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Ankit Mishra UPSC Success Story: चाय बेचने वाले माता-पिता के बेटे अंकित मिश्रा ने महज 23 साल की उम्र में यूपीएससी सीएपीएफ परीक्षा क्रैक कर इतिहास रच दिया है. अपमान को अपनी ताकत बनाकर क्लास-1 अफसर बनने वाले अंकित मिश्रा की कहानी किसी को भी प्रेरित कर सकती है.
Ankit Mishra UPSC Success Story: अंकित मिश्रा के माता-पिता चाय का ठेला लगाते थे (एआई से एडिटेड फोटो)
नई दिल्ली (Ankit Mishra UPSC Success Story). व्यक्ति की असली पहचान उसके पास मौजूद संसाधनों से नहीं, बल्कि उसके संघर्ष करने के जज्बे से होती है. रांची के रहने वाले अंकित मिश्रा ने इस बात को एसच साबित कर दिखाया है. समाज उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को देखकर उन्हें नजरअंदाज करता था. एक रिश्तेदार ने शादी में सिर्फ इसलिए नहीं बुलाया कि उनके माता-पिता चाय बेचते थे. उस अपमान ने अंकित मिश्रा के अंदर कुछ ऐसा कर गुजरने की आग सुलग दी, जिसने इतिहास रच दिया.
अंकित मिश्रा की मोटिवेशनल स्टोरी
कालेज के दिनों में ज्यादातर युवा दोस्तों के साथ घूमना-फिरना पसंद करते हैं. वहीं अंकित मिश्रा ने अपनी सारी एनर्जी पढ़ाई और अनुशासन में झोंक दी. पुराने नोट्स और सीमित साधनों के सहारे उन्होंने दिल्ली जाकर अपनी तैयारी को धार दी. पहले प्रयास में मामूली अंकों से चूकने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. अंकित मिश्रा ने अपनी शारीरिक और मानसिक चुनौतियों को पार करते हुए आखिरकार क्लास-1 गजेटेड अफसर बनने का सपना पूरा कर दिखाया.
गरीबी के साए में बीता बचपन और मेधावी पढ़ाई
अंकित मिश्रा का शुरुआती जीवन काफी संघर्षों से भरा था. उनके पिता प्राइवेट स्कूल में शिक्षक थे और घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उनके पास अपना पक्का मकान तक नहीं था. तमाम तंगहालियों के बावजूद अंकित शुरू से ही पढ़ाई में काफी तेज थे. 10वीं में जिला टॉप करने के बाद जब वे अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पहुंचे तो वहां ढलना उनके लिए बड़ी चुनौती थी. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और 11वीं-12वीं में बेहतरीन अंक लाकर साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती.
अपमान बन गया जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट
हर इंसान की जिंदगी में कोई न कोई ऐसा वाकया होता है जो उसे अंदर से बदल देता है. अंकित मिश्रा के साथ भी ऐसा ही हुआ. एक रिश्तेदार ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति का आकलन कर उन्हें और उनके माता-पिता को शादी में इनवाइट नहीं किया. इस अपमानजनक व्यवहार ने उनके दिलो-दिमाग पर गहरा असर छोड़ा. उसी क्षण उन्होंने ठान लिया कि वे समाज के इस संकीर्ण नजरिए को अपनी मेहनत से बदल कर दिखाएंगे. यही टीस उनके अंदर सिविल सेवा में जाने का सबसे बड़ा ईंधन बन गई.
कोविड के दौर में ट्यूशन पढ़ाकर संभाला परिवार
साल 2020 का दौर हर किसी के लिए भारी था. लेकिन अंकित मिश्रा के परिवार पर संकटों का पहाड़ टूट पड़ा था. उनके पिता की नौकरी चली गई थी. घर चलाने के संकट के बीच अंकित ने खुद को टूटने नहीं दिया. उन्होंने घर-घर जाकर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और अपनी छोटी सी बचत से पिता को चाय का ठेला लगाने में सहयोग किया. एक तरफ घर की आर्थिक जिम्मेदारी और दूसरी तरफ अपनी पढ़ाई- दोनों के बीच बैलेंस बना पाना आसान नहीं था.