी विधानसभा सीट से विधायक बृजभूषण राजपूत के पिता गंगाचरण राजपूत से सीएम योगी आदित्यनाथ ने मुलाकात की. बृजभूषण राजपूत अपने ही सरकार के खिलाफ मुखर रहने और कुछ समय पहले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के काफिले को रोकने को लेकर चर्चा में आए थे. बता दें कि बुंदेलखंड में गंगाचरण राजपूत के परिवार की लोधी बिरादरी पर पकड़ ज्यादा है और यही वजह है कि सपा का इस परिवार पर नजर है. ऐसे में सीएम योगी ने यह मुलाकात कर बड़ा सियासी दांव चला है.
2027 में कोई रिस्क नहीं लेगी बीजेपी
राजनीतिक विशेलषकों का कहा है कि इन नेताओं की नाराजगी के दो मुख्य कारण हैं. बीजेपी के बड़े नेताओं का यह दर्द है कि पार्टी आलाकमान बड़े नेताओं की बात तो सुनता है. लेकिन अगर उनके बेटे-बेटी राजनीति में आना चाहें तो उनकी सुनवाई में हील-हवाला होता है. बता दें कि 2024 के लोकसभा चुनाव में झटका खा चुकी बीजेपी अब नाराज नेताओं को मनाने में लग गई है. क्योंकि अगर समय रहते यह नहीं किया तो प्रदेश में हैट्रिक लगाना मुश्किल हो जाएगा.