हरिद्वार: उत्तराखंड के हरिद्वार में वैसे तो खरीदारी के लिए कई बाजार है. जहां कई तरह के सामान मिलते हैं. लेकिन यहां का ज्वालापुर स्थित कटहरा बाजार बेहद खास है. यह सिर्फ खरीदारी की जगह नहीं है, बल्कि शहर की पुरानी पहचान का भी हिस्सा है. ब्रिटिश काल से मौजूद इस बाजार को एक सदी से ज्यादा समय बीत चुका है. समय के साथ शहर में कई नए बाजार खुले, लेकिन कटहरा बाजार की रौनक और लोगों का भरोसा आज भी बना हुआ है. किफायती दाम और जरूरत का सामान एक ही जगह मिलने के कारण यहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करने पहुंचते हैं.
कटहरा बाजार में कपड़ों से लेकर जूते-चप्पल, बर्तन, कॉस्मेटिक सामान, स्कूल बैग और सराफा तक की दुकानें हैं. यहां कई ऐसी पुरानी दुकानें भी हैं, जो लंबे समय से कारोबार कर रही हैं. बाजार की खासियत यह है कि रोजमर्रा के सामान के साथ कई ऐसी चीजें भी यहां मिल जाती हैं, जिन्हें आसपास के बाजारों में ढूंढना मुश्किल होता है. होली, दीपावली और दूसरे त्योहारों के दौरान हरिद्वार के अलावा आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां खरीदारी करने पहुंचते हैं. भीड़ को देखते हुए इन दिनों प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ानी पड़ती है.
जन्म से पहले से बाजार में कारोबार कर रहा परिवार
कटहरा बाजार के व्यापारी अशोक गुप्ता बताते हैं कि उनका जन्म इसी बाजार में हुआ और उनके जन्म से पहले से ही यह बाजार खरीदारी का प्रमुख केंद्र रहा है. उनके मुताबिक, दूर-दूर से लोग यहां सामान खरीदने आते हैं. बाजार में जरूरत का सामान अपेक्षाकृत कम दामों पर मिल जाता है, इसलिए ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती है. अशोक गुप्ता बताते हैं कि बाजार की कई दुकानें काफी पुरानी हैं. यहां सिर्फ आसपास के लोग ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों से भी लोग सामान खरीदने आते हैं. उनका कहना है कि यहां के व्यापारी ग्राहक को महत्व देते हैं और सेवा के भाव से कारोबार करते हैं. यही वजह है कि त्योहारों के अलावा सामान्य दिनों में भी बाजार में अच्छी भीड़ रहती है.
पुराने कारोबार और दुकानों ने बचाकर रखी है पहचान
वहीं, व्यापारी सुमित अग्रवाल बताते हैं कि कटहरा बाजार को शहर का हार्ट ऑफ सिटी भी कहा जाता है. यह ज्वालापुर के पुराने और प्रमुख बाजारों में शामिल है, जहां जरूरत का सामान उचित दामों पर मिल जाता है. सुमित अग्रवाल के मुताबिक, बाजार की एक बड़ी खासियत यहां लंबे समय से चल रहे कारोबार हैं. उनके अनुसार, आज भी करीब 95 प्रतिशत पुराने व्यवसाय यहां मौजूद हैं. इन दुकानों से वर्षों से जुड़े ग्राहक अब पीढ़ियों से खरीदारी करने आ रहे हैं. यही पुराना जुड़ाव बाजार की पहचान को बनाए हुए है. उन्होंने बताया कि ज्वालापुर का कटहरा बाजार शहर के सबसे ज्यादा भीड़ वाले बाजारों में शामिल है. त्योहारों के समय बाजार को खास तौर पर सजाया जाता है. इसकी सजावट लोगों को भी आकर्षित करती है और कई ग्राहक बाजार की तस्वीरें लेकर सोशल मीडिया पर भी साझा करते हैं.
शादी की खरीदारी के लिए भी पहुंचते हैं लोग
व्यापारी पौरुष अरोड़ा बताते हैं कि ज्वालापुर का कटहरा बाजार आजादी से पहले से मौजूद है. समय बदलने के बावजूद यहां की कई दुकानें आज भी पुरानी हैं. स्थानीय बाजार होने के कारण हरिद्वार के अलग-अलग इलाकों से लोग यहां खरीदारी करने पहुंचते हैं. उनके मुताबिक, बाजार में महिलाओं की साड़ी, लहंगे, जूते और दूसरी जरूरत की चीजें उचित दामों पर मिल जाती हैं.
हरिद्वार और आसपास के जिलों में शादी-ब्याह होने पर भी लोग खरीदारी के लिए कटहरा बाजार पहुंचते हैं. बाजार पुराना होने के साथ यहां लंबे समय से कारोबार कर रहे दुकानदारों की वजह से ग्राहकों का जुड़ाव भी बना हुआ है. हरिद्वार आने वाले लोगों को एक बार कटहरा बाजार में खरीदारी जरूर करनी चाहिए. इससे पुराने कारोबारियों से जुड़ने और बाजार की पुरानी पहचान को करीब से देखने का मौका मिलेगा.