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Muzaffarpur’s Vicky Making Durga Crowns: बिहार के मुजफ्फरपुर के विक्की द्वारा बनाए गए मां दुर्गा के मुकुटों की मांग नेपाल, यूपी और बिहार तक है है. वह 8 साल की उम्र से यह पारंपरिक काम कर रहे हैं, और इस बार उन्होंने 51 हजार रुपये तक का मुकुट तैयार किया है. उनका कहना है कि वे पारंपरिक कला में नए प्रयोग करते हैं.
मुजफ्फरपुर. दुर्गा पूजा का नाम आते ही अक्सर लोगों के मन में पश्चिम बंगाल की भव्य पूजा और आकर्षक सजावट की तस्वीर उभरती है. लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर में भी ऐसे कारीगर हैं, जिनकी कलाकारी की पहचान दूसरे राज्यों से लेकर नेपाल तक है. यहां के 27 वर्षीय विक्की मां दुर्गा के लिए आकर्षक मुकुट तैयार करते हैं. उनके हाथों से बने मुकुट की मांग मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल तक है. खास बात यह है कि विक्की महज आठ साल की उम्र से यह काम कर रहे हैं और अब तक करीब 15-16 वर्षों का अनुभव हासिल कर चुके हैं.
नेपाल से लेकर गोरखपुर तक मिलते हैं ऑर्डर
विक्की बताते हैं कि दुर्गा पूजा से करीब दो महीने पहले ही मुकुट के ऑर्डर आने शुरू हो जाते हैं. इस बार भी उन्हें नेपाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर समेत कई जगहों से ऑर्डर मिले हैं. मुजफ्फरपुर के स्थानीय ग्राहक भी बड़ी संख्या में उनके पास मुकुट बनवाने आते हैं.
विक्की के मुताबिक, मांग इतनी रहती है कि वह हर ऑर्डर स्वीकार नहीं कर पाते. काम की गुणवत्ता बनाए रखने और समय पर मुकुट तैयार करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार ही ऑर्डर लेते हैं. उनके लिए सिर्फ ज्यादा मुकुट बनाना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि हर मुकुट को बेहतर फिनिशिंग और अलग पहचान देना भी जरूरी है.
51 हजार रुपये तक का बनाते हैं मुकुट
इस बार उनके यहां तैयार होने वाले मुकुटों में ड्राई फ्रूट से बना मुकुट खास आकर्षण है. विक्की बताते हैं कि इसकी कीमत 51 हजार रुपये है. यहां अलग-अलग डिजाइन और सजावट के हिसाब से मुकुट तैयार किए जाते हैं. दुर्गा पूजा के सीजन में काम बढ़ने के कारण उनके साथ चार अन्य कारीगर भी मेहनत करते हैं, ताकि ग्राहकों के ऑर्डर समय पर पूरे किए जा सकें.
आठ साल की उम्र में सीखी कलाकारी
विक्की का कहना है कि मुकुट बनाने का काम उनके परिवार में पीढ़ियों से होता आ रहा है. उन्होंने बचपन से परिवार के लोगों को यह काम करते देखा और धीरे-धीरे खुद भी सीख गए. महज आठ साल की उम्र में उन्होंने मुकुट बनाना शुरू कर दिया था. आज ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने इसी पारंपरिक काम को अपना व्यवसाय बना लिया है.
विक्की बताते हैं कि उनका शुरू से सपना था कि वह मुकुटों को एक अलग रूप दें, ताकि उनकी कलाकारी लोगों को याद रहे. वह एक जैसे डिजाइन को बार-बार दोहराने के बजाय हर बार कुछ नया बनाने की कोशिश करते हैं.
पारंपरिक कला में नया प्रयोग
उनका मानना है कि पारंपरिक कला में नए प्रयोग करने से ही उसकी पहचान बढ़ती है. आज उनकी मेहनत और हुनर की बदौलत मुजफ्फरपुर में तैयार होने वाले मुकुट दूसरे राज्यों और नेपाल तक पहुंच रहे हैं. विक्की की कहानी बताती है कि हुनर, मेहनत और नए विचारों के साथ पारंपरिक व्यवसाय को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है.