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Agra News: आगरा में सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने 265 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, लेकिन अब भी शहर की सड़कों पर हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. सवाल है कि जब धूल रोकने के लिए इतना पैसा खर्च हुआ, तो राहत आखिर कहां है?
शिवानी त्यागी/ आगरा: उत्तर प्रदेश के कई जिलों को स्वच्छ करने के लिए सरकार करोड़ों रुपए की मदद दे रही है. मगर कुछ जिले ऐसे हैं, जहां स्वच्छता के लिए दिए गए पैसे तो खर्च हो गए, लेकिन सफाई अब भी जीरो है. इस लिस्ट में आगरा जिला भी शामिल है, जहां हवा को साफ रखने के लिए 265 करोड़ रुपये खर्च हो गए, लेकिन शहर की सड़कों पर हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. एक तरफ धूल रोकने के लिए सड़कें बनाईं गईं, सफाई और पानी के छिड़काव पर करोड़ों रुपये लगाए गए, तो दूसरी तरफ मेट्रो, सीएम ग्रिड और जल निगम के काम के लिए सड़कों की खुदाई जारी है. सवाल है कि जब धूल रोकने के लिए इतना पैसा खर्च हुआ, तो राहत आखिर कहां है?
पांच साल में 265.15 करोड़ रुपये खर्च
आगरा में एयर एक्शन प्लान के तहत पांच साल में 265.15 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा है. इस रकम से सड़कें, फुटपाथ, साइड पटरी, हरियाली और सफाई के इंतजाम किए गए. धूल कम करने के लिए मशीनों से सफाई और पानी के छिड़काव पर भी हर महीने लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं. लेकिन शहर की कई सड़कों पर निर्माण कार्यों के चलते परेशानी बनी हुई है. सीएम ग्रिड के तहत करीब 12.50 किलोमीटर सड़कें खुदी पड़ी हैं. मेट्रो का काम करीब 30 किलोमीटर और जल निगम का काम करीब 15 किलोमीटर क्षेत्र में चल रहा है. सीवर और पानी की लाइन बिछाने के लिए भी कई जगह खुदाई की गई है.
जमीनी स्तर पर नहीं दिख रहा प्लान
अब धूल नियंत्रण के साथ सफाई के खर्च पर भी सवाल उठ रहे हैं. सड़कों की मशीनों से सफाई पर हर महीने 63 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं. गड़बड़ी की शिकायत पर नगर आयुक्त ने भुगतान रोक दिया है. वहीं, पानी के छिड़काव पर हर महीने 68 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं. इस काम में लगी कंपनी से जीपीएस रिपोर्ट मांगी गई है. भूमिगत डस्टबिन पर भी हर महीने 14 लाख रुपये खर्च होने का दावा है. लेकिन कई डस्टबिन खराब होने और कचरा सड़कों पर रहने की शिकायतें सामने आई हैं.
आगरा में धूल रोकने के लिए करोड़ों रुपये तो खर्च हो गए, लेकिन निर्माण कार्यों के बीच शहर की हवा को साफ रखना अब भी बड़ी चुनौती है. सवाल यही है कि जब 265 करोड़ रुपये शहर की सफाई के लिए आवंटित किए गए थे, तो आखिर इतने पैसों का क्या हुआ और खर्च हुए पैसों की मदद से सुविधाओं का फायदा लोगों को कब मिलेगा?