शिक्षक भर्ती परीक्षा स्थगित होने पर अभ्यर्थियों का फूटा गुस्सा, बिलासपुर में कैंडल मार्च निकालकर की बड़ी मांग

शिक्षक भर्ती परीक्षा स्थगित होने पर अभ्यर्थियों का फूटा गुस्सा, बिलासपुर में कैंडल मार्च निकालकर की बड़ी मांग


Bilaspur News: छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती परीक्षा स्थगित होने के बाद अभ्यर्थियों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई देने लगा है. 11 अक्टूबर को बिलासपुर के गांधी चौक में संयुक्त छात्र मोर्चा के बैनर तले अभ्यर्थियों ने कैंडल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया. हाथों में मोमबत्तियां लेकर पहुंचे अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में देरी, परीक्षा से ठीक दो दिन पहले स्थगन और आरक्षण रोस्टर से जुड़े विवाद को लेकर सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर की. प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों का कहना है कि वे 2-5 साल तक शिक्षक भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं.

कई युवा दूसरे जिलों से बिलासपुर आकर किराए के कमरों और लाइब्रेरी में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं. ऐसे में परीक्षा स्थगित होने से उनकी मेहनत, समय और आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा है. महिला अभ्यर्थियों ने भी अपनी परेशानी साझा करते हुए कहा कि परिवार से दूर रहकर नौकरी की तैयारी करना पहले ही चुनौतीपूर्ण है, अब परीक्षा टलने से भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. अभ्यर्थियों ने सरकार से भर्ती प्रक्रिया को जल्द स्पष्ट करने, नई परीक्षा तिथि घोषित करने और विवाद का शीघ्र समाधान करने की मांग की.

हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्थगित हुई परीक्षा
बता दें कि छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा 11 अक्टूबर 2026 को आयोजित होनी थी, जबकि शिक्षक भर्ती परीक्षा 25 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित थी. भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण से जुड़े विवाद के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने परीक्षा पर रोक लगा दी. विवाद भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों के आरक्षण और विशेष रूप से पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ दिए जाने से संबंधित है. अदालत के आदेश के बाद परीक्षा स्थगित कर दी गई. अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा से महज दो दिन पहले यह फैसला सामने आने से उन्हें बड़ा झटका लगा है. उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू करने से पहले नियमों और आरक्षण संबंधी प्रावधानों की स्पष्टता सुनिश्चित की जानी चाहिए थी, ताकि अंतिम समय में ऐसी स्थिति पैदा न हो.

‘पांच साल बाद भर्ती आती है, फिर भी ऐसी चूक क्यों?’
प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थी इम्तियाज ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती लंबे अंतराल के बाद आती है. ऐसे में भर्ती प्रक्रिया शुरू करने से पहले आरक्षण रोस्टर और अन्य नियमों की जांच होनी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि जब भर्ती प्रक्रिया की जिम्मेदारी अधिकारियों और आयोग की होती है, तो ऐसी कमियां पहले क्यों नहीं दूर की जातीं. अभ्यर्थियों का कहना है कि बार-बार परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर विवाद सामने आने से युवाओं को आंदोलन के लिए सड़क पर उतरना पड़ता है. उन्होंने सरकार से भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और अभ्यर्थियों की समस्याओं का समय पर समाधान करने की मांग की.

’57 हजार पदों की बात से 5000 तक पहुंची भर्ती’
अभ्यर्थी प्रकाश वर्मा ने सरकार पर भर्ती को लेकर गंभीर नहीं होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि युवाओं के बीच 57000 पदों पर भर्ती की चर्चा हुई, इसके बाद 33000 और 16000 पदों को लेकर उम्मीदें बनीं, लेकिन अब भर्ती 5000 पदों तक पहुंचती दिखाई दे रही है. उन्होंने कहा कि शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है. प्रकाश वर्मा के मुताबिक, परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी होने के बाद अंतिम समय में स्थगन से अभ्यर्थियों की परेशानी बढ़ गई है. उन्होंने मांग की कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार अपनी मंशा स्पष्ट करे और युवाओं को समयबद्ध कार्यक्रम उपलब्ध कराए.

‘पुराना प्रश्नपत्र सार्वजनिक कर नष्ट किया जाए’
अभ्यर्थी प्रकाश वर्मा समेत कई प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा के लिए तैयार किए गए पुराने प्रश्नपत्र को लेकर भी मांग उठाई. उनका कहना है कि प्रश्नपत्र पहले ही तैयार हो चुके हैं, इसलिए उनकी गोपनीयता को लेकर आशंका बनी हुई है. ऐसे में पुराने प्रश्नपत्र को सार्वजनिक कर नष्ट किया जाना चाहिए और अगली परीक्षा नए प्रश्नपत्र के साथ कराई जानी चाहिए. महिला अभ्यर्थियों ने भी इसी तरह की मांग करते हुए कहा कि वे नहीं चाहतीं कि अगली परीक्षा के समय प्रश्नपत्र की गोपनीयता को लेकर कोई नया विवाद खड़ा हो. हालांकि, प्रश्नपत्र को लेकर अभ्यर्थियों ने आशंका जताई है, इसे पेपर लीक होने की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

‘दो दिन में टूट गई उम्मीद, अब आगे क्या होगा?’
अभ्यर्थी अजय साहू ने बताया कि वे पिछले चार-पांच साल से पीएससी की तैयारी कर रहे हैं और शिक्षक भर्ती की तैयारी भी कर रहे थे. परीक्षा स्थगित होने से उनकी योजना प्रभावित हुई है. उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा दिसंबर 2026 से पहले नहीं होती है, तो अभ्यर्थियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है. उन्होंने आत्मानंद स्कूलों में भर्ती के लिए हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को भी पात्रता देने की मांग उठाई. उनका कहना है कि भर्ती के नियम ऐसे होने चाहिए, जिनसे योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके.

महिला अभ्यर्थियों ने बताई परिवार से दूर रहने की पीड़ा
कैंडल मार्च में शामिल महिला अभ्यर्थी सीता साहू ने कहा कि परीक्षा स्थगित होने की खबर से वे मानसिक रूप से काफी परेशान हो गई थीं. उन्होंने बताया कि वे पिछले दो से तीन साल से तैयारी कर रही हैं और अपने परिवार, ससुराल तथा पति से दूर रहकर बिलासपुर में पढ़ाई कर रही हैं. पिछले आठ महीने से किराए पर रहकर परीक्षा की तैयारी कर रही सीता साहू के मुताबिक, अब परिवार की ओर से घर लौटने का दबाव भी बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि रहने, खाने और पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल होता जा रहा है. नौकरी नहीं लगने और परीक्षा टलने की स्थिति में आगे क्या करें, यह समझ नहीं आ रहा है.

अभ्यर्थी किरण मौर्या ने भी अपनी परेशानी साझा करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवाओं को परिवार से दूर रहना पड़ता है. रहने, खाने और पढ़ाई पर लगातार खर्च होता है. कई अभ्यर्थी अपनी नींद और आराम तक छोड़कर तैयारी करते हैं. ऐसे में लंबे समय तक इंतजार करने के बाद परीक्षा स्थगित होने से नाराजगी होना स्वाभाविक है.

‘सरकार को जल्द लेना चाहिए फैसला’
अभ्यर्थी शैलजा साहू ने कहा कि शिक्षक भर्ती कई सालों बाद आती है, इसलिए सरकार को इससे जुड़े विवाद का जल्द समाधान करना चाहिए. उन्होंने बताया कि वे पिछले दो साल से तैयारी कर रही हैं और उनके परिवार को भी उनसे काफी उम्मीदें हैं. परीक्षा स्थगित होने से अभ्यर्थियों के साथ उनके परिवार भी निराश हुए हैं. वहीं, अभ्यर्थी मनीष कुमार ने कहा कि आरक्षण से जुड़े विवाद के कारण परीक्षा पर रोक लगी है. उनका आरोप है कि सरकार की ओर से समय रहते इस मामले का समाधान नहीं किया गया, जिससे परीक्षा स्थगित करने की स्थिति बनी.

नई परीक्षा तारीख का इंतजार
बिलासपुर के गांधी चौक में हुए कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से भर्ती का इंतजार कर रहे हैं और अब उन्हें परीक्षा की नई तारीख तथा आगे की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी चाहिए. अभ्यर्थियों ने सरकार से आरक्षण संबंधी विवाद का समाधान कर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग की. फिलहाल परीक्षा स्थगित होने के बाद अभ्यर्थियों की निगाहें सरकार के अगले फैसले और नई परीक्षा तिथि की घोषणा पर टिकी हैं.



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