कूनो में जन्मे 5 बाघ तो बांधवगढ़ में एक बाघिन की मौत, 15 की उम्र में आखिरी सांस; नीली आंखों वाला पिता


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बांधवगढ़ की मशहूर बाघिन डॉटी की 15 साल की उम्र में मौत हो गई है. इससे सैलानियों में शोक की लहर दौड़ गई है. वन विभाग के अफसरों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया है. बताया जा रहा है कि बाघिन की मौत प्राकृतिक तरीके से हुई है और उसके कोई भी बीमारी नहीं थी. वह नीली आंखों वाले ब्लू आई बाघ की संतान थी.

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बांधवगढ़ में एक बाघिन की मौत, 15 की उम्र में आखिरी सांस; नीली आंखों वाला पिताZoom

उमरिया के बांधवगढ़ में एक बाघिन की मौत

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में अभी कुछ दिन पहले ही एक मादा ने पांच चीतों को जन्म दिया था. इसे प्रोजेक्ट चीता की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा था. अब उमरिया के बांधवगढ़ से बुरी खबर सामने आई है, जहां जंगल की शान और पर्यटकों की चहेती मशहूर बाघिन ‘डॉटी’ ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है. करीब 15 साल की लंबी उम्र बिताने के बाद इस खूबसूरत बाघिन ने मानपुर बफर जोन के मझखेता बीट में अपनी आखिरी सांस ली.

नीली आंखों वाले पिता की संतान थी बाघिन

डॉटी सिर्फ एक बाघिन नहीं, बल्कि बांधवगढ़ में आने वाले हजारों सैलानियों के लिए एक आकर्षण और पहचान का केंद्र थी. उसकी खूबसूरती और रौबदार चाल भी बेहद खास थी. वह बांधवगढ़ के इतिहास में दर्ज मशहूर ‘ब्लू आई’ (नीली आंखों वाले) बाघ की संतान थी. अपने पिता की तरह ही डॉटी ने भी सालों तक बांधवगढ़ के जंगलों पर राज किया और सैलानियों के दिलों में अपनी एक अलग और खास जगह बनाई.

वन विभाग के अफसरों ने किया अंतिम संस्कार

बाघिन डॉटी का शव मानपुर बफर के मझखेता बीट में देखा गया था, जिसके बाद पूरे वन महकमे और वन्यजीव प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के तय मानकों और एसओपी (SOP) के तहत डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की. इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने बेहद भारी मन और सम्मान के साथ डॉटी को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उसका अंतिम संस्कार कर दिया.

डॉटी की मौत से हर जंगल प्रेमी की नम हुई आंखें

टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि डॉटी की मौत पूरी तरह से प्राकृतिक है और उम्र संबंधी समस्याओं के कारण हुई है. जंगली जीवन में 15 साल की उम्र किसी भी बाघिन के लिए एक लंबा और गरिमापूर्ण जीवन माना जाता है. एक ओर कूनो में जन्मी नई जिंदगियां मध्य प्रदेश में बाघों के सुनहरे भविष्य की उम्मीद जगा रही हैं, तो दूसरी तरफ बांधवगढ़ से डॉटी की विदाई ने हर जंगल प्रेमी की आंखें नम कर दी हैं.

(रिपोर्ट-बिजेंद्र)



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