चौथे नवरात्रि पर होगी मां कुष्मांडा की पूजा, आचार्य से जानें प्रिय भोग-मंत्र
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Navratri Day 4 Puja: नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है. पूजा के दौरान देवी को केसर युक्त पेठा अर्पित करना शुभ माना जाता है. कुछ श्रद्धालु परंपरा के अनुसार साबुत सफेद पेठा भी माता को समर्पित करते हैं.
उज्जैन. हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. मान्यता है कि एक वर्ष में चार बार नवरात्रि आती है, जिनमें शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है. इन 9 दिनों में भक्त मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में मां भगवती अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं. उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज ने लोकल 18 को बताया कि नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की आराधना की जाती है. इस दिन देवी को प्रिय भोग अर्पित करने के साथ विशेष मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है.
उन्होंने बताया कि मां कुष्मांडा का अर्थ कुम्हड़े से भी है. मां कुष्मांडा को कुम्हड़ा अति प्रिय है, इसलिए भी इनको कुष्मांडा कहते हैं. हालांकि वृहद रूप में देखा जाए, तो एक कुम्हड़े में अनेक बीज होते हैं. हर बीज में एक पौधे को जन्म देने की क्षमता होती है. उसके अंदर सृजन की शक्ति होती है. मां ने इस पूरे ब्रह्मांड की रचना की है. उनके अंदर भी सृजन की शक्ति है.
माता ने मुस्कुराहट से की सृष्टि की रचना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कुष्मांडा ने अपनी हल्की मुस्कान से सृष्टि का निर्माण किया था. इसी कारण उन्हें सृष्टि की रचयिता और आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है. नवरात्रि के चौथे दिन देवी की आराधना में पीले रंग का विशेष महत्व माना गया है. माता की 8 भुजाएं हैं, जिनमें कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा सुशोभित हैं. 8वें हाथ में जपमाला धारण किए मां सिंह पर विराजमान हैं.
मां कुष्मांडा का प्रिय भोग
पंडित आनंद भारद्वाज ने आगे बताया कि मां कुष्मांडा की पूजा में पीले रंग का केसर वाला पेठा रखना चाहिए और देवी को उसी का भोग लगाएं. कुछ लोग मां कुष्मांडा की पूजा में समूचे सफेद पेठे के फल की बलि भी चढ़ाते हैं. इसके साथ ही देवी को मालपुआ और बताशे भी चढ़ाने चाहिए.
जरूर करें इन मंत्रों का जाप
– सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
– ऐं ह्री देव्यै नम: