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FPI Outflow : विदेशी निवेशकों ने साल 2026 की शुरुआत से ही भारतीय बाजार से पैसे निकालने शुरू कर दिए थे और अब तक करीब 3 लाख करोड़ रुपये निकाले जा चुके हैं. एफपीआई सिर्फ सितंबर महीने में ही 44 हजार करोड़ से ज्यादा की निकासी कर चुके हैं. विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली की वजह से ही बाजार में लगातार गिरावट दिख रही है. हालांकि, एफपीआई के पैसे निकालने की तमाम बाहरी वजहें भी हैं.
विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से लगातार पैसे निकाले हैं.
नई दिल्ली. भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली का सिलसिला लगातार जारी है. अक्टूबर महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने 44,166 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं. इतना ही नहीं, साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल निकासी 3.04 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है. विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉण्ड पर बढ़ता यील्ड है.
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने सितंबर में भी भारतीय शेयर बाजार से 35,861 करोड़ रुपये निकाले थे. हालांकि, जुलाई में उन्होंने 20,200 करोड़ और अगस्त में 29,631 करोड़ का निवेश किया था. इस तरह साल 2026 में हुई कुल निकासी पिछले पूरे साल के मुकाबले काफी अधिक है. साल 2025 के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से कुल 1.66 लाख करोड़ निकाले थे, जबकि इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 3.04 लाख करोड़ हो गया है.
देश के बाहर से आई मुसीबत
विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली को भारत की निवेश संभावनाओं पर अविश्वास के रूप में देखने के बजाय वैश्विक स्तर पर पूंजी के पुनर्वितरण के तौर पर समझना चाहिए. निवेश मंच ‘ट्रैक’ के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वेदांत गुप्ते का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में सप्लाई संबंधी जोखिमों के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं. इसके अलावा, मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉण्ड पर ज्यादा बॉन्ड यील्ड निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित कर रहा हैं. इसके अलावा उत्तर एशियाई बाजारों में कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़ी तेजी भी विदेशी पूंजी को अपनी ओर खींच रही है.
निफ्टी में 14 फीसदी गिरावट
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि इस साल भारतीय बाजार के अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन की प्रमुख वजह विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली रही है. साल 2026 में अब तक निफ्टी में 13.87 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. उनके अनुसार, विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार से पूंजी निकालना मौजूदा परिस्थितियों में तर्कसंगत है, क्योंकि 10-वर्षीय अमेरिकी सरकारी बॉण्ड पर यील्ड 5.2 फीसदी से ऊपर बताया गया है. ऐसे में निवेशकों को अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्पों में आकर्षक रिटर्न मिल रहा है. विदेशी निवेशकों ने सितंबर में भारतीय बॉण्ड बाजार में भी बिकवाली की है. उन्होंने एफएआर के तहत 1,921 करोड़ और स्वैच्छिक वीआरआर के तहत 233 करोड़ निकाले हैं. हालांकि, सामान्य मार्ग के जरिये उन्होंने 4,729 करोड़ का निवेश किया है.