कवई मछली का कमाल, पानी छोड़कर जमीन पर चलती है, जानिए प्रकृति का अनोखा रहस्य
Last Updated:
Climbing Perch Fish: बारिश के मौसम में सड़कों और घास पर चलती दिखने वाली कवई मछली लोगों को हैरान कर देती है. क्लाइम्बिंग पर्च यानी एनाबास टेस्टुडिनियस पानी के बाहर 6-8 घंटे या उससे अधिक समय तक जिंदा रह सकती है. जानिए कैसे यह मछली जमीन पर चलती है और मानसून में तालाब से बाहर क्यों निकलती है.
हैदराबाद. आमतौर पर मछली जल की रानी होती है और पानी से बाहर निकलते ही दम तोड़ देती है, लेकिन प्रकृति में एक ऐसी भी मछली है जो न सिर्फ पानी के बाहर कई घंटों तक जिंदा रहती है बल्कि जमीन और सड़कों पर बाकायदा चलकर एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जाती है. इस अनोखी मछली को वैज्ञानिक भाषा में एनाबास टेस्टुडिनियस और आम बोलचाल में क्लाइम्बिंग पर्च या कवई मछली कहा जाता है. अक्सर मानसून के मौसम में जब तेज बारिश होती है तो यह तालाबों से निकलकर सड़कों और हरी घासों पर रेंगती हुई दिखाई देती है. कवई मछली जमीन पर चलने के लिए अपने गलफड़ों के ढक्कनों और अपने विशेष पंखों का सहारा लेती है.
इसके गलफड़ों के किनारों पर कांटेदार संरचनाएं होती हैं जिन्हें यह जमीन या घास में टिकाकर आगे की तरफ धक्का देती है. पूंछ को हिलाते हुए यह संतुलन बनाती है और जमीन पर इस तरह आगे बढ़ती है मानो रेंग रही हो. यह मछली यूं ही अपनी मर्जी से बाहर नहीं निकलती, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण हैं. मानसून के दौरान तेज बारिश की वजह से तालाबों और गड्ढों में कीचड़ और गाद घुल जाती है. पानी मटमैला होने से उसमें घुली हुई ऑक्सीजन का स्तर अचानक गिर जाता है. ऐसे में यह मछली बेहतर और साफ जलस्रोत की तलाश में जमीन पर निकल पड़ती है.
इसके अलावा, मानसून इनका मुख्य प्रजनन काल होता है. यह सुरक्षित और उथले गड्ढों या धान के खेतों की खोज में निकलती है ताकि तेज बहाव में इसके अंडे न बहें. कवई मछली के सिर के पास एक खास सहायक अंग होता है जिसे विज्ञान में लैबिरिंथ ऑर्गन कहा जाता है. यह अंग फेफड़ों की तरह सीधे हवा से ऑक्सीजन सोखने का काम करता है. यही वजह है कि यह मछली पानी के बिना भी नम वातावरण में 6 से 8 घंटे या उससे भी अधिक समय तक जीवित रह सकती है. यह प्रवास केवल बारिश या नमी के दौरान ही करती है क्योंकि चिलचिलाती धूप या गर्मी में इसकी त्वचा सूख जाती है जिससे इसकी जान जा सकती है.