उत्‍तराखंड न्‍यूज: UPI पेमेंट पर क्‍या है देहरादून के व्‍यापार‍ियों का कहना?

उत्‍तराखंड न्‍यूज: UPI पेमेंट पर क्‍या है देहरादून के व्‍यापार‍ियों का कहना?


UPI Transaction Charge: 15 अक्टूबर से केंद्र सरकार की ओर से यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने का नियम लागू किया जा रहा है. ऐसे में देहरादून के व्यापारियों ने सरकार के फैसले पर चिंता जताई है. उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि सरकार के हर फैसले पर हम साथ खड़े थे और हैं. उनके डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाले फैसले का भी हमने समर्थन किया और अब ज्यादातर लोग हर काम ऑनलाइन पेमेंट के माध्यम से ही करते हैं, लेकिन नए नियमों का खामियाजा व्यापारियों को क्यों भुगतना पड़े?

छोटे से लेकर बड़े कारोबारी तक सब होंगे प्रभावित
देहरादून के जेवर व्यापारी यानी सुनार गुरुनैन सिंह का कहना है कि सरकार के 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई भुगतान पर शुल्क के फैसले से हर तरह के व्यापारियों को नुकसान होगा. उन्होंने कहा कि हमारे पास भी ग्राहक ज्यादातर सामान लेते हुए ऑनलाइन पेमेंट ही करते हैं. वहीं दूसरी ओर कच्चा माल और कई तरह के सामान को खरीदने के लिए हम भी ऑनलाइन पेमेंट करते हैं, लेकिन अगर इस पर ही टैक्स लिया जाएगा तो हम क्या, सभी व्यापारियों को नुकसान होगा.

भले ही उसमें ठेला लगाने वाला व्यापारी क्यों न हो, अगर वह 2-3 हजार का भी ट्रांजैक्शन करता है तो उसको नुकसान होगा. उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले कहा था कि टैक्स फ्री कर दिया जाएगा, लेकिन आए दिन नए-नए तरह के टैक्स व्यापारियों को झेलने पड़ रहे हैं, बिल्कुल जिस तरह से अंग्रेजी शासन काल में होता था. नोटबंदी, जीएसटी और अब कई तरह के करों ने आमजन से लेकर व्यापारियों तक की कमर तोड़ दी है.

कैशलेस व्यवस्था से अब टैक्स का नया संकट
वहीं कपड़ा व्यापारी जाहिद का कहना है कि वह दिल्ली से बल्क में सामान लेकर आते हैं, हम कैश में पैसा नहीं लेकर जाते हैं क्योंकि चोरी होने का खतरा रहता है, इसीलिए ऑनलाइन पेमेंट के सहारे ही सारा काम चल रहा था, लेकिन अब अगर इस तरह से व्यापारियों से टैक्स लिया जाएगा तो भला बचत कहां हो पाएगी? पहले ही डीजल के बढ़ते दाम और महंगाई ने परेशान कर दिया है.

खर्च निकालना मुश्किल, आंदोलन की दी चेतावनी
सुनील बांगा ने कहा कि व्यापारियों को पहले ही इनकम टैक्स, भवन कर और जीएसटी जैसे टैक्स देने पड़ते हैं. उन्होंने कहा कि हम व्यापारियों को बिजली का बिल, कर्मचारियों की सैलरी और सभी खर्च भी उठाने पड़ते हैं. ऑनलाइन मार्केट ने पहले ही बाजार मंदा कर दिया है, लोग ज्यादातर ऑनलाइन ही शॉपिंग करते हैं, जिससे खर्च निकालना पहले ही मुश्किल हो जाता है और अब इस तरह के टैक्स से व्यापारियों की कमर टूट जाएगी. उन्होंने बताया कि बरसात में काम नहीं था और अब थोड़ा काम चला, तो अब यूपीआई भुगतान पर शुल्क लेने के लिए सरकार नियम ला रही है.

उन्होंने कहा कि व्यापारियों पर पड़ने वाला टैक्स का बोझ हम सहन नहीं कर पाएंगे, इसीलिए हम सरकार से निवेदन करते हैं कि जो आप यूपीआई पर टैक्स लेने पर विचार कर रहे हैं उसे बदल दीजिए, वरना व्यापारियों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि देश किसान, जवान और व्यापारियों से ही चलता है. पहले तो सरकार डिजिटल इंडिया बनाने की बात करती थी, कैशलेस की अवधारणा के साथ ऑनलाइन पेमेंट को बढ़ावा दिया और अब जब लोग इस पर निर्भर हो गए हैं तब उस पर शुल्क लेने की बात कर रही है. उन्होंने कहा कि हम अगर 50 हजार या 1 लाख का माल लेंगे और ऑनलाइन पेमेंट करेंगे तो हमें एक्स्ट्रा चार्ज देना होगा.



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