आपका बच्चा भी करता है होमवर्क के लिए AI का इस्तेमाल? कहीं एग्जाम में हो ना जाए फेल

आपका बच्चा भी करता है होमवर्क के लिए AI का इस्तेमाल? कहीं एग्जाम में हो ना जाए फेल


AI Impact on Students: आज कल पढ़ाई से जुड़े सवालों के जवाब ढूंढने से लेकर होमवर्क पूरा करने तक, छात्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ले रहे हैं. दरअसल, ChatGPT जैसे टूल्स ने पढ़ाई को आसान तो बनाया है, लेकिन क्या इनके ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों की सीखने की क्षमता पर असर पड़ रहा है? वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट में इस सवाल को लेकर चिंता जताई गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, AI की मदद से छात्रों के होमवर्क के नंबर बढ़ सकते हैं, लेकिन इससे यह जरूरी नहीं कि वे उस विषय को सही तरीके से समझ भी रहे हों. कुछ स्टडीज में AI के इस्तेमाल के बाद क्लास में होने वाली परीक्षाओं के नंबर घटने की बात सामने आई है.

होमवर्क में बेहतर प्रदर्शन, लेकिन क्लास टेस्ट में नंबर कम

वर्ल्ड बैंक की वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026 में बताया गया है कि अगर छात्र बिना किसी सीमा के AI टूल्स का इस्तेमाल करते हैं, तो इसका असर उनकी सीखने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है. रिपोर्ट में चीन की एक स्टडी का जिक्र किया गया है, जिसमें कक्षा 7 से 12 तक के छात्रों को शामिल किया गया था.

स्टडी के अनुसार, 2022 से 2025 के बीच छात्रों के बीच AI का इस्तेमाल लगभग शून्य से बढ़कर करीब 80 प्रतिशत तक पहुंच गया. AI का इस्तेमाल शुरू करने के 6 महीने बाद छात्रों के होमवर्क के नंबर में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. खास बात यह थी कि वे असाइनमेंट पर पहले के मुकाबले कम समय दे रहे थे. वहीं, हर महीने होने वाले क्लास टेस्ट में उनके नंबर 20 प्रतिशत तक गिर गए. जिन छात्रों ने कभी न कभी AI का इस्तेमाल किया था, उनके सीनियर हाई स्कूल और कॉलेज एंट्रेंस एग्जाम के औसत नंबर भी 5 से 7 प्रतिशत कम पाए गए.

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि इस स्टडी की अभी एक्सपर्ट्स से समीक्षा नहीं हुई थी. इसलिए इसके नतीजों को समझते समय सावधानी बरतने की जरूरत है.

AI से खुद पढ़ने और सोचने की आदत हो सकती है कमजोर

रिपोर्ट में बताया गया है कि पढ़ाई का असली मकसद केवल सही जवाब लिखना नहीं, बल्कि सवाल को समझना, उसके बारे में सोचना और खुद जवाब तैयार करना भी है. जब छात्र हर सवाल का जवाब AI से लेने लगते हैं, तो उन्हें खुद मेहनत करने और अपनी गलतियों से सीखने के कम मौके मिलते हैं.

वर्ल्ड बैंक की टीम को लीड करने वाले गौरव नैय्यर ने भी इस बात पर चिंता जताई. उनके मुताबिक, अगर छात्र सीखने की पूरी प्रक्रिया ही AI को सौंप देते हैं, तो यह समस्या बन सकती है.

रिपोर्ट में दूसरी स्टडीज का भी जिक्र है. इनमें पाया गया कि लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) का इस्तेमाल करने वाले कुछ लोगों ने सवालों पर कम मानसिक मेहनत की और उनकी तर्क करने की क्षमता भी कमजोर दिखाई दी. कुछ स्टडीज में यह भी सामने आया कि AI से बेहतर काम तैयार होने के बावजूद उसे पूरा करने में लगने वाली मानसिक मेहनत कम हो गई. इसके अलावा, AI की मदद से काम करने वाले कुछ छात्र टेक्नोलॉजी का सहारा हटने पर पहले के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन करते दिखाई दिए.

क्या पढ़ाई में AI का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए?

रिपोर्ट का मतलब यह नहीं है कि पढ़ाई में AI का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर देना चाहिए. सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह छात्रों और शिक्षकों, दोनों के लिए मददगार साबित हो सकता है. AI कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाने, छात्रों की जरूरत के हिसाब से पढ़ाई का कंटेंट तैयार करने और अलग-अलग लेवल के विद्यार्थियों को सीखने में मदद कर सकता है.

रिपोर्ट में चीन, घाना, नाइजीरिया, तुर्किये और अमेरिका में किए गए प्रयोगों का भी उल्लेख है. इनके एनालिसिस में पाया गया कि AI की मदद से पढ़ाई कराने वाले 30 सेशन से छात्रों को कम से कम आधे साल की पढ़ाई के बराबर सीखने का फायदा मिला. खास तौर पर तब, जब AI का इस्तेमाल शिक्षकों की मदद के लिए किया गया और छात्रों को केवल जवाब नकल करने से रोकने के उपाय अपनाए गए.

छात्रों और पेरेंट्स को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

छात्रों को AI से सीधे होमवर्क के जवाब लेने के बजाय इसका इस्तेमाल किसी विषय को समझने, कठिन सवालों के हल के तरीके जानने और अपनी गलतियां पहचानने के लिए करना चाहिए. पहले सवाल को खुद हल करने की कोशिश करें और जरूरत पड़ने पर AI की मदद लें. इसके बाद बिना किसी सहायता के उसी तरह के सवाल हल करके देखें.

पेरेंट्स और शिक्षकों को भी ध्यान देना चाहिए कि बच्चा AI से मिला जवाब केवल कॉपी तो नहीं कर रहा. उससे सवाल पूछें, जवाब को अपने शब्दों में समझाने के लिए कहें और समय-समय पर बिना AI की मदद के प्रैक्टिस करवाएं. इससे टेक्नोलॉजी का फायदा भी मिलेगा और बच्चों की सोचने, लिखने और समस्या हल करने की क्षमता भी मजबूत बनी रहेगी.



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