नवरात्रि पर माता की भक्ति में लीन दिखे जेल में बंद खूंखार कैदी, 647 ने रखा व्रत, खुद के बैंड की धुन पर कर रहे गरबा

नवरात्रि पर माता की भक्ति में लीन दिखे जेल में बंद खूंखार कैदी, 647 ने रखा व्रत, खुद के बैंड की धुन पर कर रहे गरबा


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Navratri 2026: उज्जैन की भैरवगढ़ केंद्रीय जेल में नवरात्रि पर कुल 647 कैदी मां दुर्गा की पूजा-आराधना कर रहे हैं. इनमें 603 पुरुष और 44 महिला बंदी शामिल हैं. व्रतधारियों के लिए जेल प्रशासन फलाहार, दूध, केले और साबूदाने की खिचड़ी उपलब्ध करा रहा है.

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उज्जैन. मध्य प्रदेश के उज्जैन की सेंट्रल जेल में भी शारदीय नवरात्रि के अवसर पर भक्ति और आस्था का अनूठा नजारा देखने को मिल रहा है. जेल की ऊंची दीवारों के पीछे रह रहे कैदी इन दिनों मां दुर्गा की आराधना में लीन हैं. नवरात्रि के पहले दिन से ही 647 कैदियों ने 9 दिनों तक उपवास रखने का संकल्प लिया है. इनमें 603 पुरुष और 44 महिला बंदी शामिल हैं, जो पूरी श्रद्धा के साथ व्रत और पूजा-पाठ कर रहे हैं. खास बात यह है कि जेल के भीतर भी धार्मिक परंपराओं का पालन किया जा रहा है. बंदियों की आस्था को ध्यान में रखते हुए जेल प्रशासन ने उनके लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं ताकि व्रत के दौरान उनकी सेहत और धार्मिक भावनाओं का भी पूरा ख्याल रखा जा सके.

शारदीय नवरात्रि की शुरूआत 11 अक्टूबर से हो चुकी है. इस दौरान उज्जैन की केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में बंद हर तीसरा कैदी माता की आराधना में डूबा हुआ है. आलम यह है कि जेल में वर्तमान समय में दाल-रोटी से ज्यादा फलाहार की डिमांड बढ़ गई है. केंद्रीय भैरवगढ़ जेल के अधीक्षक मनोज शाहू ने बताया कि वर्तमान में जेल में कैदियों को मूंगफली, गुड़, साबूदाने की खिचड़ी, फल आदि दिया जा रहा है. जेल के अंदर पद्मावती माता का मंदिर भी है. माता के दर्शन और पूजन के लिए बंदियों का आना-जाना लगा रहता है. हालांकि वे नियम के मुताबिक निर्धारित समय पर ही पूजा करते हैं.

खूंखार बदमाशों के साथ महिला कैदी भी भक्ति में लीन
जेल अधीक्षक मनोज शाहू ने आगे कहा कि आज की तारीख में करीब 2100 से ज्यादा कैदी जेल में बंद हैं, जिसमें 643 कैदी ऐसे हैं, जो माता की भक्ति में लीन दिखाई दे रहे हैं. इनमें पुरुष कैदियों की बात की जाए, तो 603 कैदी हैं. वहीं 44 महिला कैदी भी माता की आराधना कर रही हैं. जेल में बंद साधारण अपराधी नहीं बल्कि कई कुख्यात अपराधी भी माता की भक्ति में डूबे हुए हैं. कई कुख्यात बदमाशों ने तो अपने गुनाहों की माफी के लिए और मुख्याधारा में वापस जाने के लिए व्रत रखा हुआ है.

सुबह से शुरू हो जाती है माता की आराधना
जेल में बंद आरोपियों को जेल मैनुअल के अनुसार भोजन करने, फलाहार करने के साथ-साथ प्रार्थना करने के लिए अलग से समय मिलता है. वर्तमान समय में उपवास रखने वाले बंदियों को चाय, फलाहार के साथ दूध और केले स्वल्पहार के रूप में दिए जा रहे हैं. सुबह 6 बजे से माता की भक्ति का सिलसिला शुरू हो जाता है. इतना ही नहीं जेल परिसर के खण्ड अ और ब में मां दुर्गा की प्रतिमा भी स्थापित की गई है. बंदी खुद के बैंड की धुन पर गरबा कर रहे हैं.



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