दोस्त के खातिर राजनीति में आए थे अमिताभ, कड़वे अनुभवों ने खत्म किया मोह, बयां किया दर्द- ‘भावनाओं की जगह नहीं’

दोस्त के खातिर राजनीति में आए थे अमिताभ, कड़वे अनुभवों ने खत्म किया मोह, बयां किया दर्द- ‘भावनाओं की जगह नहीं’


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अमिताभ बच्चन ने सिनेमा में काम करते हुए दशकों गुजार दिए हैं, फिर भी काम के प्रति उनका लगाव कम नहीं हुआ. वे आज भी ‘कौन बनेगा करोड़पति’ को होस्ट कर रहे हैं, जिसने उन्हें मुसीबत के वक्त सहारा दिया था. मेगास्टार ने फिल्मों के जरिये समाज के ताने-बाने को बयां किया, मगर जब वे राजनीति में उतरे तो उनका अनुभव बड़ा खराब रहा. वे दोस्त के खातिर राजनीति में आए थे, मगर तमाम आरोपों के बाद उन्होंने इसे हमेशा के लिए छोड़ दिया. आइए, मेगास्टार की जन्मदिन पर उनकी जिंदगी को थोड़ा और पास से जानें.

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नई दिल्ली: महानायक अमिताभ बच्चन ने अपनी फिल्मों से हर एक पीढ़ी का मनोरंजन किया, मगर उनकी शख्सियत सिनेमा तक सीमित नहीं है. वे अपने सोच-विचार से भी जनमानस को प्रभावित करते रहे हैं. उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा. आज 11 अक्टूबर को दिग्गज एक्टर का जन्मदिन है. आइए, खास मौके पर मेगास्टार की जिंदगी को थोड़ा और करीब से जानें. (फोटो साभार: IMDb)

अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद में हुआ था. उनके पिता हिंदी साहित्य के मशहूर लेखक थे. उनका नाम है- हरिवंश राय बच्चन. बॉलीवुड में सफलता के ऊंचे पायदान को छूने वाले बिग बी राजनीति में भी हाथ आजमा चुके हैं, हालांकि यहां उनकी पारी सिनेमा जैसी हिट साबित नहीं हुई थी.
(फोटो साभार: IMDb)

अमिताभ बच्चन फिल्मों में ‘एंग्री यंग मैन’ के तौर पर सिस्टम से लड़ने वाले नजर आए. उन्होंने असल जिंदगी में भी राजनीति का रुख किया था. साल 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद अमिताभ बच्चन ने अपने बचपन के दोस्त राजीव गांधी को सपोर्ट करने के लिए कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की थी.
(फोटो साभार: IMDb)

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बिग बी ने 1984 में अपने जिगरी दोस्त राजीव गांधी के कहने पर इलाहाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया. उन्होंने 8वें लोकसभा चुनाव में अपने होमटाउन इलाहाबाद सीट से चुनाव लड़ा. उन्होंने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज राजनेता हेमवती नंदन बहुगुणा को एकतरफा मुकाबले में ऐतिहासिक मतों के अंतर से हराया, जो चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में से एक थी. (फोटो साभार: IMDb)

जब अमिताभ बच्चन का राजनीतिक करियर टॉप पर था, तभी 1987 में देश के चर्चित बोफोर्स घोटाले में उनका और उनके भाई अजिताभ बच्चन का नाम आया. हालांकि उन पर लगे सभी आरोप झूठे साबित हुए, लेकिन मीडिया ट्रायल का उन पर बुरा असर पड़ा. वे विपक्षी दलों के निशाने में भी आ गए थे. आखिरकार, उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किए बिना जुलाई 1987 में लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. उन्हें साल 2012 में इस मामले में पूरी तरह क्लीन चिट मिल गई थी. (फोटो साभार: IMDb)

इस्तीफा देने के बाद अमिताभ बच्चन ने राजनीति से हमेशा के लिए तौबा कर लिया और दोबारा कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा. उस दौरान अमिताभ बच्चन की कंपनी एबीसीएल मुश्किल दौर से गुजर रही थी और गांधी परिवार से कोई मदद न मिलने पर अमर सिंह ने उनकी आर्थिक मदद की. (फोटो साभार: IMDb)

अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन समाजवादी पार्टी में शामिल हो गईं. जया बच्चन साल 2004 से लगातार समाजवादी पार्टी (सपा) की ओर से राज्यसभा सांसद के रूप में राजनीति में एक्टिव हैं. इसके अलावा, दिवंगत नेता अमर सिंह के साथ उनकी नजदीकी के चलते एक समय उनका झुकाव समाजवादी पार्टी की तरफ देखा गया था. (फोटो साभार: IMDb)

बॉलीवुड के शहंशाह ने एक इंटरव्यू में राजनीति और चुनाव लड़ने के बारे में कहा था, ‘मेरा वह फैसला इमोशनल था. मैं एक दोस्त की मदद करना चाहता था इसलिए राजनीति में आया. राजनीति में आने के बाद पता चला यहां भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं है. मुझे लगा कि मैं यह नहीं कर सकता और इसलिए राजनीति छोड़ दी.’
(फोटो साभार: IMDb)

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