सतना. अगर आप रबी सीजन में ऐसी फसल की तलाश कर रहे हैं, जिसमें ज्यादा पानी की जरूरत न हो और कम लागत में अच्छी कमाई का मौका मिले, तो अजवाइन की खेती आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है. अक्टूबर का मध्य समय इसकी बुवाई के लिए काफी अच्छा माना जाता है. लोकल 18 को जानकारी देते हुए सतना के किसान अंशुमान सिंह ने बताया कि सही समय पर बुवाई, उन्नत किस्म और फसल के बेहतर प्रबंधन से एक एकड़ में 8 से 10 क्विंटल तक अजवाइन का उत्पादन लिया जा सकता है. बाजार भाव अच्छा मिलने पर किसान करीब 1.20 लाख से 1.50 लाख रुपये तक का कारोबार कर सकता है. खास बात यह है कि इसकी खेती में पानी की खपत भी दूसरी कई फसलों के मुकाबले कम होती है.
अंशुमान सिंह ने बताया कि अजवाइन की बुवाई के लिए मध्य अक्टूबर से नवंबर की शुरुआत तक का समय सबसे उपयुक्त रहता है. खरीफ सीजन में हरी मूंग या तिल जैसी फसलों की कटाई के बाद खाली हुए खेत में इसे रबी सीजन की मुख्य फसल के तौर पर लगाया जा सकता है. एक एकड़ खेत के लिए करीब 1.5 से 2 किलोग्राम बीज पर्याप्त रहता है. यानी बीज की जरूरत बहुत ज्यादा नहीं पड़ती, जिससे शुरुआती लागत को भी नियंत्रित किया जा सकता है.
135 से 160 दिन में तैयार
अजवाइन की फसल को तैयार होने में आमतौर पर 135 से 160 दिन का समय लगता है, यानी लगभग साढ़े चार से पांच महीने में किसान इसकी कटाई कर सकता है. अलग-अलग किस्मों के हिसाब से फसल की अवधि में थोड़ा अंतर हो सकता है. सही समय पर बुवाई और फसल की जरूरत के मुताबिक देखभाल करने से उत्पादन बेहतर मिल सकता है. इसके लिए छत्तीसगढ़ अजवाइन-1 और प्रताप अजवाइन-1 जैसी उन्नत किस्मों का इस्तेमाल किया जा सकता है.
सिर्फ 4 से 5 हल्की सिंचाई की जरूरत
अजवाइन की खेती की सबसे खास बात इसकी कम पानी की जरूरत है. पूरे फसल चक्र में सामान्य तौर पर 4 से 5 हल्की सिंचाई ही पर्याप्त हैं. ऐसे में जिन किसानों के पास सिंचाई के संसाधन सीमित हैं, उनके लिए भी यह फसल एक विकल्प बन सकती है. एक एकड़ जमीन में अजवाइन की खेती करने पर खेत की तैयारी, बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी समेत कुल लागत करीब 15 से 16 हजार रुपये तक आती है. वहीं बेहतर प्रबंधन और उपयुक्त किस्म के साथ एक एकड़ में औसतन 8 से 10 क्विंटल तक उत्पादन लिया जा सकता है. इस हिसाब से फसल की अच्छी पैदावार होने पर लागत के मुकाबले कमाई काफी ज्यादा हो सकती है.
12000 से 16000 रुपये क्विंटल तक भाव!
अजवाइन का बाजार भाव उसकी गुणवत्ता के आधार पर बदलता रहता है. थोक मंडी में अच्छी गुणवत्ता की अजवाइन को करीब 12000 रुपये से 16000 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव मिल सकता है. वहीं कुछ परिस्थितियों में कीमत इससे ज्यादा भी हो सकती है. अगर किसान को औसतन 10 क्विंटल उत्पादन मिलता है और उसे 12 से 15 हजार रुपये प्रति क्विंटल के आसपास भाव मिलता है, तो कुल बिक्री करीब 1.20 लाख से 1.50 लाख रुपये तक पहुंच सकती है.
लागत घटाने के बाद ज्यादा मुनाफे का दावा
10 क्विंटल तक उत्पादन और अच्छे बाजार भाव की स्थिति में किसान को करीब 1.20 लाख से 1.50 लाख रुपये तक का सकल राजस्व मिल सकता है. इसमें से खेती की करीब 15 से 16 हजार रुपये लागत निकालने के बाद लगभग एक लाख से 1.30 लाख रुपये तक शुद्ध मुनाफे की संभावना होती है. हालांकि वास्तविक कमाई उत्पादन, बाजार भाव, गुणवत्ता और स्थानीय लागत के आधार पर कम या ज्यादा हो सकती है.
कटाई के समय इन बातों का रखें ध्यान
जब अजवाइन के पौधों के गुच्छे और बीज हल्के भूरे रंग के दिखाई देने लगें, तब फसल कटाई के लिए तैयार मानी जाती है. कटाई के बाद पौधों को अच्छी तरह सुखाया जाता है. इसके बाद धनिया की तरह हल्के से पीटकर या मसलकर बीज अलग किए जा सकते हैं. दानों को साफ करके नमी से बचाकर रखना जरूरी है ताकि गुणवत्ता बनी रहे और बाजार में बेहतर भाव मिलने की संभावना बढ़े.
सीधे बिक्री से बढ़ सकता है मुनाफा
किसान अगर पूरी फसल एक साथ थोक मंडी में बेचने के बजाय अजवाइन को साफ करके 100 ग्राम और 250 ग्राम जैसे छोटे पैकेट में तैयार करे, तो स्थानीय पंसारी, किराना दुकानों और बाजार में सीधे बिक्री की जा सकती है. इससे बिचौलियों की भूमिका कम हो सकती है और खुदरा कीमत का फायदा किसान को मिल सकता है. वहीं स्थानीय स्तर पर सीधी बिक्री करने पर मुनाफा डेढ़ गुना तक बढ़ने की संभावना बताई गई है.
ऑर्गेनिक अजवाइन भी कमाई का जरिया
अजवाइन की खेती में गोबर की खाद और केंचुआ खाद यानी वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल करके जैविक उत्पादन की दिशा में भी काम किया जा सकता है. अगर किसान उत्पादन को उचित तरीके से प्रमाणित और बाजार की मांग के अनुसार तैयार कर पाए, तो इसे ऑर्गेनिक अजवाइन के तौर पर प्रीमियम कीमत पर बेचने का अवसर मिल सकता है. यानी खेती के साथ अगर बिक्री का तरीका भी बदला जाए, तो इसी एक फसल से कमाई का दायरा और बढ़ाया जा सकता है.