India LPG Supplier : UAE बना भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर, ट्रंप को लगा दूसरा बड़ा झटका, 1 महीने में पलट गए आंकड़े

India LPG Supplier : UAE बना भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर, ट्रंप को लगा दूसरा बड़ा झटका, 1 महीने में पलट गए आंकड़े


नई दिल्ली: ग्लोबल एनर्जी मार्केट में भारत मे ऐसा दांव खेला है कि 1 महीने में आंकड़े पूरी तरह पलट गए हैं. इस बार भारत के रसोईघरों से लेकर अमेरिका तक हलचल मच गई है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अब भारत का सबसे बड़े LPG सप्लायर बन गया है. ये अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक महीने में दूसरा बड़ा आर्थिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि अब तक भारत के एनर्जी इंपोर्ट बास्केट पर दबदबा बना चुके अमेरिका अचानक दो जगहों पर पीछे हो गया है. सितंबर के महीने में भारत के LPG इंपोर्ट मिक्स में आया यs भारी बदलाव इस बात का सबूत है कि खाड़ी एक बार फिर अपनी पुरानी लय में लौट आए हैं और अमेरिका का कंट्रोल खत्म होता रहा है.

UAE-ओमान ने अमेरिका को दिया तगड़ा झटका

मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म ‘केपलर’ के नए आंकड़ों के मुताबिक, गल्फ देशों से भारत आने वाले LPG जहाजों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है, जिसकी वजह से अमेरिका से होने वाली सप्लाई में भारी गिरावट दर्ज की गई है. ये बदलाव केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे वेस्ट एशिया की जियो पॉलिटिक्स, होर्मुज की जलडमरूमध्य का संकट और भारत की एनर्जी सिक्योरिटी की एक बड़ी रणनीति छिपी हुई है. LPG के साथ-साथ LNG मार्केट में भी इसी तरह का बड़ा फेरबदल हुआ है, जहां ओमान ने अमेरिका को पछाड़कर बाजी मार ली है.

गल्फ की वापसी: यूएई ने मारी बाजी, अमेरिका खिसका दूसरे नंबर पर

अगस्त के महीने तक स्थिति बिल्कुल अलग थी. पिछले छह महीनों से अमेरिका भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बना हुआ था. लेकिन सितंबर में यूएई ने अचानक बाजी पलट दी.

  • यूएई की छलांग: सितंबर में भारत के कुल LPG आयात में यूएई की हिस्सेदारी बढ़कर 39 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में महज 13 प्रतिशत थी. यूएई ने सितंबर में भारत को 5,47,000 टन LPG सप्लाई की, जो अगस्त (1,93,000 टन) के मुकाबले 182 प्रतिशत ज्यादा है.
  • अमेरिका की सप्लाई में गिरावट: अगस्त में भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका का हिस्सा 53 प्रतिशत था, जो सितंबर में घटकर 23 प्रतिशत रह गया. अमेरिका से आयात 58 प्रतिशत घटकर 3,23,000 टन पर आ गया.

अमेरिका आगे कैसे निकला था?

इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलना होगा. इस साल फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा और होर्मुज की जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही ठप हो गई.

होर्मुज वही समुद्री रास्ता है जहां से गल्फ देश दुनिया भर में अपना कच्चा तेल और LPG भेजते हैं. इस संकट के कारण खाड़ी देशों से सप्लाई पूरी तरह प्रभावित हो गई थी.

भारत अपनी LPG जरूरत का 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है और इसका 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज के रास्ते गल्फ देशों से आता था, इसलिए भारत के सामने LPG संकट खड़ा हो गया था. उस मुश्किल वक्त में अमेरिका भारत के सबसे बड़े और भरोसेमंद LPG स्रोत के रूप में उभरा था.

खाड़ी देशों की रिकवरी: 100% पर पहुंची सप्लाई

अब सवाल ये उठता है कि गल्फ देशों से सप्लाई अचानक इतनी कैसे बढ़ गई? केपलर के एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिजिकल मार्केट ने उम्मीद से कहीं ज्यादा मजबूती दिखाई है. ईरान को छोड़कर गल्फ के अन्य हिस्सों से निकलने वाला वॉल्यूम अब युद्ध से पहले के स्तर पर पहुंच रहा है. अगर सऊदी अरब के पश्चिमी तट और यूएई के पूर्वी तट से डायवर्ट किए गए जहाजों को जोड़ दिया जाए, तो सप्लाई अब लगभग 100 प्रतिशत रिकवर हो चुकी है.

सितंबर में खाड़ी के अन्य देशों से भी भारत की LPG सप्लाई सुधरी है.

  1. कुवैत: 1,32,544 टन सप्लाई के साथ कुवैत तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर रहा (अगस्त से 15.6% ज्यादा).
  2. कतर: कतर से 1,15,340 टन LPG आई (अगस्त से 76% ज्यादा).
  3. सऊदी अरब: दिलचस्प बात ये रही कि सितंबर में सऊदी अरब से भारत ने एक टन भी LPG आयात नहीं की.

सितंबर में भारत का कुल LPG इंपोर्ट गणित

सितंबर महीने में भारत का कुल LPG आयात अगस्त 2026 की तुलना में 4 प्रतिशत घटकर 13.9 लाख टन रहा.

  • यूएई- 5,47,000 टन
  • अमेरिका- 3,23,000 टन
  • कुवैत- 1,32,544 टन
  • कतर- 1,15,340 टन
  • ईरान- 89,000 टन
  • अल्जीरिया- 24,000 टन
  • ओमान-  23,000 टन
  • कांगो गणराज्य- 23,000 टन
  • ब्रुनेई- 4,000 टन

LNG मार्केट में भी अमेरिका को झटका: ओमान बना नंबर-1

सिर्फ LPG ही नहीं, बल्कि लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी LNG के मोर्चे पर भी अमेरिका को तगड़ा झटका लगा है. केपलर के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर महीने में ओमान भारत का सबसे बड़ा एलएनजी सप्लायर बनकर उभरा है.

  • ओमान का दबदबा: ओमान से सितंबर में भारत ने 5,85,000 टन एलएनजी आयात की, जो अगस्त से 11.6 प्रतिशत ज्यादा है. भारत के कुल एलएनजी आयात में ओमान की हिस्सेदारी अब 27 प्रतिशत हो गई है.
  • अमेरिका तीसरे स्थान पर फिसला: अगस्त के महीने में अमेरिका 8,48,000 टन एलएनजी सप्लाई करके टॉप पर था, लेकिन सितंबर में अमेरिका से होने वाला निर्यात 59 प्रतिशत गिरकर 3,51,000 टन के साथ तीसरे नंबर पर आ गया.
  • नाइजीरिया का दूसरा नंबर: नाइजीरिया 3,51,000 टन एलएनजी सप्लाई के साथ दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर बना.
  • कतर छठे स्थान पर खिसका: एक समय भारत का सबसे बड़ा LNG सप्लायर (45% हिस्सेदारी) रहने वाला कतर अब छठे स्थान पर आ गया है (94,000 टन). मार्च महीने में कतर के प्रमुख गैस हब ‘रास लफान’ पर हुए हमलों के बाद से उसकी सप्लाई काफी प्रभावित हुई है.

भारत में एलएनजी का इस्तेमाल खाद कारखानों, इंडस्ट्रियल हीटिंग, बिजली उत्पादन और सीएनजी वाहनों के लिए बड़े पैमाने पर होता है. भारत अपनी जरूरत की आधी एलएनजी आयात करता है.

समंदर में बढ़ा भाड़ा: क्यों महंगी पड़ रही है ये रिकवरी?

भले ही गल्फ से सप्लाई फिर से शुरू हो गई हो, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि सब कुछ सामान्य हो गया है. केपलर के चीफ फ्रेट एनालिस्ट मैट राइट का कहना है कि होर्मुज के रास्ते में जहाजों पर खतरे का साया अभी भी मंडरा रहा है.

इसका सीधा असर जहाजों के किराए पर पड़ा है. समंदर में जहाजों का भाड़ा और इंश्योरेंस का खर्च काफी बढ़ गया है. यानी गल्फ से LPG और एलएनजी आ तो रही है, लेकिन ये भारत को थोड़ी महंगी पड़ रही है. बाजार ने ये साबित कर दिया है कि सप्लाई बहाल करने के लिए कूटनीतिक समाधान का इंतजार करना जरूरी नहीं है, लेकिन बिना समाधान के कारोबार चलाने की एक कीमत चुकानी पड़ती है.

भारत का ‘डाइवर्सिफिकेशन प्लैन’

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि पश्चिम एशिया का संकट खत्म होने के बाद भी भारत की तेल रिफाइनरी कंपनियां केवल गल्फ देशों पर निर्भर नहीं रहेंगी. भारत ने अपनी ‘डाइवर्सिफिकेशन स्ट्रेटजी’ यानी अलग-अलग देशों से सामान खरीदने की नीति पर काम जारी रखने का फैसला किया है.

भारत सरकार अब गल्फ के अलावा कनाडा, अल्जीरिया, अमेरिका, मोजांबिक और ब्राजील जैसे नए-नए उत्पादक देशों से भी गैस और तेल की खरीदारी का दायरा बढ़ा रही है, ताकि भविष्य में अगर होर्मुज या गल्फ में फिर से कोई युद्ध या तनाव की स्थिति बने, तो देश में ऊर्जा संकट न खड़ा हो.

भारत के लिए इसका क्या मतलब है?

सितंबर के आंकड़े ये साफ दिखाते हैं कि भारत का ऊर्जा बाजार बेहद लचीला और रणनीतिक है. गल्फ देशों से पास होने के कारण ईंधन लाना सस्ता और समय की बचत वाला होता है, यही वजह है कि रास्ते साफ होते ही यूएई और खाड़ी के देश फिर से नंबर-1 बन गए.

लेकिन अमेरिका के साथ भारत के बनते नए व्यापारिक रिश्ते ये सुनिश्चित करते हैं कि जरूरत पड़ने पर भारत के पास एक मजबूत बैकअप प्लान मौजूद है. आने वाले महीनों में भले ही यूएई और गल्फ देश टॉप पर रहें, लेकिन अमेरिका भी भारत के एनर्जी बास्केट का एक अहम हिस्सा बना रहेगा.



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