बटन मशरूम की खेती से कम लागत में कमाएं बंपर मुनाफा, सफल युवा ने बताया तरीका
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खेती-किसानी को आमतौर पर लोग मुनाफे का सौदा नहीं मानते हैं. इसका कारण है कि खेती में मेहनत के मुकाबले लोगों को मुनाफा कम होता है. हालांकि, अब कई युवा खेती-किसानी कर रहे हैं और इसे मुनाफे का काम भी बना रहे हैं. दरअसल, युवा पुराने तौर तरीकों वाली खेती से हटकर मार्केट के डिमांड के हिसाब से खेती करते हैं. इससे वह घाटे का सौदा मानी जाने वाली खेती को भी मुनाफे का सौदा बनाने में सफल हो रहे हैं.
आशीष कुमार/पश्चिम चम्पारण: अक्टूबर का महीना बटन मशरूम की फार्मिंग के लिए बहुत सही माना जाता है. जिले के नौतन निवासी 28 वर्षीय कृषक उपेंद्र कुशवाह ने इसी महीने में करीब चार साल पहले मशरूम फार्मिंग का कारोबार शुरू किया था और आज वो बिहार के सबसे बड़े मशरूम उत्पादकों में से एक हैं. उन्होंने बटन मशरूम की फार्मिंग का तरीका, उसकी देखरेख, हार्वेस्टिंग और इन सभी चीजों में आने वाली लागत और उससे होने वाली आमदनी पर विस्तृत जानकारी साझा की है.
अक्टूबर में शुरू करें बटन मशरूम की फार्मिंग
उपेंद्र बताते हैं कि भारत के मैदानी इलाकों में अक्टूबर का महीना कृषि क्षेत्र के लिए बदलाव का समय होता है. हल्की ठंड की दस्तक के साथ ही यह समय बटन मशरूम की सीजनल खेती शुरू करने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है. सही तापमान, बेहतर नमी और गुणवत्तापूर्ण कंपोस्ट के साथ यदि किसान सही प्रबंधन अपनाएं, तो कम लागत में बंपर मुनाफा हासिल किया जा सकता है.
उचित तापमान
बकौल उपेंद्र, मशरूम के निकलने के समय तापमान का 14°सेल्सियस से 18°सेल्सियस के बीच, तो उसकी फार्मिंग के समय का तापमान 25° से 27° सेल्सियस तक होना अनुकूल माना जाता है. अक्टूबर के वातावरण में यह तापमान प्राकृतिक रूप से मिलने की शुरुवात हो जाती है, जिससे बिना एसी या ग्रीनहाउस के भी किसान झोपड़ियों या बंद कमरों में आसानी से उत्पादन ले सकते हैं. ध्यान रहे कि कमर्शियल रूप से इसकी फार्मिंग के लिए AC का उपयोग अनिवार्य हो जाता है.
आर्द्रता का स्तर
इधर बुवाई के बाद कमरे का तापमान 22°C से 25°C के आसपास बनाए रखना जरूरी है. इसके साथ ही आर्द्रता का स्तर भी 85% से 90% तक होना जरूरी है. इसके लिए दीवारों और फर्श पर हल्की हवा की धुंध के रूप में पानी का छिड़काव किया जा सकता है. बुवाई के 15-18 दिन बाद जब कंपोस्ट में सफेद कवक जाल पूरी तरह फैल जाए, तो उस पर 3-4 सेमी मोटी उपचारित केसिंग मिट्टी की परत बिछाई जाती है. केसिंग मिट्टी नमी बनाए रखने और मशरूम को सहारा देने का काम करता है.
बाजार में 200 रुपए प्रति किलो तक भाव
फार्मिंग के 45 दिनों में बैग से मशरूम का फलन शुरू हो जाता है. 10 किलोग्राम कंपोस्ट से लगभग 3 से 4 किलोग्राम तक मशरूम प्राप्त होता है. जहां तक बात लागत और मुनाफे की है, तो अक्टूबर से मार्च के सीजन के दौरान प्रति बैग लागत बेहद कम हो जाता है, जबकि बाजार में बटन मशरूम का भाव 200 रुपए प्रति किलोग्राम तक चला जाता है.