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Paddy Crop Farming Tips: धान में कल्ले निकलने के बाद तना छेदक और पत्ती लपेटक का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में सिर्फ कीटनाशक डालना काफी नहीं, बल्कि सही मात्रा, नोजल, मौसम और छिड़काव का तरीका भी जरूरी है. किसान अंशुमान सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि धान में कल्ले फूटने और बाली बनने की अवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है इसलिए इस समय खेत की नियमित निगरानी के साथ कीटों की पहचान और जरूरत के अनुसार ही कीटनाशक का इस्तेमाल करना चाहिए., जानिए एक्सपर्ट से कीटनाशक छिड़कने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां.
सतना: धान की फसल में कल्ले निकलने के बाद किसान की मेहनत का सबसे अहम दौर शुरू हो जाता है. इस समय पौधे तेजी से बढ़ते हैं और आगे चलकर बालियां बनने की तैयारी करते हैं. करीब 60 दिन की फसल में तना छेदक और पत्ती लपेटक जैसे कीटों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में केवल कीटनाशक खरीदकर खेत में छिड़क देना ही काफी नहीं है बल्कि दवा की सही मात्रा, पानी, नोजल, मौसम और छिड़काव का तरीका भी बहुत मायने रखता है. अगर दवा सही तरीके से पौधे तक नहीं पहुंचती है तो कीटों पर अपेक्षित असर नहीं मिल सकता.
किसान अंशुमान सिंह ने लोकल 18 को बताया कि धान लगाने के करीब 2 महीने यानी 60 दिन बाद फसल कल्ले फूटने और बाली बनने की महत्वपूर्ण अवस्था में पहुंचती है. इसी दौरान तना छेदक और पत्ती लपेटक जैसे कीट फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. तना छेदक पौधे के तने के अंदर जाकर नुकसान करता है जबकि पत्ती लपेटक पत्तियों को लपेटकर उनके अंदर से नुकसान पहुंचाता है. इसलिए इस अवस्था में किसान खेत का निरीक्षण करते रहें और कीटों की स्थिति दिखाई देने पर कीटनाशक का उपयोग करें.
सबसे पहले अपनी सुरक्षा का रखें ध्यान
कीटनाशक का छिड़काव शुरू करने से पहले किसान को अपनी सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है. दवा तैयार करते समय मास्क, दस्ताने और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें. कोशिश करें कि कीटनाशक शरीर या त्वचा के सीधे संपर्क में न आए. दवा का घोल बनाते समय जल्दबाजी न करें और हमेशा उसी उत्पाद के डिब्बे पर दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ें. अलग-अलग दवाओं की मात्रा और इस्तेमाल का तरीका अलग हो सकता है इसलिए केवल अनुमान के आधार पर दवा मिलाना ठीक नहीं है.
दवा की मात्रा में न करें मनमानी
अंशुमान सिंह ने बताया कि उदाहरण के तौर पर क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5% SC का इस्तेमाल करने पर 60 ml प्रति एकड़ की मात्रा बताई गई है. इसे पानी में अच्छी तरह मिलाकर घोल तैयार किया जाता है. हालांकि किसी भी कीटनाशक की अंतिम मात्रा और इस्तेमाल उत्पाद के लेबल और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही तय करना चाहिए. ज्यादा दवा डालने से यह जरूरी नहीं कि कीट जल्दी खत्म हो जाएंगे. उल्टा फसल, पर्यावरण और किसान की सुरक्षा पर इसका असर पड़ सकता है.
सही नोजल से करें छिड़काव
कीटनाशक का असर बेहतर पाने के लिए स्प्रेयर और नोजल का चुनाव भी महत्वपूर्ण है. नैपसैक स्प्रेयर में फ्लैट फैन या होलो कोन नोजल का इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि दवा की बूंदें पौधों पर समान रूप से पहुंच सकें. छिड़काव करते समय कोशिश करें कि घोल केवल कुछ पौधों पर ज्यादा मात्रा में न गिरे बल्कि पूरे खेत में एक समान तरीके से पहुंचे. स्प्रेयर की स्थिति और नोजल की कार्यक्षमता भी पहले जांच लें.
सुबह या शाम को छिड़काव करना बेहतर
कीटनाशक का छिड़काव तेज धूप में करने से बचना चाहिए. सुबह जल्दी या दोपहर बाद, खासकर शाम करीब 4 बजे के बाद छिड़काव किया जा सकता है. तेज हवा चल रही हो या बारिश की संभावना हो तो उस समय स्प्रे नहीं करना चाहिए. तेज हवा में दवा की बूंदें टारगेट वाली फसल से हट सकती हैं जबकि बारिश होने पर दवा बह सकती है और उसका असर कम हो सकता है. इसलिए मौसम देखकर ही छिड़काव का समय तय करें.
छिड़काव करते समय हवा का रखें ध्यान
स्प्रे करते समय हवा की दिशा का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है. ऐसी स्थिति में काम करें कि कीटनाशक की बूंदें हवा के साथ आपके चेहरे या शरीर की तरफ न आएं. छिड़काव के दौरान हाथ से चेहरे को छूने, खाने-पीने या तंबाकू आदि का सेवन करने से बचें. साथ ही काम पूरा होने के बाद इस्तेमाल किए गए उपकरणों को सुरक्षित तरीके से साफ करना चाहिए.
स्प्रे के बाद स्प्रेयर और कपड़ों की सफाई जरूरी
कीटनाशक का छिड़काव पूरा होने के बाद नैपसैक स्प्रेयर को साफ पानी से अच्छी तरह धोएं और उसे ऐसी जगह रखें जहां बच्चे या पशु न पहुंच सकें. किसान अपने हाथ-पैर और शरीर को साबुन से अच्छी तरह साफ करें और संभव हो तो स्नान करें. छिड़काव के दौरान पहने गए कपड़ों को भी अलग से धोना बेहतर है. इस तरह धान में कीट नियंत्रण के साथ किसान अपनी सुरक्षा का भी ध्यान रख सकते हैं.