अगले 72 घंटे हमारी पृथ्वी और हमारी रोजमर्रा की जिंदगी के लिए बेहद सेंसेटिव साबित होने वाले हैं. अंतरिक्ष से एक नहीं, बल्कि तीन-तीन महातूफान सीधे हमारी धरती की ओर तेजी से आ रहे हैं. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगले 3 दिनों के भीतर आसमान का नजारा पूरी तरह बदलने वाला है. इस हलचल के कारण GPS, मोबाइल नेटवर्क और बिजली ग्रिड जैसी 3 बड़ी जरूरतों को भारी नुकसान हो सकता है. ये पूरा मामला पृथ्वी के मौसम का नहीं, बल्कि अंतरिक्ष के मौसम का है जिसकी वजह से तीन विकराल तूफान एक साथ टकराने वाले हैं.
72 घंटों में धरती पर क्या होने वाला है?
दरअसल, हमारी पृथ्वी पर जब मौसम बदलता है, तो बारिश, आंधी या तूफान आते हैं. लेकिन अंतरिक्ष का मौसम जब बिगड़ता है, तो इसका सीधा संबंध हमारे सूरज की आक्रामक हलचल से होता है. इन दिनों हमारा सूरज बेहद भयानक रूप में दिख रहा है. सूरज की सतह पर हुए एक भीषण महाविस्फोट के बाद अंतरिक्ष में एक विनाशकारी तूफान उठा है, जिसे वैज्ञानिक ‘सोलर सुनामी’ कह रहे हैं.
इस विस्फोट के बाद सुपरहीटेड प्लाज्मा की एक विशालकाय लहर सीधे पृथ्वी की ओर लपक रही है. अंतरिक्ष मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 9 अक्टूबर से 11 अक्टूबर के बीच पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से सूरज से निकले कम से कम 3 कोरोनल मास इजेक्शन टकराने वाले हैं.
सूरज पर ‘सनस्पॉट 4549’ का विस्फोट और सोलर सुनामी का जन्म
अंतरिक्ष में अचानक शुरू हुई इस उथल-पुथल की मुख्य वजह सूरज की सतह पर मौजूद ‘सनस्पॉट 4549’ है. 8 अक्टूबर को इस सनस्पॉट में एक के बाद एक कई अत्यंत शक्तिशाली धमाके दर्ज किए गए, जिससे M6.7 क्लास की सोलर फ्लेयर पैदा हुई.
M-क्लास की सौर लपटों को मध्यम-तीव्रता का बड़ा विस्फोट माना जाता है. ये लपटें पृथ्वी के रेडियो संचार को ठप करने और अंतरिक्ष के वातावरण में उथल-पुथल मचाने की ताकत रखती हैं. लेकिन इस बार का धमाका केवल लपटों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सूरज के पूरे वायुमंडल में एक विनाशकारी लहर पैदा कर दी.
क्या होती है ‘सोलर सुनामी’?
- प्लाज्मा की विशाल लहर: वैज्ञानिक भाषा में सोलर सुनामी को ‘मोर्टन वेव’ कहा जाता है. जब सूरज पर कोई बहुत बड़ा विस्फोट होता है, तो गर्म प्लाज्मा और चुंबकीय ऊर्जा की एक बहुत ही तेज लहर पूरे सौर वायुमंडल में फैल जाती है.
- 10 लाख मील प्रति घंटे की रफ्तार: 8 अक्टूबर को आई ये सोलर सुनामी इतनी विकराल थी कि वैज्ञानिकों ने इसे ‘नियर-ग्लोबल’ हलचल करार दिया. यानी इस लहर ने सूरज के दिखने वाले एक बहुत बड़े हिस्से को पलक झपकते अपनी चपेट में ले लिया.
- आकार और गति: इस लहर का शॉक फ्रंट आकार में हमारी पूरी पृथ्वी से भी कई गुना ऊंचा था. ये लहर 16 लाख किमी प्रति घंटे से भी ज्यादा की रफ्तार से आगे बढ़ी और इसके साथ ही सूरज की बाहरी परत से एक विशाल ‘कोरोनल मास इजेक्शन’ (CME) अंतरिक्ष में छूट गया.
पृथ्वी की तरफ आ रहे हैं 3-3 तूफान (CMEs), क्या होगा असर?
सूरज से छूटे हुए ये कोरोनल मास इजेक्शन (CMEs) असल में अरबों टन सुपरहीटेड प्लाज्मा और घातक चुंबकीय क्षेत्र का गुबार होते हैं. जब ये अंतरिक्ष में तैरते हुए पृथ्वी के करीब पहुंचते हैं, तो हमारी पृथ्वी का सुरक्षा कवच यानी मैग्नेटिक फील्ड (Magnetosphere) इनसे सीधे टकराता है.
