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Telipara Durgotsav: बिलासपुर के तेलीपारा में डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से भव्य दुर्गा पंडाल तैयार हो रहा है. पंडाल बनाने के लिए कोलकाता से 40 कारीगर पहुंचे हैं, जो दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. सुबह 7 बजे से रात 1:30 बजे तक कारीगर थर्माकोल, डिजाइन और रंग-रोगन का काम करते हैं. कारीगरों की मेहनत से स्वर्ण जयंती वर्ष में तेलीपारा का दुर्गोत्सव खास बनने जा रहा है.
Telipara Durgotsav: बिलासपुर के तेलीपारा में इस बार दुर्गोत्सव के 50वें वर्ष को खास बनाने के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है. पंडाल की भव्यता देखने के लिए लोग इसके पूरा होने से पहले ही पहुंच रहे हैं, लेकिन इस आकर्षण के पीछे सबसे बड़ी कहानी उन कारीगरों की है, जो कोलकाता से बिलासपुर आकर पिछले करीब दो महीने से दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. करीब 40 कारीगर सुबह 7 बजे से लेकर रात 1:30 बजे तक थर्माकोल की कटिंग, डिजाइन, रंग-रोगन और फिनिशिंग में जुटे हैं. घर से दूर रहकर इन कारीगरों की मेहनत अब तेलीपारा के पंडाल को भव्य रूप देने में नजर आने लगी है.
पिता का काम संभालकर कारीगरों की टीम के साथ बिलासपुर पहुंचे नेपाल दास
पंडाल तैयार कर रहे नेपाल दास ने बताया कि उनके पिता कोलकाता में पंडाल बनाने का काम करते थे. उन्होंने पिता के काम को अपनी जिम्मेदारी मानकर इस कला को आगे बढ़ाया. इस बार करीब 40 कारीगरों की टीम के साथ वह बिलासपुर पहुंचे हैं. पंडाल बनाने का काम करीब 30 लाख रुपए से शुरू होता है और बजट के अनुसार इसे और भव्य बनाया जा सकता है.
सुबह 7 बजे से रात 1:30 बजे तक मेहनत, शहर घूमने तक का समय नहीं
कारीगर महादेव मायती पिछले 6 साल से इस टीम के साथ काम कर रहे हैं. वह रंग-रोगन और फिनिशिंग का काम कर रहे हैं, जबकि उनके साथ करीब 15 लोग थर्माकोल पर काम कर रहे हैं. कारीगरों के मुताबिक कई बार रोजाना 16 से 17 घंटे तक काम करना पड़ता है. सुबह 7 बजे से काम शुरू होता है और रात 1:30 बजे तक चलता है. खाना खाने और सोने के अलावा बिलासपुर घूमने या आराम करने का समय तक नहीं मिल पाता.
40 साल का अनुभव लेकर आनंद शाह बना रहे भव्य पंडाल
कारीगर आनंद शाह करीब 40 साल से पंडाल बनाने का काम कर रहे हैं. कोलकाता और आसपास के शहरों में कई बड़े और भव्य पंडाल तैयार कर चुके हैं. वहीं, समिति से जुड़े गौरव कश्यप का कहना है कि कोलकाता से आए कारीगरों की फिनिशिंग बेहद शानदार है. थर्माकोल के बारीक काम से लेकर डिजाइन और रंग-रोगन तक हर हिस्से में उनकी मेहनत साफ दिखाई दे रही है.
श्रीलंका के मंदिर की थीम, 80 फीट के प्रवेश द्वार होंगे आकर्षण
तेलीपारा का यह पंडाल श्रीलंका के भद्रकाली अम्मन मंदिर की थीम पर तैयार किया जा रहा है. 80-80 फीट ऊंचे प्रवेश द्वार, 20-20 फीट की गणेश-कार्तिकेय प्रतिमाएं और चंदननगर की तर्ज पर रोशनी इसकी खासियत होगी. मां दुर्गा की प्रतिमा बंगाल के प्रसिद्ध मूर्तिकार गणेश पाल तैयार कर रहे हैं. स्वर्ण जयंती वर्ष में तैयार हो रहे इस पंडाल की भव्यता के पीछे कोलकाता से आए कारीगरों की करीब दो महीने की दिन-रात की मेहनत सबसे खास है.