दादी-नानी का ये देसी जुगाड़…बचाएगा सालभर पुराना देसी अचार, ठंड शुरू होने से पहले जरूर करें ये काम

दादी-नानी का ये देसी जुगाड़…बचाएगा सालभर पुराना देसी अचार, ठंड शुरू होने से पहले जरूर करें ये काम


सतना. ठंड की शुरुआत होते ही घर में रखे सालभर पुराने अचार की चिंता बढ़ जाती है. गांव-शहरों में आम, करौंदा, बड़हर और दूसरे पारंपरिक अचार बड़ी बरनियों में संभालकर रखे जाते हैं लेकिन सर्दियों में धूप कम होने और हवा में नमी बढ़ने से अचार में फंगस यानी उल्ली लगने का खतरा भी बढ़ जाता है. बघेलखंड और विंध्य के घरों में अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए दादी-नानी के जमाने से कई देसी तरीके अपनाए जाते आ रहे हैं, जिनसे अचार लंबे समय तक स्वाद और खुशबू के साथ सुरक्षित रखा जा सकता है.

सतना निवासी उर्मिला मिश्रा ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि अचार को सुरक्षित रखने का सबसे जरूरी नियम है कि वह सरसों के तेल में पूरी तरह डूबा रहे. बरनी में अचार के ऊपर तेल की एक अच्छी परत बनी रहनी चाहिए क्योंकि इससे अचार का सीधा संपर्क हवा और नमी से कम होता है. अगर ऊपर का अचार सूखा दिखाई दे रहा है या तेल कम हो गया है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. जरूरत के मुताबिक सरसों का तेल अच्छी तरह गर्म करके और फिर पूरी तरह ठंडा करने के बाद बरनी में ऊपर तक डाला जाना चाहिए.

ठंड से पहले धूप दिखाना न भूलें
अक्टूबर में जब भी तेज और अच्छी धूप निकले, अचार की बरनी को धूप दिखाना पुराने समय से अपनाया जाने वाला तरीका है. ढक्कन हटाकर बरनी के मुंह पर साफ सूती या मलमल का कपड़ा बांधकर इसे करीब 4 से 5 घंटे धूप में रखा जाना चाहिए. इससे बरनी के अंदर जमा अतिरिक्त नमी कम करने में मदद मिलती है और अचार की खुशबू व स्वाद भी बरकरार रहता है.

गीली चम्मच से अचार निकालना पड़ेगा भारी
अचार खराब होने की एक बड़ी वजह उसे निकालने का गलत तरीका भी हो सकता है. बरनी में हाथ डालना या गीली चम्मच से अचार निकालना नमी पहुंचा सकता है, इसलिए अचार निकालने के लिए हमेशा साफ और पूरी तरह सूखी लकड़ी या स्टील की कलछी इस्तेमाल करनी चाहिए. वहीं इस्तेमाल के बाद उसे भी साफ और सूखा रखना जरूरी है.

बरनी कहां रख रहे हैं, इसका भी रखें ध्यान
बघेलखंड के घरों में अचार की बरनियों को सीलन वाली जगह या सीधे जमीन पर रखने से बचा जाता है. कांच या चीनी मिट्टी की बरनी को किसी ऊंचे, सूखे और हवादार रैक पर रखना बेहतर रहता है. इससे नीचे की ठंडक और नमी से बरनी को बचाने में मदद मिलती है. ध्यान रखें कि अचार लंबे समय तक रखना हो, तो सामान्य प्लास्टिक या पॉलीथिन की जगह कांच या चीनी मिट्टी के साफ और सूखे कंटेनर को ही प्राथमिकता दे.

नमक और मसालों का भी है देसी तरीका
करौंदा, आम और बड़हर जैसे पारंपरिक अचार में बघेलखंड की महिलाएं मसाले तैयार करते समय नमक की मात्रा थोड़ी तेज रखती हैं. नमक अचार को सुरक्षित रखने में मदद करने वाला प्राकृतिक प्रिजर्वेटिव है. इसके अलावा मसाले भी अच्छी तरह सूखे होने चाहिए क्योंकि उनमें नमी रह जाने पर अचार जल्दी खराब हो सकता है.

लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?
अगर ठंड के दिनों में धूप लगातार कम निकल रही है और अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है, तो कुछ लोग सिरका यानी विनेगर का इस्तेमाल भी करते हैं. इसके अलावा फूड-ग्रेड सोडियम बेंजोएट जैसे प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. सबसे जरूरी बात यही है कि बरनी, चम्मच, मसाले और अचार में नमी न पहुंचे. इन छोटी सावधानियों से सर्दियों में भी घर के पारंपरिक अचार का स्वाद लंबे समय तक बरकरार रखा जा सकता है.



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