रिलायंस जियो के प्रपोज्ड आईपीओ को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है. मार्केट में इस बात पर नजर है कि देश के सबसे चर्चित डिजिटल कारोबारों में शामिल जियो के आईपीओ में कितने लोग पैसा लगाने के लिए आगे आते हैं. Kantar सर्वे के मुताबिक, जियो आईपीओ को लेकर जागरूक निवेशकों में से 66% ने आवेदन करने की इच्छा जताई है. इसके आधार पर करीब 76 लाख रिटेल आवेदन आने का अनुमान लगाया गया है. आईपीओ प्राइस, बाजार की चाल और कंपनी की वित्तीय स्थिति जैसे पहलू भी निवेशकों के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं.
जियो आईपीओ को लेकर चर्चा के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज के पुराने निवेश का उदाहरण भी सामने आ रहा है. 1977 में कंपनी के आईपीओ में लगाए गए 1,000 रुपये की रकम से मिले शेयरों की संख्या बाद में बोनस शेयरों के कारण बढ़ती गई. मौजूदा भाव के आधार पर रिलायंस के शेयरों और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयरों की कुल वैल्यू 52 लाख रुपये से अधिक है. दूसरी ओर, जियो का प्लान आईपीओ से मिलने वाली रकम से करीब 27,000 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने की है. ऐसे में निवेशकों की नजर आईपीओ की संभावित मांग के साथ कंपनी की वित्तीय स्थिति और आगे की ग्रोथ पर भी रहेगी.
जियो IPO में रिटेल आवेदन
Kantar सर्वे के मुताबिक, 12 अक्टूबर 2026 तक जियो आईपीओ को लेकर जागरूक निवेशकों में से 66% ने आवेदन करने की इच्छा जताई है. सर्वे के आधार पर करीब 76 लाख संभावित रिटेल आवेदन आने का अनुमान लगाया गया है.
जियो IPO में आवेदन-
| जानकारी | आंकड़े |
|---|---|
| पिछले 5 साल में रिटेल IPO आवेदन | 1.8 करोड़ |
| जियो IPO के बारे में निवेशकों की जागरूकता | 64% |
| जागरूक निवेशकों में आवेदन करने की इच्छा | 66% |
| जियो IPO में संभावित रिटेल आवेदन | 76 लाख |
ध्यान रखें कि वास्तविक संख्या आईपीओ प्राइस, बाजार के माहौल और निवेशकों के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी.
LIC और वारी एनर्जीज जैसे बड़े IPO से भी आगे हो सकता है जियो
अगर जियो आईपीओ में अनुमान के मुताबिक 76 लाख आवेदन आते हैं, तो यह पिछले कुछ बड़े आईपीओ के रिटेल आवेदन के आंकड़ों से ज्यादा होगा. रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, LIC के 2022 के आईपीओ में 73.3 लाख, वारी एनर्जीज के 2024 के आईपीओ में 70.1 लाख और भारत कोकिंग कोल के 2026 के आईपीओ में 69 लाख आवेदन आए थे. वहीं, NSE के 2026 के आईपीओ में 36 लाख आवेदन दर्ज किए गए.
बड़े IPO में रिटेल आवेदन की तुलना
| कंपनी | IPO का साल | रिटेल आवेदन |
|---|---|---|
| LIC | 2022 | 73.3 लाख |
| Waaree Energies | 2024 | 70.1 लाख |
| Bharat Coking Coal | 2026 | 69 लाख |
| NSE | 2026 | 36 लाख |
| Reliance Jio (अनुमान) | — | 76 लाख |
1977 में रिलायंस में लगाए ₹1,000 की वैल्यू ₹52 लाख से ज्यादा
रिलायंस इंडस्ट्रीज के पुराने निवेश का उदाहरण कंपनी के शेयरों में लंबे समय तक निवेश के असर को दिखाता है. कंपनी 1977 में 10 रुपये प्रति शेयर के भाव पर आईपीओ लेकर आई थी. उस समय 1,000 रुपये लगाने पर 100 शेयर मिलते थे. इसके बाद कंपनी ने अलग-अलग सालों में बोनस शेयर जारी किए, जिससे निवेशक के शेयरों की संख्या बढ़ती गई.
