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बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एथेनॉल के प्रोडक्शन को लेकर नई खोज की है, जिसमें अब गन्ना और चावल का इस्तेमाल नहीं होगा. केवल पानी पर जमे काई से बायोफ्यूल व एथेनॉल बनाया जा सकता है. इस खोज से आने वाले समय में खाने-पीने की फसलों की होने वाली किल्लत के संकट को भी दूर कर दिया है.
अब पानी की काई से बनेगा एथेनॉल.
लखनऊः गन्ना या चावल से एथेनॉल बनाने पर आने वाले समय में खाने-पीने की फसलों की किल्लत न हो, इसके लिए बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक खोज किया है. यूनिवर्सिटी के बेसिक साइंस विभाग के डॉ. रंजन सिंह, डॉ. सौम्या सिंह और प्रोफेसर सुनील सिंह ने पानी पर जमने वाली काई से एथेनॉल और बायोफ्यूल तैयार करने का नया तरीका खोजा है. यह रिसर्च स्प्रिंगर नेचर के जर्नल बायोप्रोसेस ऐंड बायोसिस्टम्स इंजिनियरिंग में छपी है.
काई 20 से 30 फीसदी गुना अधिक दे सकता है बायोफ्यूल
शोध करने वाले ने गणित और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से एक सॉफ्टवेयर बेस्ड फ्रेमवर्क तैयार किया है. काई यानी कि शैवाल में तेल की पहचान करना अबतक काफी महंगा तकनीक प्रोसेस था. लेकिन इस नई तकनीक से केवल स्कैन करके ही तेल का पता लगाया जा सकता है. इससे बायोफ्यूल बनाने का खर्च काफी कम हो जाएगा. डॉ. रंजन सिंह के अनुसार शैवाल पारंपरिक फसलों की तुलना में 20 से 30 गुना तक ज्यादा बायोफ्यूल दे सकते हैं.
शैवाल की कई प्रजातियों में 70 से 80 फीसदी होता है तेल
साथ ही इसकी कई खूबियां आम लोगों और पर्यावरण के लिए राहत देने वाली है. शैवाल खाने के काम नहीं आता है, इसलिए खाद्य सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा. शैवाल को बंजर जमीन पर या गंदे व खारे पानी में उगाया जा सकता है. यानी उपजाऊ खेती की जमीन का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा. शैवाल की कई प्रजातियां 24 घंटे से भी कम समय में दोगुनी हो जाती है. कुछ प्रजातियों के सूखे में 70 से 80 फीसदी तक तेल होता है, जिससे बायोडीजल बनता है.
कितना है तेल, तुरंत बताएगा सिस्टम
सामान्य पेट्रोल-डीजल की तुलना में इसके इस्तेमाल से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन 40 से 86 फीसदी तक कम हो सकता है. बताया जा रहा है कि शैवाल की माइक्रोस्कोपिक इमेज को सॉफ्टवेयर पर अपलोड करना होगा और सिस्टम तुरंत बता देगा कि उसमें कितना तेल जमा है. तेल जमा करने वाले एक यीस्ट पर की गई स्टडी में इस एआई सिस्टम ने तेल की बूंदों को 92 फीसदी सटीकता से पहचाना है.