‘बच्‍चा’ और ‘र‍िलेश‍नश‍िप’ छुपाया… फ‍िर होने वाली दुल्‍हन से बनाया संबंध, कोर्ट ने लग गया SC/ST ACT

‘बच्‍चा’ और ‘र‍िलेश‍नश‍िप’ छुपाया… फ‍िर होने वाली दुल्‍हन से बनाया संबंध, कोर्ट ने लग गया SC/ST ACT


कोच्चि: शादी तय होने के बाद होने वाली दुल्हन से अपने पहले से चल रहे लिव-इन रिलेशनशिप और उससे हुए बच्चे की बात छिपाना अब कानूनी रूप से भी भारी पड़ सकता है. केरल हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि ऐसी जानकारी छिपाकर यौन संबंध बनाना पहली नजर में भारतीय न्‍याय संह‍िता (बीएनएस) की धारा 69 के तहत ‘धोखे से यौन संबंध’ के दायरे में आ सकता है.

हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी जस्टिस ए.बदरुद्दीन ने कोझिकोड के फेरोक पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले में की. कोर्ट ने आरोपी की अग्रिम जमानत से जुड़ी अपील खारिज कर दी और उसे जांच अधिकारी के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया.

क्या है केस?
शिकायत के मुताबिक, आरोपी और महिला की शादी तय हुई थी. महिला अनुसूचित जाति समुदाय से है. दोनों परिवारों के बीच शादी की रस्म भी हुई थी और महिला के परिवार ने इस कार्यक्रम में करीब 10 लाख रुपये खर्च किए थे. महिला का आरोप है कि आरोपी ने इस दौरान एक अहम बात छिपाई. वह पहले से किसी दूसरी महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में था और उस रिश्ते से उसका तीन साल का बच्चा भी था. महिला के मुताबिक, अगर उसे यह जानकारी पहले से होती तो वह शादी और रिश्ते को लेकर अपना फैसला अलग तरीके से ले सकती थी.

शादी तय होने के बाद वायनाड गई महिला
शिकायत के अनुसार, शादी तय होने के बाद महिला आरोपी के कहने पर वायनाड गई थी. वहां दोनों एक होटल में रुके. महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसके साथ यौन संबंध बनाए और उसने होने वाली शादी के भरोसे पर सहमति दी थी. इसी मामले में आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), धारा 69 और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) एक्‍ट की धारा 3(2)(वीए) के तहत मामला दर्ज किया गया था.

आरोपी ने कोर्ट में क्या दलील दी?
आरोपी की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि BNS की धारा 69 यहां लागू नहीं होनी चाहिए. उसका कहना था कि इस धारा के तहत मामला तब बनता है, जब कोई व्यक्ति शादी का वादा करके बाद में उससे पीछे हट जाए.
आरोपी ने कहा कि वह महिला से शादी करने के लिए तैयार था. इसलिए उसके खिलाफ धारा 69 का मामला नहीं बनता.

मामला सिर्फ शादी के वादे तक सीमित नहीं: कोर्ट
केरल हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. कोर्ट ने समझाया कि BNS की धारा 69 के तहत दो अलग-अलग स्थितियां हो सकती हैं. पहली, जब यौन संबंध के लिए सहमति धोखे से हासिल की जाए. दूसरी, जब शादी का ऐसा वादा किया जाए जिसे पूरा करने का इरादा ही न हो और उसी आधार पर यौन संबंध बनाए जाएं. इस मामले में कोर्ट ने कहा कि आरोप पहली स्थिति से जुड़े हैं. यानी कोर्ट के मुताबिक, आरोपी का यह कहना कि वह महिला से शादी करने को तैयार था, अपने आप में पर्याप्त नहीं है. अगर यौन संबंध के लिए सहमति लेते समय उसने जानबूझकर अपने पहले से मौजूद रिश्ते और बच्चे की जानकारी छिपाई, तो प्रथम दृष्टया यह ‘धोखे से’ यौन संबंध बनाने के दायरे में आ सकता है.

कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि शादी तय करते समय आरोपी और उसके परिवार की ओर से ऐसा समझा गया था कि वह अविवाहित है और किसी दूसरे वैवाहिक प्रकृति के रिश्ते में नहीं है. कोर्ट के अनुसार, इसी आधार पर शादी तय हुई और बाद में पुराने रिश्ते और बच्चे की जानकारी छिपाकर यौन संबंध बनाए जाने का आरोप है. इसलिए प्रथम दृष्टया बीएनएस की धारा 69 के तहत अपराध बनता है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपित कृत्य को रेप नहीं माना जा रहा, लेकिन आरोपों के आधार पर यह बीएनएस की धारा 69 में बताई गई पहली स्थिति यानी ‘धोखे से’ यौन संबंध के दायरे में आ सकता है.

SC/ST एक्ट भी लगा है
महिला के अनुसूचित जाति समुदाय से होने के कारण आरोपी पर SC/ST एक्ट, 1989 की धारा 3(2)(va) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है. इसी वजह से आरोपी ने अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट का रुख किया था. हालांकि, यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि हाई कोर्ट का फैसला इस चरण पर प्रथम दृष्टया आरोपों और जमानत के सवाल पर है. इसका मतलब यह नहीं है कि आरोपी को अंतिम रूप से दोषी करार दिया गया है. सभी दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने माना कि उपलब्ध आरोपों के आधार पर प्रथम दृष्टया संबंधित अपराध बनते हैं. इसके बाद कोर्ट ने आरोपी की अपील खारिज कर दी और उसे जांच अधिकारी के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया.

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