महादेव बेटिंग ऐप मामले में बिग बॉस फेम शेफाली बग्गा ने ED को 1.20 करोड़ रुपये सरेंडर कर दिए हैं. उन पर आरोप है कि बेटिंग प्लेटफॉर्म के प्रमोशनल वीडियो बनाने के लिए उन्हें करीब 1.50 करोड़ रुपये दिए गए थे. ईडी ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि दिल्ली स्थित उनके घर की तलाशी में 30 लाख रुपये नकद मिले. इसके बाद पूछताछ के दौरान बग्गा ने 1.20 करोड़ रुपये और हमें सौंप दिए. अब आपके मन में भी सवाल होगा कि अगर कोई अपराधी पूरा पैसा वापस कर दे तो क्या केस खत्म हो जाएगा? क्या जेल की सजा कम हो सकती है या माफ हो सकती है? प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉड्रिंग एक्ट (PMLA) में इसका जवाब है.
दरअसल, महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप सिंडिकेट की जांच कर रही ईडी ने रायपुर की अदालत में चार्जशीट दाखिल की है. इसमें कहा है कि वीडियो बनाने के लिए जो पैसे शेफाली बग्गा को मिले, वो उन्होंने लौटा दिए. बग्गा ने ईडी को यह भी बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि ऐप को अवैध तरीके से चलाया जा रहा था. ईडी ने उनकी बात मान ली और चार्जशीट भी दाखिल कर दी, लेकिन क्या अब कुछ नहीं होगा.
PMLA एक्ट क्या कहता है?
मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में एक्शन प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA के तहत होता है. इसकी धारा 3 कहती है कि अगर कोई व्यक्ति अपराध से मिली रकम से जुड़ी किसी गतिविधि में शामिल है, उस रकम को छिपाने, रखने, इस्तेमाल करने या उसे बेदाग संपत्ति की तरह पेश करने की प्रक्रिया में शामिल होता है, तो मामला मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आ सकता है. यानी सिर्फ यह नहीं देखा जाता कि पैसा किसके खाते में आया, बल्कि यह भी देखा जाता है कि उस पैसे का स्रोत क्या था और उस आदमी की भूमिका क्या थी.
PMLA की धारा 4 में एक्शन
अगर अदालत में PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध साबित होता है तो धारा 4 के तहत सजा दी जाती है. ऐसे मामलों में कम से कम 3 साल की कठोर कैद हो सकती है. इतना ही नहीं, क्राइम बड़ा हो तो कैद 7 साल, 10 साल तक बढ़ाई जा सकती है. जुर्माना भी लगाया जा सकता है. यह धारा नहीं बताती कि कोई आरोपी पैसा वापस कर दे तो सजा दी जाएगी या नहीं.
फिर पैसा लौटाने का फायदा क्या?
सिर्फ रकम वापस कर देने से कोई आरोपी सजामुक्त नहीं हो सकता. मुकदमे की स्थिति भी देखनी होती है. जैसे आरोपी ने जांच में सहयोग किया या नहीं. संपत्ति छिपाई या नहीं. रकम वापस की या नहीं. इन फैक्ट्स को देखकर ही सजा तय होती है. इससे सजा कम जरूर हो सकती है.
- PMLA की धारा 24 में छिपा राज
पीएमएलए की धारा 24 काफी कुछ साफ करती है. इसमें Burden of Proof का जिक्र है. यही बताती है कि जो प्रॉपर्टी है, क्या वह क्राइम से जुड़ी हुई है? इसका प्रूफ क्या है? यानी अगर ईडी किसी रकम को क्राइम से जुड़ा पाती है तो सिर्फ पैसा लौटा देने से बात खत्म नहीं होगी.कोर्ट के सामने आरोपी को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी. वह कैसे जुडा, उसका मकसद क्या था. अदालत एक एक चीज के फैक्ट्स देखती है. उसके बाद ही फैसला लेती है.
क्या पैसा लौटाने के बाद जेल नहीं जाना होगा?
पीएमएलए कानून में अभी इसका जिक्र नहीं किया गया है. अगर आरोपी अग्रिम जमानत मांगता है तो ईडी के विरोध करते ही जमानत नहीं मिलेगी. लेकिन अगर आरोपी ने ईडी के साथ सहयोग किया तो ईडी अग्रिम जमानत का विरोध नहीं करेगी. कई मामलों में ऐसा देखा गया है. हालांकि, पूरा पैसा ईडी को वापस कर दिया, यह जमानत की गारंटी नहीं हो सकता. कोर्ट पूरे मामले के तथ्य, आरोपी की भूमिका, सबूत और शर्तें सब देखती है. एक और बात, सजा हो जाने पर उसके आचरण को देखकर सजा कम जरूर हो सकती है. हालांकि, यह भी पूरी तरह कोर्ट के विवेक और सबूतों पर निर्भर करता है.
शेफाली बग्गा ने पैसा जमा कर दिया, इसका ये मतलब नहीं कि उनपर लगे आरोप खत्म हो गए. ये तो वही बात हो गई कि कोई डकैती करे और जब पकड़ा जाए तो पैसा वापस कर दे. मनी लॉड्रिंग कानून तो ऐसे काम नहीं करता. कानून देखता है कि आप उस क्रिमिनल एक्टिविटी में इनवॉल्व हो या नहीं. सजा क्राइम की मिलती है. आप ये कहकर नहीं बच सकते कि मुझे तो पता ही नहीं था कि वह काम गलत था. मैंने अनजाने में किया. ईडी की सर्च के बाद आपने पैसे वापस करने का सोचा. आपके प्रमोशन करने से ठगी हुई. ईडी ऐसे मामलों में एक्शन जरूर लेती है.
-विकास गर्ग, सीनियर स्पेशल काउंसिल ED
मतलब साफ है कि अगर किसी व्यक्ति पर अपराध से मिली रकम रखने या मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है और वह रकम जांच एजेंसी को वापस कर देता है, तो इससे रकम की रिकवरी हो सकती है, लेकिन अपराध अपने आप खत्म नहीं होता. मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट में एक्शन होगा, अपराध तय होगा. सजा भी मिलेगी. अपराध से जुड़ी संपत्ति की कुर्की भी की जा सकती है.