दिल्ली में तैनात एसीपी विवेक भगत आजकल चर्चा में हैं. वह हाल ही में जंतर मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार के साथ कथित तौर पर बदसलूकी के आरोप में घिरे हैं. आरोप में घिरने के दो दिन के बाद ही उनके प्रमोशन की खबरें भी आईं. उन्हें ACP से प्रमोट करके दिल्ली का अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त यानी एडिशनल डीसीपी का चार्ज देने का आदेश तो आया लेकिन फिर इस ड्यूटी चार्ट से जुड़े आदेश में चेंज भी कर दिया गया है. मतलब कि ACP विवेक भगत को अभी प्रमोट नहीं किया जाएगा. क्या आपको पता है कि विवेक भले ही एसीपी रैंक पर हों लेकिन वह आईपीएस ऑफिसर नहीं हैं. वह DANIPS ऑफिसर हैं. ये कौन सी सर्विस है और कैसे अलग है? इसमें प्रमोशन का फैसला कैसे होता है?
यह संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की सिविल सेवा परीक्षा के जरिए मिलने वाली सर्विस है. इसकी तैयारी करने वाले कैंडिडेट्स के बीच IAS और IPS के बाद DANIPS कैडर काफी फेमस ऑप्शन में से एक है. यह केंद्रीय सिविल सर्विस ग्रुप बी का एक प्रमुख पुलिस कैडर है, जो देश की राजधानी दिल्ली समेत विभिन्न केंद्र शासित प्रदेशों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालता है.
DANIPS कैडर क्या है?
DANIPS का पूरा नाम दिल्ली, अंडमान निकोबार आईलैंड, लक्ष्यद्वीप, दमन दीव और दादरा नागर हवेली पुलिस सर्विस है. यह गृह मंत्रालय के अधीन आने वाली एक पुलिस सेवा है. DANIPS अधिकारी दिल्ली पुलिस में सामान्य तौर पर सहायक पुलिस कमिश्नर यानी ACP और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में DSP या SDPO की पोस्ट पर तैनात होते हैं. यह सेवा AGMUT कैडर IPS के लिए फीडर कैडर के रूप में काम करती है. यानी इस सेवा के अधिकारियों को आगे चलकर प्रमोट करके IPS का दर्जा दिया जाता है.
DANIPS दरअसल ग्रुप बी की पुलिस सेवा है, इसलिए यह सामान्य तौर पर IAS, IFS, IPS और ग्रुप ए सेवाओं जैसे IRS वगैरह का आवंटन पूरा होने के बाद या उन कैंडिडेट्स को मिलती है जो पुलिस की सर्विस चुनते हैं. इसमें सर्विस की प्राथमिकता भी तय कर सकते हैं. अगर किसी कैंडिडेट को IPS यानी ग्रुप ए नहीं मिलता और वह केवल पुलिसिंग या वर्दी वाली नौकर में ही जाना चाहता है, तो वह IRS या फिर ग्रुप ए की अन्य सेवाओं की तुलना में DANIPS को ऊपर रखता है. ऐसे में यह सेवा 300-350 रैंक के आसपास भी अलॉट हो जाती है.
DANIPS कैडर कैसे मिलता है?
DANIPS में दो तरीकों से भर्ती होती है. पहली है डायरेक्ट रिक्रूटमेंट, जिसके लिए 66.6 प्रतिशत कोटा तय है. UPSC की तरफ से हर साल आयोजित की जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से भर्ती होती है. अभ्यर्थी अपनी वरीयता लिस्ट में DANIPS भरते हैं. मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू में आए नंबर और ऑल इंडिया रैंक के आधार पर मेरिट लिस्ट से कैंडिडेट्स को यह कैडर आवंटित किया जाता है. वहीं दूसरा है प्रमोशन का 33.3 प्रतिशत कोटा. केंद्र शासित प्रदेशों के स्टेट पुलिस सेवा जैसे दिल्ली पुलिस में इंस्पेक्टर पद के नॉन गैजेट अधिकारियों को प्रमोट करके भी DANIPS अधिकारी बनाया जाता है.
क्या होती है योग्यता?
UPSC सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से DANIPS में सलेक्ट होने के लिए कुछ अहम मानक पूरे करने होते हैं. पहली है एजुकेशनल क्वालिफिकेशन यानी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री. इसके लिए भारत का नागरिक होने की राष्ट्रीयता की शर्त अनिवार्य है. इसमें एज ग्रुप की बात करें तो जनरल कैंडिडेट के लिए मिनिमम 21 साल और मैक्सिमम 32 साल. वहीं OBC के लिए 3 साल और SC/ST के लिए 5 साल की छूट नियमानुसार लागू रहती है. फीजिकल स्टैंडर्ड पर गौर करें तो पुरुष कैंडिडेट की न्यूनतम ऊंचाई 165 सेंटीमीटर और महिला कैंडिडेट के लिए न्यूनतम ऊंचाई 150 सेंटीमीटर होती है.
प्रमोशन का नियम क्या है?
सलेक्शन के बाद अपॉइंटेड अधिकारियों को दिल्ली के झड़ौदा कलां में पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज या नैशनल पुलिस अकादमी में कठिन पुलिसिंग ट्रेनिंग दिया जाता है. दिल्ली में ACP और अन्य केंद्रशासित प्रदेशों में डीएसपी का पद मिलता है. शुरुआत में ACP/DSP रहने के बाद अधिकारी एडिशनल DCP या एडिशनल SP बनते हैं. आमतौर पर 15 से 18 साल की सेवा के बाद DANIPS ऑफिसर्स को प्रमोट करके IPS का दर्जा दे दिया जाता है, जिसके बाद वे जिलों के DCP या SP के रूप में तैनात होते हैं.
ACP पद पर करियर की शुरुआत
UPSC में सलेक्शन और ट्रेनिंग के बाद अधिकारी सीधे दिल्ली के किसी सब-डिवीजन में ACP के रूप में तैनात होते हैं. एंट्री लेवल से लेकर अलग-अलग लेवल तक एसीपी ही बने रहते हैं. 13-14 साल की सेवा पूरी होने के बाद अधिकारी को एडिशनल DCP बनाया जाता है. इस लेवल पर वे जिले की कानून-व्यवस्था, अपराध और अन्य यूनिट की जिम्मेदारी संभालते हैं.
DANIPS से IPS का स्टेटस
गृह मंत्रालय और UPSC के नियमों के तहत 8 साल की नियमित सेवा के बाद DANIPS अधिकारी IPS में इंडक्शन के लिए एलिजिबल हो जाते हैं. हालांकि कैडर समीक्षा, कोर्ट केस या UPSC की सलेक्शन समितियों की बैठकों में देरी की वजह से प्रैक्टिकली इसमें 15 से 18 साल का समय लग जाता है. IPS बनने के बाद अधिकारी AGMUT कैडर के तहत शामिल होते हैं और उन्हें पूरे तौर पर डीसीपी बनाया जाता है.