9 अक्टूबर से 11 अक्टूबर के बीच तीन अलग-अलग CMEs पृथ्वी के करीब से गुजर सकते हैं या सीधे हमारे मैग्नेटिक फील्ड पर प्रहार कर सकते हैं.
- G1 (Minor)- बेहद हल्का असर, केवल ध्रुवीय इलाकों में हल्की रंगीन रोशनी.
- G2 (Moderate)- पावर ग्रिड में हल्का उतार-चढ़ाव, सैटेलाइट्स पर मामूली असर.
- G3 (Strong)- हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो ब्लैकआउट, जीपीएस में गड़बड़ी और कई देशों में रंगीन ‘ऑरोरा’ का दिखना.
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार G3 कैटेगरी तक का जियो मैग्नेटिक तूफान हमारी धरती से टकरा सकता है.
3 भारी नुकसान: क्या टेक्नोलॉजी और पावर ग्रिड ठप हो जाएंगे?
जब भी अंतरिक्ष से कोई सोलर तूफान धरती की तरफ आता है, तो हर आम इंसान के मन में यही डर होता है कि क्या उसका मोबाइल, इंटरनेट या घर की बिजली पूरी तरह बंद हो जाएगी?
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के मुताबिक, G3 स्तर का तूफान इंसानों के शरीर को सीधे तौर पर कोई शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन हमारी आधुनिक तकनीक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर इसके 3 बड़े नुकसान जरूर देखने को मिल सकते हैं.
- रेडियो ब्लैकआउट का खतरा: M-क्लास सौर लपटों के सीधे असर से हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो संचार में अचानक ब्लैकआउट हो सकता है. ये विशेष रूप से विमानन उड़ानों और समुद्र में तैरते जहाजों के नेविगेशन सिस्टम को प्रभावित करता है.
- GPS और सैटेलाइट्स में बड़ी गड़बड़ी: अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट के नाजुक इलेक्ट्रॉनिक्स पर इन प्लाज्मा की सीधी मार पड़ती है. इसके कारण आपके फोन में चलने वाला गूगल मैप्स या जीपीएस (GPS) नेविगेशन कुछ समय के लिए गलत दिशा दिखा सकता है या पूरी तरह ठप हो सकता है.
- बिजली ग्रिड पर भारी दबाव: अगर ये ये जियो मैग्नेटिक तूफान ज्यादा आक्रामक होता है, तो जमीनी स्तर पर बने हाई-वोल्टेज बिजली ग्रिडों में अचानक करंट का भारी उतार-चढ़ाव आ सकता है. इससे पावर ग्रिड फेल होने और ट्रिपिंग की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है.
आसमान में दिखेगा कुदरत का अद्भुत करिश्मा: ‘ऑरोरा’ का नजारा
सोलर तूफान की इस डरावनी खबर के बीच एक बेहद खूबसूरत और जादुई पहलू भी छिपा हुआ है और वो है ऑरोरा, यानी रात के अंधेरे आसमान में हरी, गुलाबी और नीली रोशनी का अद्भुत खेल.
जब सूरज के ये आवेशित कण पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में मौजूद नाइट्रोजन और ऑक्सीजन जैसी गैसों से टकराते हैं, तो पोलराइज्ड क्षेत्रों का आसमान जगमगा उठता है.
- कई इलाकों तक पहुंचेगी रोशनी: G3 श्रेणी का तूफान इतना ताकतवर होता है कि ये ऑरोरा की चमकदार रोशनी को केवल उत्तरी ध्रुव तक सीमित नहीं रहने देता. ये अमेरिका, यूरोप और कनाडा के उन निचले इलाकों तक भी इस रोशनी को खींच लाता है जहां ये आमतौर पर कभी नहीं दिखती.
- एस्ट्रो-फोटोग्राफी के लिए सुनहरा मौका: इस बार सबसे अच्छी बात ये है कि आसमान में चंद्रमा का उजाला बहुत कम रहेगा, जिससे रात का आसमान एकदम गहरा और अंधेरा रहेगा. अगर आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो ये कुदरत के इस करिश्मे को कैमरे में कैद करने का शानदार मौका है.
पैनिक का नहीं सूरज की असीम ताकत देखने का मौका
इस सोलर सुनामी और सौर तूफानों का अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ये तीनों CMEs कितनी रफ्तार से हमारी पृथ्वी से टकराते हैं और उनके चुंबकीय क्षेत्र की दिशा कैसी रहती है.
फिलहाल, नासा (NASA) और एनओएए (NOAA) जैसी दुनिया भर की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियां 24 घंटे सूरज की इस हलचल पर पैनी नजर बनाए हुए हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि ये ब्रह्मांड की एक घटना है. इससे पैनिक होने की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि ये हमारे सूरज की असीम ताकत और पृथ्वी के सुरक्षा कवच की क्षमता को समझने का एक शानदार अवसर है.