The procession of Mother Uma set out majestically, reminiscent of Lord Mahakal; devotees showered flowers, and the police offered a salute.

The procession of Mother Uma set out majestically, reminiscent of Lord Mahakal; devotees showered flowers, and the police offered a salute.


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महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पालकी पहुंचते ही मध्यप्रदेश सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने सलामी देकर सम्मान प्रकट किया. इसके बाद पालकी नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई. पालकी में विराजित माता उमा की एक झलक पाने के लिए मार्ग में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी.

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उमा सांझी महोत्सव की परंपरा के तहत सोमवार शाम उमा माता की सवारी धूमधाम से निकाली गई. साल में एक बार निकलने वाली इस सवारी को देखने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा. शाम 4 बजे भगवान महाकालेश्वर के मंदिर से उमा माता ने नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान किया. राजसी ठाठ-बाट के साथ निकली सवारी ने धार्मिक नगरी के माहौल को भक्तिमय बना दिया. महाकाल मंदिर के पुजारी महेश पुजारी ने बताया कि पांच दिवसीय उमा सांझी महोत्सव के समापन के बाद अश्विन शुक्ल द्वितीया यानी चंद्र दर्शन के अवसर पर यह सवारी परंपरानुसार निकाली जाती है.

सवारी के पूर्व सभा मंडप में पंडे-पुजारी ने पूजन-अर्चन किया. उसके बाद उमा माता की पालकी को नगर भ्रमण की ओर रवाना किया. पालकी जैसे ही महाकालेश्‍वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची मध्य प्रदेश सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा सलामी दी गई. इसके बाद पालकी को नगर की ओर प्रस्थान कराया गया. पालकी में विराजित उमा माता के दर्शन लिए रास्ते भर श्रद्धालु आतुर दिखे.

पालकी की ऐसी शोभा
धार्मिक उल्लास के बीच उमा माता की रजत प्रतिमा पालकी में विराजित होकर निकली. वहीं डोल रथ पर गरुड़ पर विराजित माताजी और भगवान श्री महेश ने भक्तों को दर्शन दिए. सवारी में घुड़सवारों, पुलिस जवानों, मंदिर के पुजारी-पुरोहितों और श्रद्धालुओं ने शामिल होकर माहौल भक्तिमय बना दिया.

इन मार्गों से गुजरी सवारी
सवारी महाकालेश्‍वर मंदिर से प्रारंभ होकर महाकाल चौराहा, महाकाल घाटी, तोपखाना, दौलतगंज चौराहा, नई सड़क, कंठाल, सराफा, छत्रीचौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी चौराहा, बक्षीबाजार, कार्तिक चौक एवं मोढ़ की धर्मशाला, रामानुज कोट होते हुए क्षिप्रा तट पर पहुंची. यहां जवारे व संजा विसर्जन एवं पूजन के पश्चात् सवारी कहारवाड़ी, बक्षी बाजार एवं महाकाल रोड़ होते हुए महाकालेश्वर मंदिर वापस आएगी.



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