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Inflation Effect : महंगाई का असर अब कंपनियों की लागत पर भी पड़ने वाला है. सितंबर तिमाही के रिजल्ट में एमएमसीजी कंपनियों का मुनाफा कम हो सकता है. इसकी वजह कमोडिटीज की बढ़ती लागत और उत्पादन पर उसका असर है. इसके अलावा एग्रीकल्चर प्रोडक्ट का उत्पादन कम होने का असर भी महंगाई पर दिख रहा है, जो सीधा एफएमसीजी कंपनियों के मुनाफे तक जा सकता है.
महंगाई बढ़ने की वजह से कंपनियों का मुनाफा कम हो सकता है.
नई दिल्ली. महंगाई डायन का मुंह धीरे-धीरे बड़ा होता जा रहा है. पहले आम आदमी पर असर डाला और अब कंपनियों पर भी इसकी मार पड़ने की आशंका है. कच्चे माल और अन्य प्रमुख कमोडिटीज की कीमतों में बढ़ोतरी से रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली कंपनियों (एफएमसीजी) की लागत बढ़ गई है. लिहाजा सितंबर तिमाही में इन कंपनियों का मुनाफा कम रहने की आशंका है. बावजूद इसके कुछ कंपनियों का रेवेन्यू दहाई अंक यानी 10 फीसदी से अधिक बढ़ने की उम्मीद है.
ब्रोकरेज कंपनी आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले कच्चे तेल और उससे बने उत्पादों की कीमतों में तेज उछाल के साथ अन्य कमोडिटीज की महंगाई ने कंपनियों के लिए लागत बढ़ा दी है. इसके अलावा, कई क्षेत्रों में कम बारिश से एग्रीकल्चर प्रोडक्शन और ग्रामीण डिमांड प्रभावित होने की भी आशंका है. इसका असर भी कंपनियों के कारोबार और मुनाफे पर पड़ सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कमोडिटीज की कीमतें बढ़ने से कंपनियों के ब्याज और टैक्स का असर भी दिखने वाला है.
बिक्री ज्यादा पर मुनाफा कम
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तवर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में अधिकांश एफएमसीजी कंपनियों का प्रदर्शन मिला-जुला रहने की संभावना है. कई कंपनियों की बिक्री में दोहरे अंक की वृद्धि हो सकती है, लेकिन कमोडिटीज की बढ़ती कीमतों के कारण परिचालन मुनाफे की वृद्धि राजस्व वृद्धि से कम रह सकती है. देश के अधिकांश हिस्सों में कम बारिश कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, जिससे ग्रामीण मांग में नरमी आने की आशंका है. खाद्य महंगाई में आगे और वृद्धि होने पर शहरी मांग भी प्रभावित हो सकती है. रिपोर्ट में यह भी अनुमान जताया गया है कि वित् वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में बढ़ी हुई लागत कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बनाए रख सकती है.
कमाई पर दिख रहा महंगाई का दबाव
डाबर इंडिया और मैरिको जैसी प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों ने सितंबर तिमाही में अपने राजस्व में दोहरे अंक की वृद्धि का अनुमान जताया है. इन कंपनियों को अपने मुख्य कारोबार और चुनिंदा उत्पाद श्रेणियों में सुधार से समर्थन मिलने की उम्मीद है. डाबर इंडिया ने अपने तिमाही कारोबारी अनुमान में कहा कि घरेलू एवं व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों (एचपीसी) के साथ बिना चिकित्सक के पर्चे पर मिलने वाली दवाओं और पारंपरिक औषधीय उत्पादों की श्रेणियों पर महंगाई का दबाव बना हुआ है. तिमाही के दौरान महंगाई के कारण ऑपरेशनल मार्जिन प्रभावित हुआ. हालांकि, कीमतों में चरणबद्ध बढ़ोतरी और लागत बचत के प्रयासों से इस प्रभाव को कुछ हद तक कम करने में मदद मिली है.
कई कंपनियों ने जताई चिंता
मैरिको ने मार्जिन में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई है. पैराशूट नारियल तेल और सफोला जैसे ब्रांड बनाने वाली इस कंपनी ने कहा कि तिमाही के दौरान कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों की कीमतों में और वृद्धि हुई, जबकि खोपरा की कीमतें अपने उच्चतम स्तर से करीब 35 फीसदी नीचे बनी रहीं. मैरिको को अनुकूल उत्पाद मिश्रण और खोपरा की अपेक्षाकृत कम कीमतों के कारण सालाना आधार पर सकल मार्जिन में मजबूत सुधार की उम्मीद है. गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (जीसीपीएल) ने भी तिमाही के दौरान कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी की बात स्वीकार की है. वित्तवर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अंत में कुछ कमोडिटी कीमतों में नरमी के संकेत मिले थे, लेकिन दूसरी तिमाही में कई प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में फिर तेजी आई.
गोदरेज के कई प्रोडक्ट पर महंगाई की मार
कंपनी के प्रमुख ब्रांड में हिट, गुडनाइट, गोदरेज नंबर-1 और सिंथॉल शामिल हैं, जिस पर कमोडिटी की बढ़ती कीमतों का असर दिख रहा है. कंपनी को दूसरी तिमाही में भी मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद है. उसने कहा कि असमान मानसून परिस्थितियों, अल नीनो के मजबूत होने की आशंका और कमोडिटीज की बढ़ती कीमतों से खपत प्रभावित हो रही है. इसके बावजूद पिछले साल की समान अवधि की तुलनात्मक स्थिति अनुकूल रहने से प्रदर्शन को सहारा मिल सकता है. नोमुरा ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि सितंबर में कई कच्चे माल की कीमतें पिछले साल की समान अवधि के स्तर से ऊपर बनी रहीं.