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Tariff vs Indias : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ कारोबार करने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने वाला कानून पास करा लिया है. इसका जोखिम भारत पर सबसे ज्यादा है, क्योंकि भारत आज भी अपनी जरूरत का आधे से ज्यादा तेल रूस से ही खरीद रहा है.
भारत का आधे से ज्यादा सॉफ्टवेयर निर्यात अमेरिका को होता है.
नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आजकल बडे़ गदगद नजर आ रहे हैं. उनके हाथ ऐसा ब्रम्हास्त्र लग गया है, जिससे वे दुनिया के किसी भी देश के साथ खुलकर टैरिफ-टैरिफ खेल सकते हैं. उनका सबसे बड़ा निशाना भारत है, जो आज भी रूस से अपनी जरूरत का आधा से ज्यादा तेल खरीदता है. अगर ट्रंप ने भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का फैसला किया तो इसका असर अमेरिका पर भी होगा या नहीं. खासकर सर्विस सेक्टर में भारत ने इस कदर पैठ बना ली है कि अगर अमेरिका ने भारत के सर्विस सेक्टर पर दबाव बनाया तो उसका खामियाजा उसे खुद भी झेलना पड़ेगा.
रिजर्व बैंक ने हाल में आंकड़े जारी कर बताया है कि भारत के कुल सॉफ्टवेयर सेवाओं के निर्यात में 50 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी सिर्फ अमेरिका की है. वित्तवर्ष 2025-26 में भारत का कुल सॉफ्टवेयर निर्यात 11 फीसदी बढ़कर 119.7 अरब डॉलर रहा है. इसमें अमेरिका की हिस्सेदारी 54.1 फीसदी पहुंच गई है, जो इससे पहले के वित्तवर्ष में 52.9 फीसदी रही थी. वित्तवर्ष 2024 में अमेरिका को निर्यात की हिस्सेदारी 54.1 फीसदी रही थी.
दुनिया में कितना रहा सॉफ्टवेयर निर्यात
भारतीय कंपनियों का कुल सॉफ्टवेयर निर्यात वित्तवर्ष 2026 में 8.2 फीसदी बढ़कर 221.4 अरब डॉलर रहा है, जिसमें 17.9 अरब डॉलर का निर्यात तो सिर्फ विदेशों में काम करने वाली भारतीय कंपनियों का रहा है. अमेरिका के बाद भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात का दूसरा सबसे गंतव्य यूके है, जहां निर्यात पहले के 15.5 फीसदी से गिरकर 15.4 फीसदी पर आ गई है. कुल सॉफ्टवेयर निर्यात में आईटी सेवाओं की हिस्सेदारी 147 अरब डॉलर है, जो सबसे बड़ी कैटेगरी है. इसमें आउटसोर्सिंग सेवाओं का 56 अरब डॉलर हिस्सा है जबकि सॉफ्टवेयर उत्पादों का निर्यात 6.4 अरब डॉलर के आसपास है.