उत्तराखंड: पहाड़ों पर भूकंप से पहले ही अलर्ट, बड़े काम का है ये देसी ऐप, बचा रहा लाखों-हजारों की जान


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Earthquake Alert News: उत्तराखंड के चमोली में 6 अक्टूबर को आए 4.9 तीव्रता के भूकंप ने भले ही दहशत फैला दी हो, लेकिन तबाही मचने से पहले ही लोगों को इसकी भनक लग गई थी. धरती हिलने से 20 से 30 सेकंड पहले ही लोगों के मोबाइल पर अलार्म बजने लगे थे, जिससे वे समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सके. यह चमत्कार किसी जादू से नहीं, बल्कि ‘भू देव एप’ (Bhoo Dev App) की बदौलत संभव हुआ. आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) और उत्तराखंड सरकार द्वारा तैयार किया गया यह ‘अर्ली वॉर्निंग सिस्टम’ अब भूकंप के लिहाज से संवेदनशील देवभूमि के लोगों के लिए एक सच्चा रक्षक बन गया है.

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उत्तराखंड: पहाड़ों पर भूकंप से पहले ही अलर्ट, बड़े काम का है ये देसी ऐपZoom

आईआईटी रुड़की के सहयोग से अर्ली वॉर्निंग सिस्टम ऐप तैयार किया है

चमोली/देहरादून: प्राकृतिक आपदाओं, खासकर भूकंप का कोई निश्चित समय नहीं होता, लेकिन क्या हो अगर आपको धरती फटने या कांपने से कुछ सेकंड पहले ही इसकी पक्की चेतावनी मिल जाए? यह अब कोई विज्ञान कथा नहीं बल्कि हकीकत बन चुका है. हाल ही में 6 अक्टूबर को उत्तराखंड के चमोली जिले के थराली क्षेत्र में जब 4.9 तीव्रता का तेज भूकंप आया, तो लोगों को इसके विनाशकारी झटके महसूस होने से 20 से 30 सेकंड पहले ही जानकारी मिल गई थी. इस पूर्व चेतावनी ने लोगों को घरों से बाहर निकलने का बहुमूल्य समय दिया, और यह सब मुमकिन हुआ है ‘भू देव एप’ के जरिए.

भूकंप के खतरे को देखते हुए उत्तराखंड राज्य सरकार ने आईआईटी रुड़की के सहयोग से एक बेहद आधुनिक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम ऐप तैयार किया है, जिसे ‘भू देव एप’ (Bhu Dev App) नाम दिया गया है. आईआईटी रुड़की ने इस ऐप को राज्य सरकार के साथ मिलकर वर्ष 2021 में विकसित किया था. यह ऐप कोई भविष्यवाणी करने वाला सिस्टम नहीं है, बल्कि भूकंप शुरू होने के बाद उसके ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले झटके (Destructive Waves) आने से पहले ही चेतावनी दे देता है. इसके सेंसर नेटवर्क इतने मजबूत हैं कि मुख्य झटके के इलाके में पहुंचने से 20 से 30 सेकंड पहले ही मोबाइल पर जोर-जोर से सायरन बजने लगता है.

22 महीनों में 52 बार कांपी उत्तराखंड की धरती

उत्तराखंड में पिछले 22 महीनों में कुल 52 भूकंप दर्ज किए जा चुके हैं. इनमें सबसे ज्यादा तीव्रता का झटका 4.9 रहा, जो इसी 6 अक्टूबर को थराली में रिकॉर्ड किया गया. इस तेज भूकंप के झटके न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि दिल्ली-एनसीआर तक महसूस किए गए. लगातार आ रहे इन झटकों ने सरकार और भू-वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है.

क्यों इतना संवेदनशील है उत्तराखंड?

भूकंप के लिहाज से उत्तराखंड की संवेदनशीलता का सबसे बड़ा कारण यह है कि पूरा हिमालय एक सक्रिय टेक्टोनिक क्षेत्र है. राज्य के नीचे से मेन फ्रंटल थ्रस्ट, मेन बाउंड्री थ्रस्ट और मेन सेंट्रल थ्रस्ट जैसी प्रमुख भूगर्भीय संरचनाएं गुजरती हैं. वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक, उत्तराखंड में अतीत में आए कई बड़े भूकंपों के केंद्र इसी मेन सेंट्रल थ्रस्ट के आसपास रहे हैं और कमोबेश पूरा उत्तराखंड ही मेन सेंट्रल थ्रस्ट के ऊपर बसा हुआ है.



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