Houthi Uses US AI to make Weapons: अमेरिकी AI से पूछकर बनाईं मिसाइलें फिर हूतियों ने उसी के दोस्त को ठोका एन्थ्रोपिक ने सऊदी को कैसे सदमा दिया?


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Houthi Uses US Claude AI for making Weapons: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस तकनीक की जमकर वकालत कर रहे थे, उसी के चलते सऊदी अरब को खून के आंसू रोने पड़ रहे हैं. दरअसल खबरें ये हैं कि हूतियों ने रॉकेट और मिसाइलें बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मदद ले ली थी, किसी हथियार इंजीनियर की भी उन्हें जरूरत नहीं हुई.

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अमेरिकी AI  से पूछकर बनाईं मिसाइलें, फिर हूतियों ने उसी के दोस्त को ठोकाZoom

अमेरिका की तकनीक ने हूतियों ने सऊदी अरब को ठोका.

Houthi Uses US Claude AI for making Weapons: जिस अमेरिकी तकनीक को दुनिया का भविष्य बताया जा रहा है, वही तकनीक अब अमेरिका के करीबी सहयोगी सऊदी अरब के लिए नई सुरक्षा चुनौती बनती नजर आ रही है. दावा है कि यमन के हूती विद्रोहियों ने अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक के AI सिस्टम ‘क्लॉड’ की मदद से मिसाइले और गाइडेड रॉकेट बना डाली. डेली मेल की रिपोर्ट में कहा गया है कि खुद एंथ्रोपिक ने इससे जुड़ी जानकारी दी है. अगर ये दावे सही साबित होते हैं, तो यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ा हुआ सबसे बड़ा खतरा होगा.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को अब तक चैटबॉट, कोडिंग और कारोबार को आसान बनाने वाले साधन के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन इस सर्विस का इस्तेमाल अगर हथियारों के विकास में होने लगे, तो यही तकनीक युद्ध के मैदान में बड़ा उलटफेर कर सकती है. हूतियों से जुड़ा यह मामला इसी आशंका को सामने लाता है.

AI बना मिसाइल कार्यक्रमों में मददगार?

  1. एंथ्रोपिक की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि यमन में सक्रिय हूती समूह से जुड़े लोगों ने क्लॉड का इस्तेमाल 3 तरह के हथियार बनाने के लिए किया. इनमें गाइडेड रॉकेट, लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल और R2000 नाम की मिसाइल की अलग-अलग किस्मों से संबंधित प्रोजेक्ट शामिल थे.
  2. रिपोर्ट में जिस बात ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा ये सब कुछ आर्टिफिशियल इंजेलिजेंस की मदद से हुआ.  आरोप ये भी है कि इसका इस्तेमाल हथियारों के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने, तकनीकी समस्याओं को समझने और डिजाइन संबंधी प्रोसेस में मदद लेने के लिए किया गया.
  3. जिस AI से इंसान कुछ ही मिनटों में कोड लिखवा सकता है, उसी तरह की क्षमता का इस्तेमाल बेहद संवेदनशील जगह पर किया गया.  हालांकि रिपोर्ट में हथियारों के विकास में AI की मदद लेने का दावा होना और किसी पूरी तरह विकसित, युद्ध के लिए तैयार मिसाइल का प्रमाणित होना दो अलग बातें हैं.

कैसे तोड़ा सिक्योरिटी वॉल?

AI कंपनियां खतरनाक गतिविधियों में मदद देने वाले अनुरोधों को रोकने के लिए सुरक्षा नियम बनाती हैं.  रिपोर्ट के मुताबिक हूती विद्रोहियों से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर अपने सवालों को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर इन पाबंदियों से बचने की कोशिश की. बताया गया है कि एक गाइडेड रॉकेट का परीक्षण भी किया गया, लेकिन वह सफल नहीं हुआ. इसके बाद तकनीकी विफलता के कारण समझने के लिए फिर AI की मदद ली गई.

अमेरिका ने अपने दुश्मन की मदद की?

सऊदी अरब अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी है. दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और सुरक्षा के क्षेत्र में कई डील्स हुई हैं. ऐसे में अगर अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल सऊदी अरब को निशाना बनाने वाले हथियारों के विकास में होता है, तो यह वॉशिंगटन के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर सकता है. हूतियों के हमलों से सऊदी अरब के हवाई अड्डों और एनर्जी फैसिलिटी की सुरक्षा को लेकर चिंताएं पहले से ही बढ़ी हुई हैं. तेल सुविधाओं पर हमला केवल सऊदी अर्थव्यवस्था को प्रभावित नहीं करता, बल्कि ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर भी असर डाल सकता है.

AI का पक्ष लेने वाले ट्रंप क्या कहेंगे?

  • इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सबक यह है कि आधुनिक युद्ध अब केवल मिसाइलों, लड़ाकू विमानों और ड्रोन तक सीमित नहीं रह गया है. AI से मिलने वाला तकनीकी ज्ञान भी सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है.
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस तकनीक की वकालत कर रहे हैं और जिसे उन्होंने सुपर इंटेलिजेंस तक कह डाला है, उसी तकनीक का दुरुपयोग इस तरह होगा, उन्होंने सोचा भी नहीं होगा.

हालांकि किसी खास हमले में क्लॉड की भूमिका साबित करने के लिए अलग से ठोस सबूत जरूरी होंगे. AI से तकनीकी सहायता लेने का दावा अपने आप यह साबित नहीं करता कि किसी हमले के पीछे वही तकनीक थी पर एक बड़ा सवाल तो खड़ा होता ही है- अगर AI किसी खतरनाक परियोजना में सीधे मदद देने से इनकार कर दे, तो क्या उसके अलग-अलग जवाबों को जोड़कर वही जानकारी हासिल की जा सकती है? क्या AI कंपनियां अपनी तकनीक को गलत हाथों में जाने से रोक पाएंगी या ये तकनीक विनाशकारी साबित होगी?



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