‘तोते तो उड़ जाएंगे, प्रोजेक्ट नहीं रोका जा सकता’, मेट्रो स्टेशन को लेकर विवाद, हाईकोर्ट में सुनवाई


Last Updated:

देश के कई राज्यों में मेट्रो का कार्य कर चल रहा है. इंदौर में भी एक बड़ा मेट्रो प्रोजेक्ट चल रहा है. इस प्रोजेक्ट में रानी सराय कॉम्प्लेक्स को तोड़कर मेट्रो स्टेशन बनाने का काम चल रहा है. लेकिन इसके खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की गई. हवाला दिया गया कि तोतों और अन्य पक्षियों को आशियाना है. यहा 160 से ज्यादा पुराने पेड़ है. एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने इस मामले की सुनवाई की. मेट्रो मैनेजमेंट ने हाईकोर्ट में कहा कि तोते कही पर भी रह लेंगे.

Top Deals Inside

'तोते तो उड़ जाएंगे', मेट्रो स्टेशन को लेकर विवाद, MP हाईकोर्ट में सुनवाईZoom

इंदौर मेट्रो के रानी सराय कॉम्प्लेक्स स्टेशन पर विवाद.

इंदौर. मध्य प्रदेश के कई बड़े जिलों में तरह-तरह के प्रोजेक्ट चल रहे हैं. भोपाल, इंदौर और उज्जैन में सबसे ज्यादा काम हो रहे हैं. सरकार ने करोड़ों का निवेश किया है. तीनों ही शहरों में अलग-अलग परियोजना के तहत सड़कों का चौड़ीकरण हो रहा है. अतिक्रमण हटाए जा रहे हैं. इस बीच इंदौर मेट्रो एक प्रोजेक्ट के खिलाफ जनहित याचिका पर इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामला रानी सराय कॉम्प्लेक्स के पेड़ों से जुड़ा है, जिस पर बहुत सारे तोते बैठते हैं. मेट्रो प्रोजेक्ट की वजह से कई पेड़ों का काटना है.

ईटीवी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से लगभग 160 से 235 पुराने पेड़ों को खतरा है, जो स्थानीय तोतों और अन्य पक्षियों के लिए घोंसले बनाने और रहने की अहम जगह हैं.  दैनिक भास्कर के मुताबिक, तोतों के इन आशियानों को तोड़कर मेट्रो स्टेशन बनना है. इसके खिलाफ एक जनहित याचिका पर 8 अक्टूबर को सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान इंदौर मेट्रो मैनेजमेंट की तरफ से कहा गया, “तोतों का क्या है? आज इस पेड़ पर हैं, तो कल कल किसी और पेड़ पर होंगे. वे कहीं भी उड़कर बैठ जाएंगे. क्या तोतों के लिए इतने बड़े मेट्रो प्रोजेक्ट को रोका जा सकता है? क्या स्टेशन को शिफ्ट किया जा सकता है?”

मेट्रो मैनेजमेंट का 400 करोड़ रुपए नुकसान होने का दावा

रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जयकुमार पिल्लई की डिवीजन बेंच के सामने मैनेजमेंट ने दावा किया कि रानी सराय कॉम्प्लेक्स के अलावा किसी दूसरी जगह मेट्रो स्टेशन बनाने का ऑप्शन नहीं है. इतना ही नहीं इंदौर मेट्रो की तरफ से दावा किया गया कि अगर रानी सराय के अलावा किसी अन्य लोकेशन पर मेट्रो स्टेशन बनाने की प्लानिंग करनी पड़ी, तो 3-4 साल से ज्यादा का वक्त लगेगा और मेट्रो स्टेशन बनाने की लागत भी 400 करोड़ रुपए तक बड़ जाएगी.

याचिकर्ता ने इंदौर हाईकोर्ट में दी ये दलीलें

वहीं, याचिकाकर्ता ने इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दावा किया कि रानी सराय सिर्फ तोतों के रहने की जगह नहीं है. यह एक बायो डायर्सिटी का बड़ा सेंटर है. इंदौर हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा है. अब अगली सुनवाई में इस पर फैसला आने की उम्मीद है.



Source link