साड़ी संग जूतों का स्वैग… सुपरमॉम मधुलमिता का ये रिकॉर्ड देख फूल जाएगा आपका दम
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Madhusmita Jena Saree Marathon: इंग्लैंड के मैनचेस्टर की 46 वर्षीय स्पेशल नीड्स टीचर और सुपरमॉम मधुलमिता जेना ने 2026 की मैनचेस्टर मैराथन में छह गज की पारंपरिक साड़ी पहनकर तहलका मचा दिया है. उन्होंने महज 3 घंटे 45 मिनट में 42.2 किलोमीटर की दूरी तय कर साड़ी पहनकर सबसे तेज मैराथन पूरा करने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड 12 मिनट से अधिक के अंतर से तोड़ दिया. उन्होंने साबित कर दिया कि डिटरमिनेशन और सपनों के लिए कोई तय ड्रेस कोड नहीं होता, ट्रेडिशन और एम्बिशन साथ चल सकते हैं.
मधुलमिता ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया.
नई दिल्ली. फिल्मी पर्दे से लेकर सोशल मीडिया की रील्स तक, आज की जनरेशन स्टाइल और कंफर्ट के नाम पर शॉर्ट्स और ट्रैक सूट को ही फिटनेस का पर्याय मानती है. लेकिन इंग्लैंउ के ग्रेट मैनचेस्टर में स्थित स्टॉकपोर्ट की रहने वाली 46 साल की स्पेशल नीड्स टीचर मधुलमिता जेना ने जो कर दिखाया है, उसने इंटरनेट की दुनिया और फिटनेस फ्रीक्स के होश उड़ा दिए. भाई, उन्होंने जिम वाले महंगे गियर या शॉर्ट्स को छोड़कर सीधे छह गज की पारंपरिक साड़ी पहनकर 42.2 किलोमीटर लंबी मैराथन को ऐसे दौड़ा कि दुनिया देखती रह गई.
2026 की मैनचेस्टर मैराथन में मधुलमिता ने महज 3 घंटे 45 मिनट में फिनिश लाइन पार कर ली. सिर्फ फिनिश लाइन ही पार नहीं की बल्कि साड़ी पहनकर सबसे तेज मैराथन पूरी करने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड 12 मिनट से ज्यादा के अंतर से तोड़ डाला. सोशल मीडिया पर उनकी यह तस्वीर आते ही वायरल हो गई. जेन-जी के बीच यह डिबेट छिड़ गई कि क्या कोई बिना ट्रैकपैंट के भी इतना टफ स्टैमिना दिखा सकता है? जवाब मिल चुका है. बिलकुल, और वह भी पूरे स्वैग के साथ!
क्या सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ना ही बड़ी बात है?
क्रेजी बात यह है कि मधुलमिता ने यह सब किसी को इम्प्रेस करने के लिए नहीं किया. उन्होंने साबित कर दिया कि जब हौसले बुलंद हों तो कपड़ों का कोई ढर्रा या स्टीरियोटाइप आपको रोक नहीं सकता. साल 2008 में मां बनने के बाद दिमाग को फ्रेश रखने के लिए उन्होंने दौड़ना शुरू किया था. धीरे-धीरे यह उनका पैशन बना और फिर एक ऐसा मकसद, जिसने पूरी दुनिया को यह बता दिया कि आप अपने कल्चर और ट्रेडिशन को पीछे छोड़े बिना भी अपने सपनों के पीछे भाग सकते हैं. उनकी यह कहानी उन सभी लोगों के लिए एक बड़ा वेक-अप कॉल है, जो यह सोचते हैं कि नए गोल्स को अचीव करने के लिए अपनी जड़ों को काटना पड़ता है. ट्रेडिशन और एम्बिशन एक साथ, एक ही ट्रैक पर दौड़ सकते हैं.
मां से लेकर रिकॉर्ड होल्डर तकएक मां, एक टीचर, एक धावक और अब एक वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर. मधुलमिता ने दिखा दिया कि डिटरमिनेशन (दृढ़ संकल्प) के लिए कोई तय ड्रेस कोड नहीं होता. आप साड़ी में हों या स्पोर्ट्सवियर में, अगर आग अंदर है तो दुनिया झुकेगी ही. इंटरनेट पर लोग उनकी इस अचीवमेंट को शेयर करते हुए लिख रहे हैं कि यही असली अनअपोलोजेटिक वाइब है. तो अगली बार जब आप फिटनेस बहाने बनाकर जिम जाने से कतराएं, तो स्टॉकपोर्ट की इस सुपरमॉम को याद कर लेना, जिन्होंने साड़ी के पल्लू को संभाले-संभाले इतिहास रच दिया.