फिर नोबेल पुरस्कार मांगने लगे ट्रंप, कमेटी को मारे ताने- मैंने 8 जंगें रुकवाईं
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Donald Trump Demand for Nobel Peace Prize: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दिल का दर्द फिर छलक गया, जैसे ही नोबल प्राइज देने का सिलसिला शुरू हुआ. दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित नोबल पीस प्राइज के लिए तड़प रहे ट्रंप ने एक बार फिर कमेटी को ताने मारे और कहा कि वे 8 युद्ध सुलझा चुके हैं और वो कोई शेखी नहीं बघार रहे.
डोनाल्ड ट्रंप को चाहिए नोबेल शांति पुरस्कार. (रॉयटर्स)
Donald Trump Demand for Nobel Peace Prize: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार की अपनी डिमांड को लेकर सुर्खियां बटोर रहे हैं. जैसे ही इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों का ऐलान होना शुरू हुआ, डोनाल्ड ट्रंप ने 7 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें लगता है कि 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार उन्हें मिलना चाहिए. एक बार फिर कमेटी को ताना मारते हुए उन्होंने यह भी माना कि अंतिम फैसला नॉर्वे की नोबेल समिति करेगी और यह जरूरी नहीं कि प्राइज उन्हें ही मिले.
ट्रंप ने कहा कि पुरस्कार की घोषणा का समय अब करीब आ गया है. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान किए गए कूटनीतिक प्रयासों का जिक्र करते हुए दावा किया कि उन्होंने 8 युद्धों को खत्म कराने में भूमिका निभाई है. उनके मुताबिक अमेरिकी इतिहास में शायद ही किसी राष्ट्रपति ने इस स्तर पर जंग रुकवाने का प्रयास किया होगा. ट्रंप ने पुराना राग अलापते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे कदम उठाए हैं, जो उनसे पहले किसी राष्ट्रपति ने नहीं किए. उन्होंने दावा किया कि कई संघर्षों में उनकी सरकार ने बातचीत, दबाव और आर्थिक प्रतिबंधों तक का इस्तेमाल करके हालात संभाले.
मैं डींगें नहीं हांकता, ये सच है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बात करते हुए कहा – ‘मैंने वो काम किया है जो किसी और ने कभी नहीं किया. मैं कोई डींग नहीं हांक रहा, बस फैक्ट्स बता रहा हूं. किसी राष्ट्रपति ने शायद ही कभी कोई जंग सुलझाई हो, लेकिन मैंने 8 जंगें सुलझाई हैं.’ हालांकि ट्रंप के इन दावों पर सवाल भी उठते रहे हैं. दरअसल जिन संघर्षों को खत्म कराने का श्रेय वह खुद को देते हैं, उनमें शामिल कुछ पक्ष उनकी भूमिका को उतना बड़ा नहीं मानते. खासतौर पर भारत-पाकिस्तान के बीच जो सैन्य संघर्ष मई, 2025 में हुआ, उसे लेकर भारत ट्रंप की भूमिका को नकारता है.
नोबेल समिति को फिर सुनाया
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें पता है कि नॉर्वे की नोबेल समिति का फैसला उनके पक्ष में आएगा या नहीं, यह निश्चित नहीं है. उन्होंने संकेत दिया कि समिति का इतिहास ऐसा रहा है कि वह शायद उनके जैसे व्यक्ति को पुरस्कार न दे. इसके बावजूद ट्रंप का कहना है कि पुरस्कार मिले या नहीं, उनके काम की अहमियत कम नहीं होगी. आपको बता दें कि पिछले साल भी डोनाल्ड ट्रंप नोबल पीस प्राइज पाने की उम्मीद कर रहे थे और जब उन्हें ये नहीं मिला, तो वे काफी भड़क भी गए थे. आपको बता दें कि नोबेल शांति पुरस्कार का फैसला पूरी तरह स्वतंत्र नॉर्वेजियन नोबेल समिति करती है. 2026 के पुरस्कार की घोषणा शुक्रवार को होनी है.
क्यों ट्रंप चाहते हैं नोबल पुरस्कार?
डोनाल्ड ट्रंप ने 2009 में नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का भी जिक्र किया. ट्रंप ने सवाल उठाया कि ओबामा को राष्ट्रपति बनने के शुरुआती दौर में ही यह पुरस्कार क्यों दिया गया था. ट्रंप ने अप्रत्यक्ष रूप से अपने दावे को मजबूत करने की कोशिश की कि उनके प्रयास पुरस्कार के ज्यादा योग्य हैं. हालांकि ट्रंप के प्रयासों में सबसे ज्यादा मुश्किल उनके लिए रूस-यूक्रेन के बीच का युद्ध को सुलझाना है. वे दावा कर रहे थे कि उनकी सरकार इसे सत्ता में आते ही सुलझा लेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ.