हार्ट की तरह पैरों में भी लेग अटैक, लापरवाही करने पर पैर काटने तक की आ जाती नौबत, भारत में तेजी से बढ़ रहे मामले

हार्ट की तरह पैरों में भी लेग अटैक, लापरवाही करने पर पैर काटने तक की आ जाती नौबत, भारत में तेजी से बढ़ रहे मामले


Last Updated:

दिल के दौरे की तरह पैरों में भी लेग अटैक आता है. नसों में खून की रुकावट से पैर काटने तक की नौबत आ सकती है. भारत में वैस्कुलर बीमारियों के प्रति जागरूकता और इलाज की कमी है. डॉक्टरों के अनुसार, तंबाकू, धूम्रपान, डायबिटीज और खराब जीवनशैली इसके मुख्य कारण हैं. लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज जरूरी है.

ख़बरें फटाफट

Top Deals Inside

नई दिल्लीः दिल का दौरा तब पड़ता है जब दिल की खून की नसें बंद हो जाती है. इसी तरह पैरों में भी अटैक तब पड़ता है जब पैरों की खून की नसें बंद हो जाती है. लापरवाही करने पर पैर काटने तक की नौबत आ जाती है. इसे वैस्कुलर बीमारियां कहते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में वैस्कुलर बीमारियों को लेकर लोगों में जागरूकता बहुत कम है. यहां तक की सरकारी अस्पतालों में वैस्कुलर बीमारियों के ट्रीटमेंट के विशेषज्ञ और विभाग तक मौजूद नहीं है. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी दिल्ली एम्स तक में वैस्कुलर डिजीज का विभाग तक नहीं है. जिस वजह से ऐसी बीमारियां भारत में लगातार बढ़ रही है. हाल ही में एक 29 साल के लड़के को भी पैरों में खून की नस बंद हो जाने की वजह से उसे जब चलने फिरने में दिक्कत हुई तब वह डॉक्टर के पास पहुंचा. तब उसका इलाज शुरू किया जा सका और देर होती तो शायद उसका पैर काटना पड़ता. यह जानकारी दिल्ली में आयोजित
वीएस आई – एएसवीएस 2026 के दौरान डॉक्टरों ने दी.

ऐसे पहचानें लक्षण
इस दौरान ऑर्गनाइज़िंग सेक्रेटरी और नई दिल्ली मैक्स हॉस्पिटल में वैस्कुलर और एंडोवैस्कुलर सर्जरी विभाग के डायरेक्टर और हेड डॉ. तापिश साहू ने बताया कि अगर किसी को चलने में दिक्कत हो रही है. उसका एक पैर ठंडा और दूसरा पैर गर्म है. पैर का रंग बदल चुका है और चलने में उसे काफी दर्द का एहसास हो रहा है तो ऐसे में संभव है कि पैर के खून की नसें बंद हो चुकी हैं. जिस वजह से खून का सप्लाई नहीं हो रहा है. इसे नजरअंदाज ना करें और तुरंत डॉक्टर से मिले और इलाज शुरू कराएं. वहीं ऑर्गनाइज़िंग चेयरमैन और मेदांता में पेरिफेरल वैस्कुलर और एंडोवैस्कुलर साइंसेज़ के सीनियर डायरेक्टर डॉ. तरुण ग्रोवर ने कहा कि डीप वेन थ्रॉम्बोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की गहरी नसों में खून का थक्का जम जाता है, जिससे खून का सामान्य बहाव रुक सकता है. अगर इसका इलाज न किया जाए तो यह थक्का फेफड़ों तक पहुंच सकता है और गंभीर रुकावट पैदा कर सकता है, जिससे जान का खतरा भी हो सकता है. यहां मौजूद वैस्कुलर सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के सीनियर वैस्कुलर और एंडोवैस्कुलर सर्जन डॉ. भूपेश गर्ग बताया कि वैस्कुलर डिजीज लाइफस्टाइल बीमारी है. लाइफ स्टाइल अगर आपने सही कर लिया तो यह बीमारी आपको नहीं होगी.

इन वजहों से हो रही वैस्कुलर डिजीज
इस दौरान सोसाइटी ऑफ इंडिया और एंडोवैस्कुलर इंटरवेंशन सोसाइटी ऑफ इंडिया के सदस्य और मेदांता अस्पताल गुड़गांव के वैस्कुलर सर्जन डॉ. राजीव पारख ने बताया कि यह बीमारी तंबाकू का सेवन करने, सिगरेट पीने और डायबिटीज की वजह से होती है. जिस तरह शरीर के बाकी अंगों में बीमारियां होती है वैसे ही शरीर की खून की नसों में भी बीमारियां होती हैं, जिसे सही समय पर पहचान कर इलाज कराना जरूरी होता है. गैंग्रीन जैसी बीमारी में पैर काटने तक की नौबत आ जाती है. ऐसे में जरूरी है कि आप अपना शुगर कंट्रोल रखें. ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखें. कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रखें. एक्सरसाइज करें. ज्यादा पानी लें. ज्यादा देर तक खड़े ना रहें. ज्यादा देर तक बैठे ना रहें. अच्छी नींद लें. पैरों की एक्सरसाइज करें. पैरों में जो लक्षण बताए गए हैं वह नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से मिले. उन्होंने बताया कि यह बीमारी जेनेटिक भी हो सकती है और अधिक मात्रा में स्मोकिंग करने या तंबाकू का सेवन करने से भी हो सकती है.



Source link