How to Make Bathukamma at Home Traditional Method and Material

How to Make Bathukamma at Home Traditional Method and Material


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तेलंगाना के प्रसिद्ध लोकपर्व बथुकम्मा को घर पर आसानी से कैसे बनाया जा सकता है, जानिए इसकी पारंपरिक विधि और जरूरी सामग्री। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में फूलों से बथुकम्मा सजाया जाता है।

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फूलों से सजने वाले बथुकम्मा को घर में कैसे बनाएं? जानिए पारंपरिक विधि और जरूरी सामग्री

तेलंगाना का प्रसिद्ध लोकपर्व बथुकम्मा प्रकृति, आस्था और नारी शक्ति के संगम का प्रतीक है। नौ दिनों तक चलने वाला यह पावन उत्सव भाद्रपद अमावस्या यानी एंगेली पुला बथुकम्मा से शुरू होकर दुर्गाष्टमी के दिन सद्दुला बथुकम्मा के भव्य विसर्जन के साथ संपन्न होता है। इन नौ दिनों तक हर शाम रंग-बिरंगे मौसमी फूलों से सजे बथुकम्मा के चारों ओर महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं। यह सिर्फ फूलों की सजावट नहीं, बल्कि मंदिर के गोपुरम जैसी एक पवित्र रचना है। अगर आप इसे घर पर बनाना चाहते हैं तो इसकी विधि बेहद आसान है।

जरूरी सामग्री
बथुकम्मा तैयार करने के लिए पीतल या कांसे की एक चौड़ी गोल थाली ली जाती है। इसके अलावा कद्दू के बड़े पत्ते, गीली मिट्टी या रेत, हल्दी, कुमकुम और मौसमी फूल चाहिए होते हैं। इसमें खासतौर पर तंगेदु , सफेद कलगी वाले फूल, गेंदा, चामंती और गुलाब के फूलों का प्रयोग प्रमुखता से किया जाता है।

बनाने की विधि
हैदराबाद की बाला निलयम बताती है कि सबसे पहले थाली के तल पर कद्दू या केले के बड़े पत्ते बिछाए जाते हैं। पत्तों के ऊपर थोड़ी सी गीली रेत या मिट्टी की परत रखी जाती है, जिससे फूल अपनी जगह मजबूती से टिके रहें और उनमें ताजगी बनी रहे।

इसके बाद फूलों को सजाने का काम शुरू होता है। सबसे निचली परत में तंगेदु और गुनुगु के फूलों को बाहर की ओर मुंह करके एक चौड़े घेरे में सजाया जाता है। इसके बाद ऊपर की ओर बढ़ते हुए परत-दर-परत अलग-अलग रंगों के गेंदे, चामंती और गुलाब के फूल लगाए जाते हैं। हर परत के साथ घेरा धीरे-धीरे संकरा होता जाता है जिससे यह एक सुंदर शंक्वाकार पिरामिड का आकार ले लेता है।

शिखर पर गौरी स्थापना:
फूलों की सजावट पूरी होने के बाद सबसे ऊपरी हिस्से पर हल्दी में थोड़ा पानी मिलाकर एक छोटी पिंडी तैयार की जाती है जिसे गौरी अम्मा कहते हैं। इसे बथुकम्मा के शीर्ष पर स्थापित कर कुमकुम का टीका लगाया जाता है।

शाम को महिलाएं पारंपरिक परिधानों में बथुकम्मा के चारों ओर घेरा बनाकर लोकगीत गाती हैं और अंत में इसे आदरपूर्वक जलस्रोतों में विसर्जित करती हैं।



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