सर्वपित्त अमावस्या पर करें पीपल से जुड़े ये खास टोटके, पितरों देंगे आशीर्वाद
Last Updated:
Sarva Pitru Amavasya 2026 Jyotish Totke: 11 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या है और इस बार इस खास दिन शनिश्चरी अमावस्या का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस विशेष अवसर पर पीपल के पेड़ से जुड़े कुछ अचूक उपाय करने से पितृगण और शनिदेव दोनों एक साथ प्रसन्न होते हैं. मान्यता है कि इन उपायों को करने से जीवन के तमाम दोष दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
Sarva Pitru Amavasya 2026 Jyotish Totke: आश्विन मास की अमावस्या तिथि को सर्वपित्त अमावस्या के नाम से जाना जाता है और यह पितृपक्ष का अंतिम दिन होता है. इस दिन श्राद्ध कर्म, पिंडदान, तर्पण, पीपल की पूजा आदि करके पितरों का विदा किया जाता है और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. लेकिन इस बार सर्वपित्त अमावस्या पर शनिश्चरी अमावस्या का संयोग भी बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर आप सर्वपित्त अमावस्या पर पीपल से जुड़े कुछ विशेष ज्योतिष उपाय करते हैं तो इससे ना सिर्फ पितर प्रसन्न होते हैं बल्कि शनिदेव की भी कृपा प्राप्त होती है. इन उपायों को करने से पितृ दोष समेत कई दोषों से मुक्ति मिलती है और पितरों की आत्मा भी तृप्त होती है. आइए जानते हैं सर्वपित्त अमावस्या पर पीपल से जुड़े कौन से उपाय करें…
पीपल के पेड़ की करें पूजा
सर्वपित्त अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन पीपल के पेड़ पर जल में दूध और काले तिल मिलाकर अर्पित करें. इसके बाद 5 मिठाई अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं. इसके बाद पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर पितरों का ध्यान करें और जाने-अनजाने हुई गलती की माफी मांगे. इसके बाद सात बराबर परिक्रमा करते हुए अपनी समस्याओं से अवगत कराएं.
पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं दीपक
सर्वपित्त अमावस्या की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे आटे से बने सरसों के तेल के सात दीपक जलाएं. इसके बाद पितरों और शनिदेव का ध्यान करें और अपना आशीर्वाद बनाए रखने की कामना करें. ऐसा करने से पितृ दोष से राहत मिलती है और पितरों के साथ-साथ शनिदेव का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है.
इस मंत्र का करें जप
सर्वपित्त अमावस्या के दिन पीपल की जड़ में चीनी, चावल, जल, कच्चा दूध, फूल अर्पित करें. इसके बाद ॐ पितृभ्य: नम: मंत्र का जाप करें और पितृसूक्त या पितृस्तोत्र का पाठ करना भी शुभ माना गया है. ऐसा करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं.
शनिदेव की करें पूजा
सर्वपित्त अमावस्या पर शनिश्चरी अमावस्या का संयोग भी बन रहा है, ऐसे इस दिन पितरों की पूजा के साथ-साथ शनिदेव की पूजा करना भी फलदायी माना गया है. शनिदेव के मंदिर में जाकर सरसों के तेल का दान करें और शनि चालीसा का पाठ करें. ऐसा करने से शनि दोष और पितृ दोष के अशुभ प्रभाव में कमी आती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है.