रिलायंस के शेयरों पर बोनस का असर
| साल | बोनस शेयर का रेश्यो | कुल शेयर |
|---|---|---|
| 1977 | शुरुआती निवेश | 100 |
| 1980 | 3:5 | 160 |
| 1983 | 3:5 | 256 |
| 1997 | 1:1 | 512 |
| 2009 | 1:1 | 1,024 |
| 2017 | 1:1 | 2,048 |
| 2024 | 1:1 | 4,096 |
इसके अलावा, 2023 में रिलायंस से अलग हुई जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयरों की वैल्यू करीब 4.5 लाख रुपये आंकी गई है. दोनों को मिलाकर कुल इक्विटी वैल्यू 52 लाख रुपये से अधिक होती है. दोनों को मिलाकर कुल इक्विटी वैल्यू 52 लाख रुपये से अधिक होती है.
सोने से भी अधिक कीमत
रिसर्च में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक 1977 में 1,000 रुपये से करीब 20.58 ग्राम सोना खरीदा जा सकता था. अक्टूबर 2026 में सोने का भाव 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम मानें, तो इतने सोने की कीमत करीब 3.19 लाख रुपये होती. हालांकि, शेयर और सोने की कीमतें समय के साथ बदलती रहती हैं.
जियो का प्लान
जियो आईपीओ से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल करीब 27,000 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने के लिए करने की योजना है. कंपनी का 5G नेटवर्क पर बड़ा निवेश पहले ही हो चुका है. ऐसे में कर्ज चुकाने से ब्याज और मूलधन के भुगतान पर होने वाला खर्च कम हो सकता है. दिए गए अनुमान के मुताबिक, कर्ज चुकाने से कंपनी को हर साल करीब 2,000 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है. इससे मुनाफे और प्रति शेयर कमाई यानी EPS को सहारा मिलने की उम्मीद है. हालांकि, वास्तविक बचत कर्ज की शर्तों और भुगतान की योजना पर निर्भर करेगी.
इसके अलावा, कंपनी को भविष्य में टेक्नोलॉजी सर्विसेस के निर्यात से नए राजस्व स्रोत मिलने की उम्मीद है. अगर ये कारोबार आगे बढ़ते हैं, तो कंपनी की कमाई को अतिरिक्त सहारा मिल सकता है. निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि कर्ज घटने के साथ कंपनी की कमाई और नकदी प्रवाह में कितना सुधार आता है.
गूगल सर्च से सोशल मीडिया तक बढ़ी जियो IPO की चर्चा
जियो आईपीओ को लेकर बढ़ती दिलचस्पी सोशल मीडिया पर भी दिख रहा है. गूगल ट्रेंड्स के मुताबिक, 11 अक्टूबर तक जियो आईपीओ के लिए सर्च इंटरेस्ट जून में DRHP फाइलिंग के समय बने स्तर से करीब 50% ऊपर पहुंच गया था. जुलाई और अगस्त में रुचि कम होने के बाद सितंबर से इसमें दोबारा तेजी आई.
जियो आईपीओ से जुड़ी सोशल मीडिया बातचीत भी बढ़ी है. 12 अक्टूबर तक करीब 1.77 लाख बातचीत दर्ज की गईं, जबकि रिपोर्ट के मुताबिक NSE के आईपीओ की DRHP फाइलिंग से लिस्टिंग तक करीब 85 हजार इंटरेक्शन हुए थे. सोशल मीडिया पर रिलायंस ग्रुप के नेतृत्व की भी चर्चा हुई. 6 से 12 अक्टूबर के बीच मुकेश अंबानी का नाम करीब 5,500 बार और आकाश अंबानी का नाम करीब 1,300 बार आया. आकाश अंबानी का जिक्र 8 अक्टूबर के आसपास बढ़ा, जब वह इंडिया मोबाइल कांग्रेस में शामिल हुए थे. जियोस्टार डिस्टिलरी रिपोर्ट के मुताबिक, जियो आईपीओ से जुड़ी पॉजिटिव इंटरेक्शन का हिस्सा 21–27 सितंबर के 17% से बढ़कर 6–12 अक्टूबर के दौरान 32% हो गया. सर्वे में एक्टिव डीमैट अकाउंट वाले 18 से 60 साल के ऐसे पुरुष शामिल थे, जिन्होंने पिछले 12 महीनों में आईपीओ के लिए आवेदन किया था.
कुल मिलाकर, जियो आईपीओ को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. सोशल मीडिया से लेकर गूगल सर्च और सर्वे के नतीजे आवेदन की तरफ पॉजिटिव रुख को दिखा रहे हैं. हालांकि, निवेशकों को आईपीओ की आधिकारिक जानकारी, इश्यू प्राइस, कंपनी के वित्तीय आंकड़े और रिस्क समझने के बाद ही निवेश का फैसला लेना चाहिए.
(डिस्क्लेमर- नेटवर्क18 और टीवी18 कंपनियां चैनल/वेबसाइट का संचालन करती हैं, जिनका नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है.)