Nepal Budhi Gandki Floods: खिसका पहाड़ और हाहाकारी हुई बूढ़ी गंडकी लीलने लगी पुल और बस्तियां रेस्क्यू में फिर उतरी नेपाली सेना

Nepal Budhi Gandki Floods: खिसका पहाड़ और हाहाकारी हुई बूढ़ी गंडकी लीलने लगी पुल और बस्तियां रेस्क्यू में फिर उतरी नेपाली सेना


Nepal Budhi Gandaki Floods News: नेपाल में एक बार फिर प्राकृतिक आपदा ने तबाही मचा दी है. इस बार गोरखा जिले में भूस्खलन के कारण बूढ़ी गंडकी नदी का बहाव बाधित होने और फिर अचानक पानी छोड़े जाने से ताबाही मच गई. अचानक इतना पानी आने के बाद आज इस इलाके में लोगों की आंख  भीषण बाढ़ के साथ खुली. जीवन देने वाली नदी अचानक मलबा और कीचड़ लेकर जब आगे बढ़ने लगी, तो किसी काल जैसी नजर आ रही थी, मानो सब कुछ निगल लेना चाहती है.

इससे जुड़े हुए जो वीडियो सामने आए, उन्होंने भोटीकोशी बाढ़ की यादें ताजा कर दी हैं. प्रशासन ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है और इलाके को अलर्ट पर रखा गया है. बाढ़ के कारण कुछ लोग लापता बताए जा रहे हैं. हालात गंभीर इसलिए भी माने जा रहे हैं क्योंकि 35 से 40 घर भी बह गए हैं. तस्वीर साफ तभी होगी, जब रेस्क्यू के दौरान मलबा हटाया जाएगा.

क्यों बूढ़ी गंडकी नदी ने मचाई तबाही?

डिपार्टमेंट ऑफ हाइड्रोलॉजी एंड मेटरोलॉजी की प्रारंभिक जांच के मुताबिक गोरखा जिले के चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका-6 के आसपास भूस्खलन होने से स्यार नदी या उसकी सहायक जलधारा का रास्ता बंद हो गया था. इसके कारण पानी जमा होने लगा. जैसे ही आगे पानी को आगे बढ़ने का रास्ता मिला, तो वह तेज बहाव के साथ नीचे की ओर आया और बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़ की स्थिति बन गई. हालांकि आपदा का सटीक कारण अभी आधिकारिक तौर पर पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है. बाढ़ ने कई बस्तियों में भारी तबाही मचाई. घरों के साथ पुल और जलविद्युत परियोजना के निर्माण स्थल को भी नुकसान पहुंचा है.

किन-किन इलाकों में घुसा पानी?

स्थानीय प्रशासन के मुताबिक चुमनुब्री और धारचे ग्रामीण नगरपालिकाओं के कई इलाके प्रभावित हुए हैं. शुरुआती जानकारी में 35 से 40 घरों के बह जाने की आशंका जताई गई है. चार लोगों के लापता होने की भी खबर है. प्रशासन ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है. नुकसान का आकलन और बाढ़ के कारणों की जांच जारी है.बाढ़ ने चुमनुब्री क्षेत्र के जगत बगर, सल्लेरी और घट्टेखोला समेत कई इलाकों को प्रभावित किया है. मच्छाखोला की कुछ बस्तियों में पानी घुस गया, जबकि सल्लेरी में लगभग 20 से 22 घरों पर खतरा मंडरा रहा है.

क्यों रेस्क्यू के लिए जमीन पर उतरी सेना ?

चुमचेत में उंगलुंग नदी के किनारे एक शेल्टर में रह रहे चार लोग बाढ़ के बाद से लापता बताए गए हैं. उनकी तलाश की जा रही है. दूसरी ओर नेपाली सेना ने भूस्खलन के खतरे वाले जगत इलाके से 6 लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित निकाला. सेना और पुलिस की टीमें प्रभावित क्षेत्र में राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं. शुरुआती रिपोर्टों में किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई थी, लेकिन लापता लोगों का पता लगाना प्रशासन की प्राथमिकता है.

बाढ़ में पुल बहा, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को नुकसान 

बाढ़ के तेज बहाव में कई पुल बह गए. इनमें न्याकछेत और सिरदिबास को जोड़ने वाला पैदल पुल, मच्छाखोला और केरौजा के बीच का झूला पुल तथा आरुघाट क्षेत्र में एक मोटर चलने योग्य पुल शामिल हैं. गोरखा और धादिंग जिलों को जोड़ने वाले पुल को भी नुकसान पहुंचने की खबर है. इसके अलावा, सल्लेरी में निर्माणाधीन 341 मेगावाट की बूढ़ी गंडकी जलविद्युत परियोजना के निर्माण शिविर और कुछ उपकरणों को भी बाढ़ बहा ले गई. इससे स्थानीय संपर्क और निर्माण कार्य प्रभावित हुए हैं.

क्यों त्रिशूली नदी के आसपास भी खतरा

बूढ़ी गंडकी नदी आगे जाकर त्रिशूली नदी में मिलती है. इसी वजह से बाढ़ का खतरा नीचे की ओर बसे इलाकों तक पहुंचने की आशंका है. नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने गोरखा के अलावा तनहुँ, चितवन, पूर्वी नवलपरासी और पश्चिमी नवलपरासी के नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है. अधिकारियों ने मुग्लिन और बेनीघाट की ओर भी बाढ़ के खतरे को देखते हुए लोगों से ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है.

नेपाल अभी अगस्त में आई विनाशकारी बाढ़ के असर से उबरने की कोशिश कर रहा है. उस आपदा में अधिकारियों के अनुसार 1,457 लोगों की मौत हुई थी और हजारों लोग लापता हो गए थे. ऐसे में गोरखा जिले में आई नई बाढ़ ने पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों के लिए अब यह समझना महत्वपूर्ण होगा कि भूस्खलन से नदी का रास्ता कैसे बाधित हुआ और भविष्य में ऐसी घटनाओं का खतरा कैसे कम किया जा सकता है.



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